कोरोना इफेक्ट / घाटे में चल रही बेरी की रोडवेज बसें, नहीं निकल पा रहा डीजल का खर्चा

बेरी का बस स्टैंड। बेरी का बस स्टैंड।
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बेरी का बस स्टैंड।बेरी का बस स्टैंड।

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:14 AM IST

बेरी. अनलॉक 1 में लोगों को मिली छूट व रोडवेज की बसें चलने के बाद भी बेरी रोडवेज बस स्टैंड खाली नजर आ रहा है। कई रूटों पर बसें चलाने के बाद भी यात्री नजर नहीं आ रहे। शुरुआत में 3 रूटों पर 3 बसों का संचालन किया था। अब दो दिन से 13 बसें बेरी बस स्टैंड से चल रही हैं, लेकिन अधिकतर बसें खाली ही चल रही हैं।

रोडवेज की बसों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ एक बस में सिर्फ 30 ही यात्रियों को बैठाने का प्रावधान किया है। इसके बावजूद बसों के लिए यात्री नहीं मिल रहे। बस स्टैंड इंचार्ज की मानें तो प्रत्येक बस में यात्रियों की संख्या 5 से 8 हैं। आम दिनों में जहां बेरी रोडवेज बस स्टैंड से एक दिन में हजारों यात्री सफर करते थे।

अब कोरोना काल में बस स्टैंड पर तीस यात्री भी नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, रोडवेज ने 5 रूटों पर अलग-अलग समय में 13 बसों का संचालन शुरू किया है, लेकिन बसों के लिए रोडवेज को अब यात्री नहीं मिल रहे। बेरी बस स्टैंड इंचार्ज जय सिंह दुजाना का कहना था कि बेरी बस स्टैंड पर यात्रियों की संख्या कम हैं। पहले केवल 3 बसें आ रही थी। अब दो दिन से 13 बसें आ रही हैं, लेकिन यात्री की संख्या केवल 3 से 6 ही रहती हैं। आने वाले कुछ दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

पहले हर आधे घंटे में बसों का लगता था चक्कर, अब कम हो गए 

बेरी में विश्व प्रसिद्ध मां भीमेश्वरी देवी का मंदिर होने के कारण मां के दरबार में दर्शन करने वाले भक्त बसों में सफर करते थे। इसके साथ सैकड़ों लोग रोजाना सफर आसपास के गावों करते हैं। पहले बेरी, गुरुग्राम व भिवानी हर आधे घंटे में चक्कर लगाती थी। लगभग 25 गाड़ी बेरी बस स्टैंड से गुजरती थी, जिनकी संख्या आधा दर्जन से कम हो गई हैं। बेरी बहादुरगढ़ वाले रूट पर हर आधे घंटे में बस सेवा थी, लेकिन फिलहाल बेरी-बहादुरगढ़ रूट पर बस वाया छारा 4 चक्कर लगा रही हैं।

बेरी बस स्टैंड के आसपास रेहड़ी लगाने वाले भी बेरोजगार हो गए हैं। उनका कहना हैं कि पूरी तरह बस सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों के आगमन के बाद काम चलेंगे। पूरा पूरा दिन बस स्टैंड खाली पड़े रहते हैं। प्राइवेट बस सेवा भी बंद पड़ी हैं। पहले बेरी से रोहतक के लिए हर आधे घंटे में सवारी गाड़ी चलती थी। अब यात्रियों के अभाव में क्लूजर चलाने वाले ना के बराबर हैं। व्यापार से जुड़े या जरूरी कार्य के लिए लोग रोहतक जा रहे हैं। जो स्कूटी या कार से जा रहे हैं।

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