बहादुरगढ़ / एमएसएमई के लिए आज से 5 करोड़ टर्नओवर तक वाली फैक्ट्रियों का शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

Registration of factories with up to 5 crore turnover will start from today for MSME
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Registration of factories with up to 5 crore turnover will start from today for MSME

  • सेंट्रल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए किसी कागजात की जरूरत नहीं
  • रजिस्ट्रेशन में मदद के लिए उद्योग विभाग चलाएगा जागरूकता कार्यक्रम

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

बहादुरगढ़. बड़े उद्योग को किसी सहायता की कम जरूरत होती है और छोटे उद्योग अपने दम पर बाजार में अपना स्थान बनाते हैं, लेकिन मध्यम श्रेणी के उद्योगों को सरकार व अन्य सभी बड़ी योजनाअों की जरूरत होती है जिससे उन्हें राहत मिल सके। इसी कारण सरकार की इस नई योजना में बहादुरगढ़ के सैकड़ों औद्याेगिक इंकाइयों के संचालकों को राहत है। 

माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) में बदलाव का एमएसएमई मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन आने के बाद बहादुरगढ़ व आसपास के उद्यमी उत्साहित है। अब क्षेत्र की करीब 60 प्रतिशत से भी अधिक औद्योगिक इकाइयां इस श्रेणी में आ सकेगी। इससे वे सरकार की ओर से मिलने वाले फायदे उठा सकेंगी। वहीं एमएसएमई के लिए रजिस्ट्रेशन 1 जुलाई से कराना होगा। इसे लोग पोर्टल पर खुद करा सकेंगे। इसके लिए सेंट्रल पोर्टल बनाया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के लिए किसी भी कागजात की जरूरत नहीं होगी। केवल स्वघोषणा के आधार पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन में मदद के लिए उद्योग विभाग के द्वारा जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। इससे यहां के फैक्ट्री संचालकों को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। 

बिना किसी डर के काराेबार का सकेंगे विस्तार
फैक्ट्री संचालकों की मानें तो वे बिना किसी डर के अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगे। बहादुरगढ़ चैम्बर अॉफ इंडस्ट्री के उपप्रधान नरेंद्र छिक्कारा ने बताया कि एमएसएमई की नई परिभाषा से निश्चित रूप से बहादुरगढ़ के क्षेत्र का दायरा बढ़ेगा। इसका सबसे अधिक लाभ लॉर्ज से मीडियम की श्रेणी में आने वाली औद्योगिक इकाइयों को ही मिलेगा। बीसीसीअाई के महासचिव सुभाष जग्गा ने बताया कि केंद्र सरकार का नया नोटिफिकेशन सराहनीय है। सरकार द्वारा आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाने को ये फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए सरकार यहां विदेश की तरह सुविधाएं भी उपलब्ध कराए तो इन सभी तैयारियों का अधिक से अधिक सरकार व देश के लोगों को लाभ मिलेगा।

स्लैब में किया बदलाव : लॉकडाउन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर को राहत देने के लिए स्लैब में बदलाव किया गया है। एक जुलाई से नए स्लैब के तहत बहादुरगढ़ में एमएसएमई सेक्टर से जुड़ने वाले उद्यमियों को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा। एमएसएमई सेक्टर तीन श्रेणी में है। इन स्लैब में आने वाली फैक्टियों और कंपनियों के उद्यमियों को नए स्लैब के अनुसार ही वर्गीकृत किया जाएगा।

ऐसे कराना होगा रजिस्ट्रेशन
यह प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर फार्म मिलेगा। रजिस्ट्रेशन फाइल करने की कोई फीस नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार संख्या जरूरी होगी। कंपनी या सीमित पार्टनरशिप, सोसायटी या ट्रस्ट के मामले में संगठन या उसके प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को अपना आधार संख्या सहित जीएसटी और पैन नंबर उपलब्ध कराना होगा। कोई भी उद्यम एक से अधिक रजिस्ट्रीकरण फाइल नहीं करेगा। फूड प्रोडक्ट, बेवरेज और तंबाकू प्रोडेक्ट, कॉटन टेक्सटाइल, होजरी एंड गारमेंट, टिंबर एंड वुड प्रोडक्ट, पेपर, पेपर प्रोडक्ट और प्रिंटिंग, लेदर और लेदर प्रोडक्ट, रबर, प्लास्टिक और पेट्रोलियम, केमिकल एंड केमिकल्स प्रोडक्ट, नॉन फीरियस मेटल, मेटल प्रोडक्ट, मशीनरी और मशीन टूल्स, इलेक्टिक मशीनरी एप्लाइंसेस, ट्रांसपोर्ट इक्यूप्मेंट, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज, इसके अलावा अन्य औद्योगिक इकाइयां एमएसएमई सेक्टर में शामिल हैं।

उद्योगपतियों को समझाया जाएगा क्या लाभ 
बीसीसीआई के महासचिव नरेंद्र छिक्कारा ने बताया कि सभी उद्योगपतियों को समझाया भी जाएगा कि एमएसएमई के बदलाव से उन्हें क्या लाभ है। अब एक करोड़ रुपए तक निवेश और पांच करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले उद्योग इस श्रेणी में आएंगे। पहले निवेश की सीमा मैन्युफैक्चरिंग के लिए 25 लाख और सर्विस इंडस्ट्री के लिए 10 लाख रुपए थी। इसी तरह से मध्यम उद्योग-20 करोड़ निवेश और 100 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली कंपनियां अब इस श्रेणी में आएंगी। पहले निवेश की सीमा मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10 करोड़ और सर्विस इंडस्ट्री के लिए पांच करोड़ रुपए थी। लघु उद्योग दस करोड़ तक निवेश और 50 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले उद्योग अब इस श्रेणी में आएंगे। पहले निवेश की सीमा मैन्युफैक्चरिंग के लिए पांच करोड़ और सर्विस इंडस्ट्री के लिए दो करोड़ रुपये थी।

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