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संदेश:जिला बार एसोसिएशन के चुनाव में ऑनलाइन वोटिंग की व्यवस्था पर वकीलों में मतभेद

झज्जर10 महीने पहले
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  • 15 दिन पहले मैसेज से पहुंचा था चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल का संदेश

इस वर्ष चार महीने से जिला बार एसोसिएशन के चुनाव लंबित हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच यह चुनाव कैसे कराया जाए। इसको लेकर चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल गंभीर है, लेकिन झज्जर में वकील ऑनलाइन वोटिंग कराने के पक्ष में नहीं है। उनका का कहना है कि यह नया प्रयोग है। ऑनलाइन वोटिंग से पहले हाउस की मीटिंग चर्चा होनी चाहिए थी।

बता दें कि कोरोना महामारी के चलते लाेगाें की दिनचर्या प्रभावित है। इसी बीच झज्जर बार एसोसिएशन का चुनाव भी अन्य बार एसोसिएशन की तरह अप्रैल महीने से लंबित चल रहा है। अब ऑनलाइन वोटिंग से बार की प्रधानी सुनिश्चित करने के लिए मंथन चल रहा है। इस प्रकार से पंजाब हरियाणा चंडीगढ़ बार कौंसिल ने दोनों राज्यों की करीब 140 बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट में एग्जीक्यूटिव बॉडी के चुनाव के लिए ऑनलाइन वोटिंग कराने की दिशा में काम शुरू किया है। 15 दिन पहले झज्जर बार एसोसिएशन में इस प्रकार का मैसेज भेजकर इस बात के संकेत दिए हैं कि एक एप लोड कराकर उसी माध्यम से चुनाव कराए जाए, लेकिन जिले के काफी वकील इस पक्ष में नहीं है कि ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए चुनाव हो। 

वकीलों का कहना है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कम से कम वकीलों की राय लेना बहुत आवश्यक है। वोटिंग कई रूप से होती है। ऐसे में चुनाव में खड़े होने वाले वकीलों का एक दूसरे से संवाद होना बहुत जरूरी है। 

नई व्यवस्था से पहले मीटिंग में बातचीत होनी चाहिए थी 
बार एसोसिएशन की पूर्व प्रधान अजीत सोलंकी ने बताया कि इस बार बार कौंसिल की ओर से नया प्रयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से वकीलों के पंजीकरण नंबर पर एप डाउनलोड करने के लिए कहा जाएगा। इसके बाद एक ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी, लेकिन अभी इस बात का किसी को भी अंदाजा नहीं है कि इस प्रक्रिया की मेरिट व डिमेरिट्स क्या है। वकीलों में इस बात के लिए तो चिंतन बना है कि नई व्यवस्था से पहले कम से कम लोकल बार की हाउस की मीटिंग में बातचीत जरूर होनी चाहिए थी। वकील साथी काेरोना महामारी के चलते वैसे ही बार में बहुत कम आते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था लागू किया जाना बेहतर नहीं है। सोलंकी ने बताया कि उनकी बार में पुराने वकील भी हैं। इस प्रकार के कई सीनियर वकील एंड्राइड फोन का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। बार में इस प्रकार के वकीलों की संख्या करीब 10 फीसदी से अधिक है। जो दूसरे वकील भी हैं वह भी इतने अधिक आईटी एक्सपोर्ट्स नहीं है, लेकिन अब देखना होगा कि आगे व्यवस्था कैसे रहती है। पूर्व प्रधान कृष्ण कादियान का कहना है कि व्यवस्था नई है। प्रयोग के बाद ही पता चल पाएगा। 

बार काउंसिल की तरफ से वकीलों की लिस्ट मांगी
ऑनलाइन वोटिंग को लेकर उनकी काफी वकीलों से बातचीत हुई है। अधिकांश वकील इस पक्ष में हैं कि महत्वपूर्ण विषय के संबंध में मीटिंग के बाद ही कुछ फैसला होना चाहिए था। मीटिंग विचार उभर कर आते हैं। बार काउंसिल की तरफ से वकीलों की लिस्ट मांगी गई थी, लेकिन अभी उसको भी भेजा नहीं गया है। मौजूदा समय में झज्जर बार एसोसिएशन में 950 वकील सदस्य हैं। वकील अभी कोरोना से ही लड़ रहे हैं।
-यशपाल सैनी, प्रधान बार एसोसिएशन झज्जर।

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