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टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदाेलन का 89 वां दिन:किसी ब्लैक एंड वाइट पुरानी फिल्म की तरह रहा पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन, किसान नेता बोले- हम एक होने पर होंगे सफल

बहादुरगढ़11 दिन पहले
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किसान पगड़ी संभाल दिवस पर आत्मसम्मान के प्रतीक अपनी क्षेत्रीय पगड़ी को पहन सरकार के तीनों कृषि कानून का विरोध करते किसान। - Dainik Bhaskar
किसान पगड़ी संभाल दिवस पर आत्मसम्मान के प्रतीक अपनी क्षेत्रीय पगड़ी को पहन सरकार के तीनों कृषि कानून का विरोध करते किसान।
  • किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी, सुबह से ही बॉर्डर पर महिला व पुरुषों के जत्थे पगड़ी संभाल दिवस में पहुंचने लगे

नया गांव व टिकरी बाॅर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में आज 114 साल पुरानी झलक दिखाई दी। आज पीले रंग के दुपट्टाें में महिलाएं व रंग बिरंगी पगड़ी में पुरुष व स्टेज पर गाई जा रही पगड़ी संभाल जट्टा की कविता ने लोगों को सन 1907 में वापस पहुंचा दिया जहां किसानों ने अंग्रेजों के तीन कृषि कानूनों का विरोध किया था।

जिसे बाद में किसानों के विरोध के कारण अंग्रेजों ने रद्द कर दिया था। किसी ब्लैक एंड वाइट पुरानी फिल्म की तरह रहा आज का पगड़ी संभाल जट्टा अांदोलन। सन 1907 में भगत सिंह के चाचा अजाीत सिंह ने अंग्रेजों के तीन कृषि कानूनों का विरोध पगड़ी से किया था। जो किसानों के लिए एक आंदोलन बन गया था। पगड़ी संभाल जट्टा कविता की मार्मिक पकड़ ने अंग्रेजों के तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाया था।
पगड़ी संभाल दिवस शहीद भगत के परिवार की है देन
सन 1907 के किसान आंदोलन के 114 साल बाद मंगलवार को एक बार फिर उसी रंग में रंगी महिलाएं व रंग बिरंगी पगड़ी में दिखाई दिए किसान। किसान 1907 में अंग्रेज़ सरकार तीन किसान विरोधी क़ानून लेकर आई थी, जिसके विरुद्ध किसानों में भयंकर रोष की भावना पैदा हुई थी। किसानों के पगड़ी संभाल दिवस पर भगत सिंह का परिवार याद किया गया महिलाओं ने पीले दुपट्टे पहने किसानों ने रंग बिरंगी पगड़ी पहन कर पंडालों में भाग लिया। सन 1907 में अंग्रेज़ सरकार तीन किसान विरोधी क़ानून लेकर आई थी।

उस समय जिस तरह से भगत सिंह सिंह चाचा अजीत सिंह ने पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन शुरू किया था व हर कोई रंग बिरंगी पगड़ी में दिखाई देता था वहीं महिलाएं पीले दुपट्टे में आंदोलन में शामिल होती थी। सन 1907 में अंग्रेजों ने किसानों के खिलाफ तीन कानून बनाए थे। आज 114 सालों के बाद फिर से तीन कानूनों के विरोध में बहादुरगढ़ में किसान उसी रंग में दिखाई दिए। इसके पीछे भी मंच पर कहा गया कि पगड़ी संभाल दिवस शहीद भगत के परिवार की देन है।किसान आंदोलन भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह के नाम भी है जिसमें पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन शुरू किया था।

साल 1907 में भी तीन कानून थे और आज भी तीन कानून
तब नए एक्ट में नया काॅलोनी एक्ट, जिसके तहत किसानों की ज़मीन जब्त हो सकती थी, बढ़ा हुआ मालिया (राजस्व) और बारी दोआब नहर के पानी के बढ़े हुए दर जैसे कानून थे। तब एक एक मार्मिक कविता पढ़ी गई थी जिसे पगड़ी संभाल जट्टा का नाम दिया गया था। जिसमें किसानों के शोषण की व्यथा वर्णित है, जो इतनी लोकप्रिय हुई कि उस किसान प्रतिरोध का नाम ही कविता के नाम पर पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन पड़ गया था। जिसे बाद में भारी विरोध के बाद रद्द किया गया था।

जिसका असर 114 वें साल बाद अब टिकरी व नया गांव में चल रहे किसान आंदोलन पर साफ़ देखा गया। अब एक बार फिर से किसानों को फिर अपनी ज़मीन छीनने का डर पैदा हुआ है। इस बार 114 साल के बाद किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों-द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

अच्छेज गांव में पगड़ी संभाल दिवस मनाया

झज्जर | ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने झज्जर के रेवाड़ी बाईपास तथा अछेज गांव में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 23 फरवरी पगड़ी संभाल दिवस के रुप में मनाया। इस अवसर पर संगठन के जिलाध्यक्ष करतार सिंह अछेज ने बताया कि अंग्रेजी राज में किसानों की मंडियों में लूट होती थी।

किसान विरोधी काले कानून भी थे और लगान तथा आबियाना टैक्स बहुत ज्यादा थे, उनके खिलाफ भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह तथा स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बड़े संघर्ष किए थे और जोरदार किसान आंदोलनों को नेतृत्व दिया था। झज्जर में ओमवीर ने कहा कि आज भी अंग्रेजी राज की तर्ज पर किसानों की लूट जारी है। किसान तथा आम जनों के खिलाफ वैसे ही काले कानून लागू कर दिए हैं जिनसे गरीब की पहुंच से खाद्य पदार्थ तथा बिजली दूर हो जाएगी तथा किसान अपनी ही भूमि पर कंपनियों के बंधुआ मजदूर बन जाएंगे।

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