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आंदोलन:टिकरी बॉर्डर पर लगातार खुल रहा बाजार, एक तरफ दिल्ली दूसरी ओर किसान, सरकार नहीं दे रही ध्यान

बहादुरगढ़21 दिन पहले
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टिकरी बॉर्डर पर खुले बाजार में घूम रहे लोग, नहीं कर रहे लाॅकडाउन के नियमों का पालन। - Dainik Bhaskar
टिकरी बॉर्डर पर खुले बाजार में घूम रहे लोग, नहीं कर रहे लाॅकडाउन के नियमों का पालन।
  • कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए पिछले साल 26 नवंबर से संघर्ष कर रहे किसान

शहर में टिकरी बॉर्डर बाजार ऐसा है, जहां दिल्ली और हरियाणा के बहादुरगढ़ की सीमा है। सड़क के एक तरफ बहादुरगढ़ का मार्केट तो दूसरी तरफ दिल्ली का मार्केट है। इसके बीच में सड़क है। इसके आगे हाईवे टिकरी बॉर्डर पर तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए पिछले साल 26 नवंबर से किसान आंदोलन कर रहे हैं।

इस कारण पूरे लॉकडाउन में सभी बाजार खुल हैं। ऐसे में पुलिस ने बिना अनुमति के खुले बाजारों में पहुंचकर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। न ही इस बाजार में पुलिस गश्त कर पाई। इसके चलते 2 किलोमीटर तक फैले टिकरी बॉर्डर बाजार में 26 नवंबर से बाद खूब व्यापार हो रहा है। यहां की मीट मार्केट ही नहीं रोजमर्रा के सामान को लेकर भी बाजार में रौनक है।

कोरोना का संक्रमण फैलने के बावजूद इस बाजार पर हरियाणा व दिल्ली सरकार का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में आसपास की काॅलोनियों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र व टिकरी, निजामपुर औद्योगिक क्षेत्र की तरफ रहने वाले हजारों परिवारों को यहां समय सामान मिल जाता है। दोनों बाजारों के बीच में बनी सड़क के एक किनारे पर किसानों का पंडाल लगा है।

किसान भी इस बाजार से खरीदारी करते हैं। पंजाब से आए करीब चार से पांच हजार किसान भी यहीं से खरीदारी करते हैं। दुकानदार रोहित मिश्रा ने बताया कि टिकरी बॉर्डर बाजार में छोटी-छोटी दुकानें हैं। इस कारण यहां ऐसा कोई व्यापार नहीं है। इसके लिए कोई चालान काटने से क्या होगा।

किरयाणा के दुकानदार अनुज वर्मा ने बताया कि यहां औद्योगिक क्षेत्र का यह एक मात्र बाजार है। यह ठीक है कि यहां सख्ती नहीं है पर यहां के बाजार के कारण ही हजारों श्रमिकों को उधार में राशन मिल जाता है। श्रमिक वेतन मिलने पर पैसे देते हैं। इसी कारण इसे मजदूरों की मार्केट भी कहा जाता है। यहां श्रमिकों के लिए हर तरह से छोटे से लेकर बड़े घर के सामान के लिए यहां दुकानें हैं।

टिकरी बॉर्डर के बाजार में जुटी भीड़, लॉकडाउन के बाद भी लोग नहीं कर रहे नियमों का पालन

किसान आंदोलन से पांच हजार से अधिक फैक्ट्रियां प्रभावित

छह माह से चल रहे किसान आंदोलन के कारण हर रोज उम्मीद के बाद निराशा के चलते बाजार में सामान जाता रहा, लेकिन अब उधार वापस लेने से पहले नया माल भेजना पड़ता है जो संभव नहीं है। इस कारण पुराना उधार भी चौपट होने की स्थिति में है। ऐसा नहीं कि उद्योगपतियों ने प्रयास नहीं किया, लेकिन किसानों को दया नहीं आई।

किसान आंदोलन से प्रभावित फैक्ट्रियों के संचालकों ने राहत को लेकर सोशल मीडिया का सहारा लिया। उद्यमियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के मंत्रियों से किसान आंदोलन खत्म कराने के लिए गुहार लगाई थी। ताकि उनके काम-धंधे पटरी पर आ सकें। यहां के उद्यमी अतुल गुप्ता ने गृह मंत्री अनिल विज को फेसबुक पर अपने नुकसान की शिकायत भेजी थी। किसान आंदोलन के कारण बहादुरगढ़ की पांच हजार से अधिक फैक्ट्रियां प्रभावित हैं।

6 माह में 30 साल पीछे चली गई औद्योगिक इकाइयां: बहादुरगढ़ में किसान आंदोलन के छह माह के पूरे होने के साथ ही बहादुरगढ़ स्थित करीब पांच हजार छोटी बड़ी फैक्ट्री अपने टारगेट से तीस साल पीछे चली गई हैं। बड़ी औद्योगिक इकाइयों का हाल तो छोटी फैक्ट्रियों से भी बुरा है।

छह माह में किसानों के आंदोलन के कारण बाहर का व्यापारी प्रतिनिधि बहादुरगढ़ नहीं आ पाया व फैक्ट्रियों में मार्केट संबंधित काम काज ठीक से नहीं होने के कारण व्यापार की चेन टूट जाने से नए सिरे से भी व्यापार शुरू करने की कोई संभावना नहीं है। क्योंकि व्यापार में एक बार ग्राहकों व होलसेल वालों के संपर्क टूटने के बाद फैक्ट्री की मार्केटिंग टीम नए बाजार व नए ग्राहकों की चेन तैयार करना पड़ती है। जो अब इस दौर में संभव नहीं है।

इस कारण बहादुरगढ़ चैम्बर ऑफ काॅमर्स एवं इंडस्ट्री ने कहा कि सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा। वे खुलकर सरकार का विरोध नहीं कर पा रहे, लेकिन अपने श्रमिकों व व्यापार को बर्बाद होता नहीं देख सकते। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि फैक्ट्रियों का देश भर में हजारों करोड़ का उधार फंसा है। जिसके पूरा वापस आने की संभावना भी टूट गई है।

छह माह में सबसे अधिक बैगों की हुई बिक्री: दुकानदारों ने बताया कि छह माह से टिकरी बॉर्डर बाजार में सबसे अधिक बिक्री बैग की हुई है। किसान आंदोलन के साथ ही फैक्ट्रियों के बंद होने का सिलसिला शुरू हो गया था। तब से श्रमिकों के घर जाने का सिलसिला शुरू हो गया जो आज भी जारी है। इस कारण छह माह से राशन व अन्य घर के सामान के साथ सामान बांधने के लिए बैग की बिक्री सबसे अधिक हुई है।

शटर बंद कर वाहनों की हो रही थी सर्विंस, पुलिस ने मारा छापा

लॉकडाउन में गलत तरीके से चल रही शहर के सैनी ऑटो मार्केट में शटर बंद करके वाहनों की सर्विस चल रही थी। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। यहां शटर खोल कर देखा तो दुकानों के अंदर वाहनों की सर्विंस का काम चल रहा था।

पुलिस की कार्रवाई के डर से दुकानों के शटर बंद करके मिस्त्री व वाहन चालक दोनों की मॉडल टाउन की तरफ से भाग गए। इस दौरान पुलिस ने पीछा किया तो गलियों में वाहन गिरे मिले। दुकानों के आधे खुले व आधे बंद शटर दिखाई दिए। पुलिस ने वहां मौजूद दुकानदारों को चेतावनी देकर बाजार बंद करवा दिया।

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