घर वापसी को तरसे / रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी घर जाने के लिए तरस रहे पश्चिम बंगाल के मजदूर

Even after registration, West Bengal laborers yearn to go home
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Even after registration, West Bengal laborers yearn to go home

  • साइक्लोन अम्फान तूफान ने रोका रास्ता, प्रशासन ने अगले आदेश तक यहीं रहने के लिए कहा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

झज्जर. कोरोना वायरस के चलते मार्च से बेरी में फंसे पश्चिम बंगाल के 55 मजदूरों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। पहले कोरोना के कारण वह बेरी में फंस गए और अब सुपर साइक्लोन अम्फान ने एक बार फिर मालदा टाउन वेस्ट बंगाल के परिवारों के वापसी के कदम रोक दिए हैं। 

बेरी में रोजी रोटी के लिए आए इन मजदूरों को 25 मार्च को दिल्ली से चलने वाली ट्रेन से जाना था, लेकिन 22 मार्च को लॉकडाउन के बाद 39 पुरुष 16 महिलाएं और 2 बच्चें यही फंस गए। मजदूर फिरोज, सबीर, मोहन, संजलि का कहना है कि 25 दिन पहले बेरी के प्राइवेट साइबर कैफे से रजिस्ट्रेशन करवाया था, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उनको भेजने का प्रबंध नहीं किया गया। एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर से चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक सन्तोषजनक जवाब नहीं 
मिल रहा। 

अब बंगाल की खाड़ी में बने इस तूफान की वजह से बंगाल के इन मजदूर परिवारों की वापसी की उम्मीद एक बार फिर टूट गई। वहीं प्रशासन ने तूफान के रुकने के बाद अगली व्यवस्था तक यहीं पर रहने को इन लोगों को कहा गया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि अभी इन मजदूरों के भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं आई। अगर खुद प्राइवेट वाहन से जाना चाहे तो प्रशासन मंजूरी दे सकता है।

खाने के लिए नहीं पैसे, पश्चिम बंगाल बुला रहा परिवार

बंगाली मजदूर परिवारों का कहना हैं कि वह चिनाई का कार्य करते हैं। दिसंबर माह में गुड़गांव का ठेकेदार लेकर आया था। उसने शराब फैक्ट्री के नजदीक झुग्गी झोपड़ी बनाकर दे दी। 25 मार्च को वापसी की टिकट बनवाई थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण फंस गए। अब वापस जाने की उम्मीद जगी थी। सुपर साइक्लोन अम्फान के कारण उनके गांव में मकान उड़ गए और सब कुछ तूफान में बह गया अब इन परिवारों की बेचैनी बढ़ गई हैं।

मजदूरों परिवारों ने रोते हुए बताया कि अब खाने के पैसे खत्म हो गए। परिवार वालों के फोन आ रहे हैं कि जल्द से जल्द गांव लोट आओ, लेकिन किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही। पिछले तीन माह से अपने पास से खा रहे हैं। लेकिन तूफान ने एनके गांव में बड़ी तबाही ला दी। जिसके कारण बाल बच्चों और बुजुर्ग मां बाप की चिंता सता रही है। मजदूरों का कहना है कि वैसे तो काम मिल रहा है, लेकिन तूफान के बाद उनका मन गांव में पड़ा है। गुरूवार को नागरिक अस्पताल में डाक्टरी के लिए आए थे उन्होंने तहसीलदार आफिस भेज दिया जहां से नगर पालिका आफिस भेज दिया। वहीं प्रशासन ने उन्हें अगले निर्देशों तक यहीं टिके रहने को कहा है।

घर जाने का इंतजार कर रहे मजदूर शांति के लिए कर रहे योगा

कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते अपने घर पहुंचने की आस जुटाए लगभग 85 मजदूर पिछले दो सप्ताह से आरंभ स्कूल में ठहरे हैं। इन सभी प्रवासी मजदूर व जरूरतमंदों को पंचायती गुरुद्वारा बाबा नानक निष्काम समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ईश्वर शर्मा अपने साथियों के सहयोग से न केवल सुबह शाम खाना परोस रहे हैं, बल्कि उन्हें व्यायाम कराकर शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत करने का बीड़ा उठाए हैं। शनिवार की शाम ठहरे इन प्रवासी मजदूरों को व्यायाम कराने के लिए आचार्य प्रवीण कुमार पहुंचे। उन्होंने सुबह-शाम व्यायाम करने वाले प्रवासी मजदूरों को कहा कि व्यायाम करना जीवन भर स्वस्थ रहने की कुंजी है। इस मौके पर स्कूल निदेशक तरुण गौस्वामी, प्रमुख व्यवसायी सागर टुटेजा, गुलशन शर्मा, पवन अरोड़ा, अंकुर, नीरज, अमित, वीनित पोपली अादि उपस्थित रहे।

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