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आस्था:भगवान पार्श्वनाथ जयंती पर जैन समाज ने निकाली पालकी यात्रा

बहादुरगढ़6 दिन पहले
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बहादुरगढ़ में पालकी यात्रा में भाग लेते जैन समाज के लोग। - Dainik Bhaskar
बहादुरगढ़ में पालकी यात्रा में भाग लेते जैन समाज के लोग।

शहर में रविवार को जैन समाज की ओर से पार्श्वनाथ जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने भगवान पार्श्वनाथ की पालकी यात्रा निकाली। अनाज मंडी स्थित श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ पाण्डु शिला पक्षी दाना स्थल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधान सुनील जैन, अरुण जैन, विजय जैन, विनोद जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ की जयंती धूमधाम से मनाई गई।

सुबह 10 बजे पूजा-अर्चना के साथ पालकी यात्रा की शुरुआत की गई। पालकी यात्रा अनाज मंडी से चल कर गांधी मार्केट, काठ मंडी से होते हुए वापस अनाज मंडी पार्श्वनाथ पाण्डु शिला पर समाप्त हुई। पालकी यात्रा में जैन समाज के लोग भजनो पर झूमते नजर आये। प्रधान सुनील जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। इनका जन्‍म अर‍िष्‍टनेम‍ि के एक हजार वर्ष बाद इक्ष्‍वाकु वंश में पौष माह के कृष्‍ण पक्ष की एकादशी त‍िथ‍ि को हुआ था।

इन्‍हें तीस वर्ष की अवस्था में एक दिन राजसभा में ‘ऋषभदेव चरित’ सुनकर वैराग्य हो गया। भगवान पार्श्वनाथ क्षमा के प्रतीक और सामाजिक क्रांति के प्रणेता हैं। अरुण जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ ने अज्ञान-अंधकार-आडम्बर और क्रियाकांड के मध्य में क्रांति का बीज बनकर पृथ्वी पर जन्म लिया था। उनका जन्म आज से लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व पौष कृष्ण एकादशी के दिन वाराणसी में हुआ था,जो इस वर्ष 8 जनवरी 2021 को है। उनके पिता का नाम अश्वसेन और माता का नाम वामादेवी था।

राजा अश्वसेन वाराणसी के राजा थे। जैन पुराणों के अनुसार तीर्थंकर बनने के लिए पाश्र्वनाथ को पूरे नौ जन्म लेने पड़े थे। पुराणों के अनुसार पहले जन्म में वे मरुभूमि नामक ब्राह्मण बने, दूसरे जन्म में वज्रघोष नामक हाथी, तीसरे जन्म में स्वर्ग के देवता, चौथे जन्म में रश्मिवेग नामक राजा, पांचवें जन्म में देव, छठे जन्म में वज्रनाभि नामक चक्रवर्ती सम्राट, सातवें जन्म में देवता, आठवें जन्म में आनंद नामक राजा, नौवें जन्म में स्वर्ग के राजा इन्द्र और दसवें जन्म में तीर्थंकर बने। यात्रा में रत्न जैन ,नरेंद्र जैन, पवन जैन,सुरेंद्र जैन,नीरज जैन,रुपेश जैन,नितिन जैन का सहयोग रहा।

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