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विवाद सुलझा:25 दिन से धरने पर बैठे आढ़तियों ने जीती लस्टर लॉस की लड़ाई, प्रदेश में मिलेंगे 62 करोड़

झज्जर11 दिन पहले
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एक दूसरे को मिठाई खिलाते आढ़ती।
  • प्रदेश सरकार की ओर से खरीद एजेंसियों और आढ़तियों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के बाद अनाज मंडी में धरना समाप्त, जिले के आढ़तियों को मिलेंगे सवा करोड़

अनाज मंडी के आढ़तियों ने लस्टर लॉस के रूप में काटी गई रकम की लड़ाई लड़ने के लिए 25 दिन तक धरना दिया। खरीद एजेंसियों की ओर से पैदा किए गए इस विवाद को प्रदेश सरकार ने सुलझा लिया है। खरीद से जुड़े विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आढ़तियों की दामी की रकम को रोका ना जाए। अब प्रदेश के आढ़तियों को उनकी रूकी हुई रकम के रूप में करीब 62 करोड़ से अधिक रुपए उनके खातों में जारी किए जाएंगे, जबकि झज्जर जिले के आढ़तियों को सवा करोड़ रुपए मिलेंगे।

अनाज मंडी में चल रहा धरना बुधवार को आढ़तियों ने समाप्त कर दिया। दुकान संख्या एक से विजय पूनिया ने व्यापारी नेता चरण सिंह दलाल व दूसरे साथियों को मिठाई खिलाकर इस लंबे आंदोलन के लिए हौसला बनाए रखने के लिए आभार व्यक्त किया। पिछले 25 दिन से जिला प्रशासन के लिए आढ़तियों का धरना सिरदर्द बना था। आए दिन यहां कोई न कोई सामाजिक, कर्मचारी व किसान संगठन अपना समर्थन देकर जा रहे थे।

ऑनलाइन जारी होगा पैसा: डीएम हैफेड
डीएम हैफेड देवेंद्र ढोकिया का कहना है कि मुख्यालय से विद हेल्प करने का नोटिस आने के बाद भुगतान को रोक दिया था। अब मुख्यालय की ओर से इस मामले में हरी झंडी मिल गई है। पूरा पैसा ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए जारी किया जाएगा।

किसी भी अधिकारी ने कोई आश्वासन नहीं दिया
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्रीभगवान खुड्डन ने बताया कि धरना 21 अगस्त को शुरू किया था। धरना शुरू करने से पहले जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने बताया कि अपनी जायज मांगों के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी, लेकिन किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर किसी प्रकार का कोई आश्वासन नहीं दिया। मजबूरी में आढ़तियों ने खरीद एजेंसियों को पार्टी बनाते हुए अपने वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भिजवाया। बाजरे के खरीद सीजन से पहले ही प्रदेश सरकार ने इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए जो आदेश जारी किए हैं उसका नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन स्वागत करती है। श्री भगवान ने कहा कि यह विवाद काफी पहले ही निपट जाना था, लेकिन इस मामले में खरीद एजेंसियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि खरीद सीजन के दौरान आरती उपज का मालिक नहीं होता है, बल्कि वह खरीद कार्य में सहयोग करता है। इसके बदले उनको ढाई परसेंट दामी दी जाती है। यह धामी एक प्रकार से 8 दिनों की मजदूरी होती है, लेकिन खरीद एजेंसियों ने इस बार इसी मजदूरी को ही अपने पास रख लिया।

धरने और आगामी खरीद सीजन की समीक्षा होगी
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने लस्टर लॉस के रूप में भुगतान जारी कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इसमें आढ़ती एकमत रहे, लेकिन एक दो आढ़तियों ने आंदोलन को तोड़ने का प्रयास करते हुए आंदोलन निजी करार दिया था। अब मांगे पूरी होने के बाद इन तमाम बातों के बारे में समीक्षा होगी। आगामी बाजरे की खरीद सीजन के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी ना हो व बाहर से व्यापारियों का बाजरे को मंडी में आने से रोका जाए। इसपर भी चर्चा की जाएगी। इस मौके पर व्यापारी नेता चरण सिंह, तत्कालीन प्रधान नरेंद्र धनखड़, पूर्व प्रधान हरेंद्र सिलाना, पूर्व सरपंच सुभाष, बलदेव अहलावत, धर्मपाल, रविंद्र, सुनील कादियान, जसबीर अहरी, सतबीर मल्हान, चंद्रप्रकाश, राव नरेंद्र, महेश, आशीष, विजय पूनिया, विनोद बलजीत सुरा, अनिल कुमार, संजीव, अशोक यादव आदि मौजूद रहे।

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