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विंडबना:कोविड प्रोटोकॉल से जिनका संस्कार हुआ उनकी अस्थियां आज तक नहीं उठीं

झज्जरएक महीने पहलेलेखक: देवेंद्र शुक्ला
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कोविड प्रोटोकॉल से संस्कार के बाद मानव अस्थियां बिखरी पड़ी है। - Dainik Bhaskar
कोविड प्रोटोकॉल से संस्कार के बाद मानव अस्थियां बिखरी पड़ी है।

सनातन धर्म में प्रचलित है कि जिसका दाह संस्कार हुआ उसकी अस्थियों का विसर्जन अगर गंगा में नहीं हुआ तो मृत शरीर को मोक्ष नहीं मिलता। झज्जर में ऐसी ही कई अस्थियां है जो गंगा में प्रवाहित होने की बजाय श्मशान घाट में कचरे के ढेर में तब्दील हो रही हैं। ये उन लोगों की अस्थियां हैं जिनका दाह संस्कार कोविड-प्रोटोकॉल के तहत नगर परिषद की टीम ने किया था।

अप्रैल के तीसरे हफ्ते से लेकर मई महीने तक जो कोरोना की दूसरी लहर चल रही थी 72 ऐसे ही लोगों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत नगर परिषद की टीम ने किया था। अब परिषद की टीम ने मानव शरीर का संस्कार तो कर दिया लेकिन अस्थियों का संस्कार कौन करेगा यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

मृत शरीर की अस्थियां तो उनसे जुड़े परिवार के लोग समेट कर ले गए, जिनका संस्कार कर दिया लेकिन दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद और यूपी के शहरों के जिन लोगों की मौत कोरोना से जूझते हुए हुई थी उनके अंतिम संस्कार के बाद उनके वारिस और परिवार के लोग अस्थियां चुनने नहीं आए। ऐसे ही मृत लोगों की अस्थियां रेवाड़ी रोड स्थित बल्लू वाली श्मशान घाट में कचरे के ढेर में बदल रही हैं।

ईओ बोले-हमारे पास कोई आदेश नहीं, आदेश होता तो हरिद्वार में प्रवाहित कर दी जाती अस्थियां

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अरुण नांदल का कहना है कि हमारे पास कोरोना पॉजिटिव से पीड़ित होकर जान गंवाने वाले लोगों का संस्कार प्रोटोकॉल के तहत करने के आदेश को मिले थे इसके बाद ही ऐसे लोगों का संस्कार परिषद की टीम ने किया था। ईओ ने कहा कि संस्कार के बाद मृत लोगों की अस्थियां गंगा में विसर्जित करने संबंधी कोई गाइडलाइन हमारे पास नहीं आई थी। अगर इस तरह के आदेश आते तो अस्थियों को गंगा में जरूर प्रवाहित करवाया जाता।

कुत्तों का भोजन बन रही हैं मानव हड्डियां: मर्मस्पर्शी पहलू यह भी है कि रेवाड़ी रोड स्थित बल्लू वाली कुई श्मशान घाट पर जहां कोविड प्रोटोकॉल के तहत लोगों के शव का संस्कार हुआ था वहां जगह-जगह जो अस्थियों के ढेर लगे हुए हैं वो आवारा कुत्तों का भोजन बन रही हैं। यहां सैर करने वाले लोगों का कहना है कि श्मशान घाट में चौकीदार की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा यहां आवारा कुत्ते गाहे-बगाहे हड्डियों को ले जाते दिखाई दे जाते हैं।

बहादुरगढ़ में दिखाई दी मानवता, हरिद्वार में प्रवाहित की गई अस्थियां

​​​​​​​बहादुरगढ़ में अस्थियों को लेकर मानवता दिखाई दी। यहां नगर परिषद ने कोविड प्रोटोकॉल के तहत 100 से ज्यादा लोगों का संस्कार किया। नगर परिषद ने अपना कर्तव्य सिर्फ दाह संस्कार तक सीमित नहीं रखा लेकिन यहां काफी सालों से सक्रिय मोक्ष सेवा समिति ने कोविड प्रोटोकोल के तहत जिन लोगों का संस्कार हुआ था उनके शवों की अस्थियां रीति रिवाज के तहत हरिद्वार में विसर्जन किया। सेवा समिति से जुड़े सुरेंद्र चुग ने बताया कि बहुत से ऐसे लोग थे जिनकी अस्थियां चुनने कोई नहीं आया तब यह काम समिति से जुड़े कार्यकर्ताओं ने किया।

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