विदेशी पक्षियों का मोहभंग:विदेशी मेहमान परिंदे भिंडावास झील में प्रवास की बजाय राजस्थान की भर रहे उड़ान

झज्जरएक महीने पहले
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डीघल इलाके में अब भी 8 से लेकर 10 हजार  पक्षी - Dainik Bhaskar
डीघल इलाके में अब भी 8 से लेकर 10 हजार पक्षी
  • जलस्तर अधिक और झील में पनपी जलकुंभी इसलिए नहीं मिल रहा है पर्याप्त भोजन

झज्जर की प्रसिद्ध पक्षी विहार भिंडावास झील से विदेशी पक्षियों का मोहभंग इस सर्दी के मौसम में हो गया है। इसका कारण भिंडावास में जल का स्तर अधिक होना है। यहां जलकुंभी भी पूरी झील में छाई हुई है। नतीजतन इस मौसम में जहां 25 से 30 हजार के करीब विदेशी पक्षी कलरव करते हुए उड़ान भरते थे वहां अब ढाई से तीन हजार पक्षी ही देखे जा रहे हैं। दिसंबर का महीना साइबेरिया और हिमालय के तटीय स्थलों से आने वाले विदेशी मेहमानों का मुख्य मौसम माना जाता है, लेकिन इस बार 1 हजार 77 एकड़ में फैली भिंडावास पक्षी विहार में विदेशी मेहमानों की आमद 10 प्रतिशत भी नहीं है। यहां भोजन और प्रवास की कोई सुविधा न मिलने पर पक्षी राजस्थान के भरतपुर समेत अन्य पक्षी विहार की ओर उड़ान भर रहे हैं।

भिंडावास शामिल हुआ रामसर साइट में अब नए सिरे से होगा विकास
एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील भिंडावास का पक्षी अभ्यारण दुनिया भर के पक्षी अभ्यारण के लिए काम करने वाली रामसर साइट में भी शामिल हो गया है। लिहाजा अब भिंडावास का नए तरीके से विकास न सिर्फ प्रवासी पक्षियों के प्रवास को लेकर किया जाएगा बल्कि पर्यटक यहां आकर्षित हो उसके लिए भी समूची व्यवस्था भिंडावास एरिया में की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से एक प्लान भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है और अब इस प्लान के मंजूर होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट से भिंडावास का विकास किया जा सके।

2015 में 10 हजार पक्षी देखे गए इसके बाद घटती गई संख्या
भिंडावास पक्षी विहार में 2015 में 10 हजार पक्षी दिसंबर माह में देखे गए थे। इसके बाद विदेशी मेहमानों की संख्या लगातार गिर रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भिंडावास झील में जलकुंभी का चारों तरफ उगना है। पक्षियों के लिए मुसीबत इस सबसे बड़ी समस्या का निराकरण आज तक नहीं हो सका है और अब इस साल झील में पानी का जलस्तर बढ़ना पक्षियों के मोह भंग होने का सबसे बड़ा कारण है। सिरसा के ओटू झील में साइबेरियन पक्षियों मेला लगता है। सिरसा में साइबेरिया, रूस के अलावा हिमाचल व कश्मीर से ग्रेटर कामोरेंट पहुंचते हैं।

ये विदेशी मेहमान आते हैं यहां :

मार्श रेसिपीपर, आम रेत कीपिंग, ग्रीन रेडपीपर, सामान्य स्कूप्स, सामान्य रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक, जल-कपोत ग्रेलेग गुज, उत्तरी शावलर, फेर्रुजनीस पोचर्ड, टिमिनिक कार्यकाल, छोटा कार्य पिक्चर एवोकेट, मार्श हैरियर आम टीला, व्हाइट आइबिल, पेंटिड स्ट्रॉक, स्कूनबिल, नार्दन सोलर, मलाइड, फ्लेमिंगो, पेंटल आदि पक्षी शामिल हैं। पेलीसिन, रोजी पेलीसन, कॉमन क्रेन, डेमार सेल, बारहेडिड गूज, पर पर्ल हॉर्न, नेकस्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ह्वाइट नेक, ग्रे पेल्सिन, पिनटेल डक, शोवलर, डक, कॉमनटील, डेल चिक, मेलर्ड, पोचार्ड, गारगेनी टेल, फ्लेमिंगो सहित कई प्रजाति के पक्षी भारत आते हैं।
यहां से आते हैं पक्षी :

ठंड शुरू होते ही साइबेरिया, ब्रिटेन, मंगोलिया, मध्य एशिया से हजारों की संख्या में विदेशी परिंदे मध्यभारत के मैदानों में आते हैं। वे पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित पूरे मध्यभारत के मैदानों में आकर डेरा जमाते हैं।

पक्षी विशेषज्ञ बोले परिंदों की खुराक पर पड़ा असर
पक्षी विशेषज्ञ राकेश डीघल का कहना है कि भिंडावास के अलावा झज्जर में पक्षियों के प्रवास का मुख्य केंद्र डीघल के साथ-साथ मांडोठी, रोहद और गुढ़ा गांव बने हुए हैं। हालांकि इन दिनों विदेशी पक्षियों की संख्या अब यहां भी कम हो गई है। इसका बड़ा कारण यह खेतों में भरे जलभराव को किसानों के द्वारा दूर करना है। खेतों में पंप लगाकर भी पानी को साफ कर दिया गया है। इससे विदेशी पक्षियों को खेतों में भरे पानी में जो बीज और छोटे कीड़े मकोड़े के रूप में भोजन मिलता था वह अब नहीं मिल रहा। झज्जर डीएफओ शिव सिंह रावत का कहना है कि उम्मीद है कि रामसर साइट में शामिल होने के बाद भिंडावास पक्षी विहार का नए सिरे से विकास होगा तभी विदेशी मेहमानों की चहचहाहट दोगुनी सुनाई देगी।

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