प्रशासन की छापेमारी:डीएपी की बजाए एसएसपी का विकल्प चुन रहे किसान

झज्जर2 महीने पहले
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जिले में सरसों की बिजाई के दौरान काम आने वाले डीएपी की किल्लत अभी भी जिले में बनी हुई है। इस बीच अच्छी बात यह है कि विभाग के अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। कालाबाजारी को लेकर जिले भर में छापेमारी अभियान शुरू किया हुआ है। इसी के तहत कृषि विभाग की एक टीम ने बेरी, मातनहेल छुछकवास आदि क्षेत्रों में दबिश दी और खाद की स्थिति के अलावा यहां उपलब्ध स्टॉक के बारे में जानकारी हासिल की।

जिले में काफी बड़े क्षेत्र में सरसों की बिजाई का काम होता है, लेकिन इस बार सरसों के भाव 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल पहुंच जाने के कारण किसानों में इसकी बिजाई को लेकर खासा उत्साह बना है। वहीं उत्साह के विपरीत जिले में सरसों की बिजाई के दौरान इस्तेमाल होने वाले डीएपी की किल्लत बनी है। किसान डीएपी खाद के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में भटक रहे हैं, लेकिन उनको काफी देर तक इंतजार करने के बाद खाद नहीं मिल रहा।

शुक्रवार को रैक पहुंचने की उम्मीद बनी
शुक्रवार को आईपीएल कंपनी का एक रैक झज्जर में आने वाला है। इस में 2500 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध रहेगा। लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि यही खाद दो-तीन जिलों के लिए अलॉट होगा। ऐसे में शनिवार के बाद जिले के किसानों की डीएपी खाद का संकट खत्म हो जाएगा।

कालाबजारी की शिकायत पर की जाएगी कार्रवाई
जिले में तेल की फसलों के लिए काफी बेहतर माने जाने वाला एसएसपी खाद अभी उपलब्ध है। जबकि यूरिया की कमी है। इस कमी के शुक्रवार को पूरा होने की उम्मीद है। किसानों को इसके लिए संयम रखना चाहिए। विभाग की ओर से जल्द से जल्द खाद उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों से यह भी अनुरोध है कि वे उतनी ही मात्रा में खाद लेकर जाए। यदि किसी क्षेत्र में कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तब उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. जसवीर सिंह, क्वालिटी कंट्रोलर कृषि विभाग

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