134ए:दाखिले के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहे अभिभावक, 358 स्कूलों में सीटें खाली

झज्जरएक महीने पहले
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  • 2 साल पहले की बात करें तो 50 % सीट 134ए के तहत खाली रह गई थी, मौजूदा समय में 15 % सीटें भी नहीं भरी, शिक्षा निदेशालय बच्चों के दाखिले के लिए कर रहा गुजारिश

एक समय में 134ए के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश के लिए मची मारामारी और पैरेंट्स की लामबंदी के दौर के बीच अब यह आलम है कि सरकार की गुजारिश करने के बाद भी गरीब बच्चों के पेरेंट्स 134ए के तहत स्कूलों में एडमिशन नहीं ले रहे हैं। लिहाजा काफी कम एडमिशन हैं। इसके बाद स्कूल शिक्षा निदेशालय ने एक बार फिर से गरीब बच्चों के पेरेंट्स से गुजारिश की है कि वह प्रवेश के लिए ऑनलाइन दाखिला लें।

जिले में 406 निजी स्कूलों ने 134 ए के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराया है और स्कूलों में मौजूद खाली सीटों की संख्या का ब्यौरा शिक्षा विभाग हरियाणा के पोर्टल पर दर्ज किया है। हालांकि इनमें से 358 स्कूलों को ही रजिस्ट्रेशन के लिए मान्यता मिली हुई है। इनमें सीबीएसई और हरियाणा शिक्षा बोर्ड के निजी स्कूल शामिल हैं।

अब दिक्कत यह है कि नए सेशन का आधे से भी ज्यादा समय बीत चुका है और जिले की बात करें तो काफी कम संख्या स्कूलों में प्रवेश के रुझान सामने आ रहे हैं। 2 साल पहले की बात करें तो 50 प्रतिशत सीट 134ए के तहत खाली रह गई थी। और अभी मौजूदा समय में 15 प्रतिशत सीटें भी नहीं भरी गई हैं।

स्कूल संचालकों ने दी चेतावनी-31 मार्च तक बकाया भुगतान नहीं मिला तो हाईकोर्ट जाएंगे

शिक्षा विभाग द्वारा 134ए के तहत बच्चों के एडमिशन की तैयारी के बीच स्कूल संचालकों ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर उनका बकाया भुगतान सरकार ने गत 31 मार्च तक नहीं किया तो स्कूल संचालक हाई कोर्ट में रिकवरी सूट दाखिल करेंगे।

झज्जर में सीबीएसई स्कूल के संगठन सहोदया के चेयरमैन रमेश रोहिल्ला ने कहा 134ए के तहत झज्जर के जिन प्राइवेट स्कूलों में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं उनका भुगतान सरकार को देना है जो बीते 22 सालों से अटका पड़ा है। करीब 40 से 50 करोड़ रुपए का भुगतान सरकार को करना है जो कई बार बिल देने के बाद और ऑनलाइन प्रक्रिया दाखिल होने के बाद भी पेमेंट नहीं हो रही है।

रोहिल्ला ने कहा 134ए के नियमावली में हाई कोर्ट के दिशा निर्देश भी हैं कि अगर सरकार के द्वारा स्कूल संचालकों को बच्चों को पढ़ाने की एवज में पेमेंट नहीं दी जाती है तो स्कूल संचालक रिकवरी सूट दायर कर सकते हैं। रोहिल्ला ने कहा कि स्कूल संचालक काफी इंतजार कर चुके और जब तक पुराना पेमेंट नहीं मिल जाता तब तक नए सत्र में बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

स्कूल में प्रवेश के 134 ए के नियम

हरियाणा शिक्षा विभाग ने 134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के प्रवेश के कई नियम भी निर्धारित किए हैं। इनमें 2 से लेकर आठवीं तक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए बच्चे का जन्म 1 अप्रैल 2016 के बाद होना चाहिए। इसी तरह कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए बच्चे का जन्म 1 अप्रैल 1999 के बाद होना चाहिए।

साथ ही बच्चा हरियाणा कहीं किसी स्कूल में शिक्षा प्राप्त करता हो और उसने एसआरएन यानी कि स्कूल रजिस्ट्रेशन नंबर भी ले रखा हो। इसी प्रकार किसी नए स्कूल में 134 के प्रवेश के लिए पुराने स्कूल की एसएलसी सर्टिफिकेट भी जरूरी है। बच्चे के मां-बाप की सालाना इनकम दो लाख से नीचे होनी चाहिए और सालाना इनकम सर्टिफिकेट तहसीलदार से वेरिफाई होने के साथ-साथ बीपीएल राशन कार्ड भी परिवार का होना जरूरी है।

जिले में 4 हजार सीटें खाली: जिले की बात करें तो 134ए के तहत जिन 400 के करीब स्कूल संचालकों ने अपनी कक्षा 1 से 12वीं तक की जो सीट पोर्टल पर थी उनकी संख्या करीब 4 हजार है। हालांकि अब शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार ही कक्षा 10 कक्षा बारहवीं में 134ए के तहत भर्ती नहीं होनी है लिहाजा अब यह सीटों की संख्या 3300 रह गई है।

झज्जर जिले से 134ए के तहत ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया का प्रतिशत काफी कम है जबकि अन्य जिलों में गरीब बच्चों के परिवार दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हमारी पेरेंट्स से यही गुजारिश है कि वह अपने बच्चों काे नियम के तहत अपने समीप के निजी स्कूलों में दाखिला कराएं ताकि 134ए के तहत मिलने वाले लाभ का वो फायदा उठा सकें।-सुदर्शन पूनिया, नोडल अधिकारी 134ए जिला शिक्षा विभाग झज्जर

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