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सतर्कता:दो पशु चोर गिरोह से सामना हाेने के बाद ग्रामीणों ने पशुओं की सुरक्षा के लिए ठीकरी पहरे देने शुरू किए

झज्जर8 दिन पहले
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गोरिया गांव में पशुओं की रक्षा के लिए घर के बाहर पहरा देते युवक।

गोरिया गांव में दो पशु चोर गिरोह से सामना होने के बाद लोग अपने पशुधन की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। अब लोगों ने पुलिस सुरक्षा के भरोसे की बजाय खुद ही अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए रात में पहरे शुरू कर दिए हैं। गोरिया गांव में गुरुवार रात को दस्तक देने वाले चोर गिरोह के भागने के मामले में पुलिस की जांच अभी सिरे नहीं चढ़ सकी है।

गांव के लोगों ने हिम्मत दिखाकर पशु चोर गिरोह की दो गाड़ियों टाटा 407 और इंडेवर का पीछा किया था। इनमें टाटा 407 गाड़ी भागने में सफल हो गई, जबकि इंडेवर गाड़ी पंक्चर होने की वजह से चोर गिरोह छोड़कर भाग गया। गाड़ी को जब्त करके पुलिस इस मामले की जांच करने में जुटी है। इस घटनाक्रम के बाद गोरिया गांव के लोगों ने घटना वाले दिन से ही पशुधन की सुरक्षा के लिए पहरे देने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशुधन चोरी होने से बचाने हैं तो खुद ही रात को जागकर पहरा देने में ही भलाई है। यह नजारा अब गांव के हर पाने में देखा जा रहा है।

बेरी में पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारने वालाें का सुराग नहीं

गुरुवार के घटनाक्रम में गोरिया और उसके आसपास के गांव में पशु चुराने के लिए चोर गिरोह दो से तीन गाड़ियों में आए थे। इनमें 6 भैंसों से भरी एक गाड़ी को बेरी पुलिस ने साल्हावास पुलिस की सूचना के बाद पकड़ा हालांकि इस मामले में भी शातिर पशु चोर गिरोह पुलिस को चकमा देकर भाग गए। बेरी पुलिस ने काफी दूर तक उनका पीछा किया। लेकिन चोर गिरोह इस कदर मरने मारने पर उतारू थे कि उन्होंने पुलिस की जीप में तेज टक्कर मारकर गाड़ी की गति धीमी कर दी मौका मिलते ही फरार हो गए। इससे बेरी पुलिस ने पहले ही नाकेबंदी कर दी थी। लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ने में कामयाब नहीं हो सकी। बाद में पता चला पशुओं से भरी गाड़ी पलट गई है। इसकी वजह से हमलावर गाड़ी छोड़कर भाग गए।

कई परिवार ऐसे जिनका गुजारा दूध बेचकर होता था, अब कर रहे मजदूरी

गोरिया गांव में कई परिवार ऐसे हैं जिनका गुजारा दूध बेचकर होता है। अब ऐसे परिवारों को भी अपने पशुओं की सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है। दुखी और पीड़ित वे परिवार है जिनके गुजारे का एकमात्र सहारा पशुधन चोरी जा चुका है और वे दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पेट पालने को मजबूर हैं। इन्हीं में एक रामनिवास पुत्र बख्तावर का परिवार है जिसकी एक लाख रुपए कीमत की एक भैंस 5 महीने पहले चोरी हो गई थी। अब रामनिवास अपने परिवार के तीन बच्चों को पालने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करता है। जबकि उसकी चोरी गई भैंस का कोई सुराग नहीं लग सका है। इसी प्रकार रामफल पुत्र रामकुमार की एक लाख रुपए कीमत की एक भैंस 5 महीने पहले चोर गिरोह ने पकड़ ली थी। रामपाल का परिवार भी दूध बेचकर गुजारा करता था उधार लेकर उसने भैंस खरीदी थी अब उसके चोरी होने से रामफल मानसिक रूप से परेशान है। उसका इलाज रोहतक पीजीआई में चल रहा है।

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