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मिलेगी राहत:जिले में ऑक्सीजन का 64 प्रतिशत कोटा बाढ़सा एम्स को, बाकी जिले के सरकारी और निजी अस्पतालाें काे

झज्जर2 महीने पहले
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झज्जर के सिविल अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड। - Dainik Bhaskar
झज्जर के सिविल अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड।
  • पिछले वर्ष आरक्षित किए थे 50 बेड, लेकिन इस बार लिए जा रहे हैं दिल्ली एम्स के रेफर मरीज, लेकिन बदले में नहीं मिल रहे मरीजों के लिए बेड

जिले के लिए 14 एमटी ऑक्सीजन का कोटा कम है। निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बेड की व्यवस्था कैसे बढ़ाई जाए। यह बात ऑक्सीजन की आपूर्ति पर निर्भर है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले को जारी किया गया ऑक्सीजन के 14 एमटी कोटे का एक बड़ा हिस्सा बाढ़सा एम्स को जा रहा है।

बदले में जिले के मरीजों को वहां पर भर्ती नहीं किया जा रहा। जानकारी के मुताबिक जिले के सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आए दिन ऑक्सीजन का संकट बन रहा है। यह संकट कुछ इस प्रकार से है कि कई कई घंटे तक इमरजेंसी में आने वाले नए मरीज के लिए ऑक्सीजन नहीं होती। केवल एक सीमित मात्रा में यहां भर्ती मरीजों के लिए ही ऑक्सीजन की व्यवस्था रहती है। यही कारण है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए लगातार गाड़ियों को भेजे जाने का सिलसिला बना रहता है।

जानकारों का कहना है कि जिले में 14 एमटी ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति का कोटा है। जिसमें से 9 एमटी अकेले बाढ़सा एम्स को दिया जा रहा है। जबकि शेष करीब 5 एमटी ऑक्सीजन जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों को अलॉट की जाती है। स्वास्थ्य स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले से ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के बाद बाढ़सा एम्स में काेरोना मरीजों को वह मदद नहीं मिल पा रही जिस प्रकार की मदद रोहतक पीजीआई की ओर से रही है।

इस बीच अधिकारियों ने ऑक्सीजन की आपूर्ति एवं वितरण के मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष यह बात उठाई है। ताकि झज्जर के कोरोना संक्रमित मरीजों को बाढ़सा एम्स में उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सके। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़सा एम्स दिल्ली से कंट्रोल किया जा रहा है और दिल्ली एम्स के मरीजों को ही रेफर करने के बाद बाढ़सा भेजा जाता है। जबकि स्थानीय स्तर पर यहां के मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

जिले में ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था

हरियाणा सरकार की ओर से जारी की गई कोविड हरियाणा डॉट इन वेबसाइट के मुताबिक जिले में काेरोना संक्रमित मरीजों के लिए 580 बेड की व्यवस्था है। जिनमें से 252 बेड ऑक्सीजन व 305 बेड गैर ऑक्सीजन वाले हैं। जबकि आईसीयू की व्यवस्था 23 बेड पर है।

वेंटिलेटर वाले 8 बेड हैं। जिले में करीब 400 कोविड संक्रमित मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश होम आइसोलेशन पर हैं। हालत खराब होने पर इनको अपने स्तर पर ऑक्सीजन की व्यवस्था बनानी होती है। शहर के निजी अस्पतालों की बात की जाए तो यहां भर्ती 90 फीसदी लोग दूसरे प्रदेशों के हैं। ऐसे में जिले के वासियों को मिलने वाली उपचार की सुविधा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां भर्ती मरीजों को भारी शुल्क अदा करने के बाद ऑक्सीजन व दवाओं के लिए अलग से भटकना पड़ता है।

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