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रिकवरी का मामला:सरकारी आवास पर अवैध कब्जे की जांच करने वाले अफसर का तबादला

झज्जर8 महीने पहले
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सरकारी आवास को आवंटित करा किसी दूसरे व्यक्ति को दिए जाने के मामले में जांच रिपोर्ट सौंपने वाले एक सीनियर अधिकारी को इसका खामियाजा अपने तबादले के रूप में झेलना पड़ा। सिंचाई विभाग झज्जर के कार्यकारी अभियंता अजेंद्र सिहाग को अपने नाम सरकारी कोठी अलाट करा अपने ही विभाग की एक महिला अधिकारी को दिए जाने का आरोप रहा है।

जांच रिपोर्ट में 16 महीने के किराए के रूप में 500 गुना पैलेंटी लगाकर 80 लाख रुपए की रिकवरी कार्यकारी अभियंता की ओर निकाली गई। 19 सितंबर को दैनिक भास्कर में रिपोर्ट का खुलासा कर दिए जाने के बाद ही सिंचाई विभाग में हड़कंप मच गया था। दरअसल सिंचाई विभाग के तमाम ड्राइवरों की ओर से सीएम विंडो में एक शिकायत भेजी गई थी कि सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अजेंद्र सिहाग अपने गुरुग्राम स्थित निवास स्थान पर निकल जाते हैैं।

इनके द्वारा अलाट कराया गया सरकारी बंगला किसी महिला अधिकारी को नियमों के खिलाफ दिया हुआ है। सीएम विंडो के माध्यम से सिंचाई विभाग के पास पहुंची जांच उस समय अटकने लगी। जब एक कार्यकारी अभियंता को निर्देशित किया गया। बताया जाता है जांच अधिकारी ने सामने वाले अधिकारी के कथित प्रशासनिक रसूख को देखते हुए खुद को जांच से किनारा करने में ही भलाई समझी। जांच करने से अनभिज्ञता जाहिर कर दी। बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जिले से बाहर के अधिकारी को करने के लिए कहा गया।

रोहतक में तैनात कार्यकारी अभियंता पुनीत राय ने 21 जुलाई को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए झज्जर पहुंचना था लेकिन इससे एक दिन पहले ही शिकायत करने वाले ड्राइवर नरेंद्र को उनके घर से बुलाकर यह कहते हुए पुलिस के हवाले कर दिया कि वह शराब पीकर ड्यूटी पर आए हैं। ड्राइवर नरेंद्र का कहना था कि उन्होंने फोन पर पहले ही इस बात की सूचना दे दी गई थी कि वे किसी पार्टी में शामिल हैं और ऐसी स्थिति में वे ड्यूटी पर नहीं पहुंच सकते।

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