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नगर परिषद:नप ने प्राॅपर्टी का सर्वे कर पोर्टल पर डाला, 4 मार्च तक ऑफलाइन और ऑनलाइन आपत्ति व दावे कर सकेंगे

बहादुरगढ़2 दिन पहले
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  • चार मार्च तक का दिया समय, बहादुरगढ़ में 80 हजार भवनों का सर्वें हुआ पूरा, हेल्प डेस्क लगाकर लोगों को किया जा रहा जागरूक

शहर में नगर परिषद के अंतर्गत आने वाली सभी प्रकार की प्रॉपर्टी के रिकाॅर्ड को अब चार मार्च तक ठीक करवाया जा सकता है। नगर निकाय विभाग ने भूमि प्रॉपर्टी के रिकार्ड को ऑनलाइन कर दिया है। सर्वे के बाद अभी रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिया है। अब जिसको भी दावे या आपत्तियां है। वे लोग चार मार्च तक ऑनलाइन या फिर नगर परिषद में आकर त्रुटियों को सही करवा सकते है। ताकि भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह से सही हो सके। नगर परिषद में आने वाले खाली प्लाट, मकान या अन्य प्रॉपर्टी का हाल ही में सर्वे किया गया था।

सर्वे अनुसार रिकार्ड ऑऩलाइन कर दिया गया है। ऐसे लोग जिनकी भूमि रिकार्ड नाम, मोबाइल नंबर, पत्ता या रकबा गलत है वह दावा व आपत्ति कर सकता है। इसके लिए नगर परिषद की ओर से वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रिकाॅर्ड सही कराया जा सकता है। वही इसके लिए नगर परिषद की गृह कर शाखा से भी संपर्क किया जा सकता है।

भवन निरीक्षक विवेक जैन ने बताया कि यदि किसी को लगता है कि उसकी प्रॉपर्टी के रिकार्ड में कोई खामी है तो उसे अब ठीक करवाया जा सकता है। ये प्रक्रिया निशुल्क है। जिससे आने वाले समय में भूमि लेन देन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। सरकार ने चार मार्च तक का समय दिया गया है इसके बाद दावे आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।

दुकानों के पीछे मकानों को भी कॉमर्शियल साइड मान लिया

बहादुरगढ़ में सबसे ज्यादा आपत्ति उन भवनों पर आएगी जिनके नीचे दुकाने व ऊपर या पीछे मकान बने हुए हैं उन भवनों को नगर परिषद कॉर्मिशयल भवनों की श्रेणी में मानती है इसे लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें नगर परिषद में पहुंचेगी इसके पीछे कारण भी साफ है कि उपमंडल में काफी बाजार ऐसे हैं जिन्हें नगर परिषद के रिकॉर्ड में गलियों का दर्जा प्राप्त है पर अब वहां दुकानों व खासकर मार्केट बनाने पर हुए नए सर्वे के दौरान यह देखने में आया कि वहां मकान कम दुकानें ज्यादा है इसलिए नगर परिषद ने अब उस रेजिडेंशियल क्षेत्र में कॉमर्शियल एक्टिविटीज करने के कारण उन दुकानों को कॉमर्शियल की श्रेणी में शामिल कर लिया है इसके बाद भी जिन लोगों को आपत्ति होगी वे लोग नगर परिषद में आ सकते हैं लोगों का कहना है कि नगर परिषद को केवल दुकान को ही कॉमर्शियल मानते हुए उस क्षेत्रफल को रिहायशी क्षेत्र से अलग दर्ज किया जाना चाहिए जो नहीं किया गया सर्वे में पूरे भवन प्लाट को कॉमर्शियल साइट मान लिया गया इस मामले में स्थानीय लोगों ने नगर परिषद से स्थिति साफ करने को भी कहा है जिससे वह कॉमर्शियल एक्टिविटीज के कारण अधिक हाउस टैक्स की मार से बच सकें

लोगाें को जागरूक करने के निर्देश

शहर के लोग अपनी प्रॉपर्टी आईडी देखने के लिए pmsharyana.com का इस्तेमाल कर सकते है। इसमें जिला, कस्बा, कॉलोनी भरने, नाम भरने पर आईडी देखी जा सकती है। प्रॉपर्टी सर्वे के बाद आपत्तियां और दावे ऑनलाइन मांगे गए हैं। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है, जिसका 17 फरवरी को नगर निकाय विभाग ने शुरू किया है। ऑनलाइन के अलावा ऑफलाइन भी दावे और आपत्तियां मांगे गए हैं। साथ ही कर्मचारियों को हेल्प डेस्क लगाकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

82177 प्राॅपर्टी का रिकाॅर्ड ऑनलाइन : शहर में याशी कंपनी ने प्रॉपर्टी का सर्वे किया था। मकानों, दुकानों व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सर्वे रिपोर्ट को ऑनलाइन किया गया है। शहर में 82177 प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया गया है। शहरी निकाय निदेशालय ने सर्वे पर दावे-आपत्तियां मांग ली हैं। चार मार्च तक दावे और आपत्तियां ऑनलाइन और ऑफलाइन आमंत्रित की गई हैं। याशी कंपनी को सर्वे की जिम्मेवारी सौंप दी गई थी। सर्वे के बाद 82177 प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड ऑनलाइन हुआ है।

^ विभाग ने प्रॉपर्टी सर्वे पर दावे-आपत्तियां मांगी हैं। चार मार्च तक दावे और आपत्तियां ऑनलाइन और ऑफलाइन दर्ज करवाई जा सकती हैं। वेबसाइट पर जाकर खुद या फिर कार्यालय में आकर रिकॉर्ड को ठीक करवाया जा सकता है।
अत्तर सिंह, ईओ ,नगर परिषद।

अवैध कॉलोनियों को भी गृह कर सर्वे में शामिल करने की मांग

बहादुरगढ़ में करीब 20 अवैध कॉलोनी है जिनमें कुछ हिस्से में गृह कर सर्वे हुआ है वह अन्य हिस्सों को अनदेखा कर दिया गया जिन में काफी प्लाट भी है यदि उन्हें भी ग्रह कर सर्वे में लिया जाए तो नगर परिषद की आय बढ़ सकती है वहीं उन कॉलोनियों को वैध करवाने में भी आसानी हो जाएगी। वैध करवाने में भी सरकार ने बहादुरगढ़ की 27 अवैध कॉलोनियों को पास करने के लिए प्रस्ताव मांगे थे, लेकिन सरकार ने 3 साल पहले 7 कॉलोनियों को ही वैध किया है अन्य 20 कॉलोनियां अभी भी अवैध हैं अवैध कॉलोनियां होने के कारण वहां अमृत योजना से भी उन कॉलोनियों को बाहर कर दिया गया था मूलभूत सुविधाओं से दूर इन कॉलोनियों में नगर परिषद को फिर से सर्वे करवा कर सभी प्लॉट में सर्वे करवाकर गृह कर वसूल करने का प्रयास किया जाना चाहिए था जो पूरी तरह नहीं किया गया अवैध कॉलोनियों के कुछ हिस्सों में गृह कर वसूला जा रहा है जबकि अन्य क्षेत्रों को अनदेखा कर दिया गया। अमृत योजना में सीवर व पानी की व्यवस्था होनी थी पर इन कॉलोनियेां के बड़े-बड़़े हिस्सों को इस योजना से दूर रखा गया है।

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