श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव:कथा में कृष्ण जन्म पर थिरके श्रद्धालु, जन्मोत्सव मनाया

बहादुरगढ़एक महीने पहले
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कथावाचक अरविंद कृष्ण महाराज ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया। वे शहर के सेक्टर-6 में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार काे चाैथे दिन प्रवचन सुना रहे थे। इस दाैरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।

इसमें जैसे भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नाचने-झूमने लगे। भगवान श्रीकृष्ण की वेश में नन्हें बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे थे। भगवान के जन्म की खुशी पर महिलाओं ने अपने घरों से लाकर मक्खन मिश्री से भगवान को भोग लगाया। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट ग गए, पहरेदार सो गए। वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भरी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया।

कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल के गीत पर भक्त जमकर थिरके। अंत में उन्होंने बताया कि मनुष्य भगवान को छोड़कर माया की ओर दौड़ता है। ऐसे में वह बंधन में आ जाता है। मानव को अपना जीवन सुधारने के लिए भगवत सेवा में ही लीन रहना चाहिए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में इंद्रा, रश्मि, बबली, सुमन, सुनीता, सपना, प्रेक्षा, ईशा, रेखा, सविता ने आरती की। कथा के बाद प्रसाद बांटा गया।

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