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  • The City Council Gave Up The Contract To Catch The Monkeys, Will Spend 950 Rupees On One, Plans Will Also Be Made For The Bovine Soon.

आतंक से मुक्ति की तैयारी:नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने का ठेका छोड़ा, एक पर 950 रुपए खर्च करेगी, जल्द गोवंशों के लिए भी योजना बनेगी

झज्जर14 दिन पहले
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  • उपद्रवी बंदरों और बेसहारा गोवंशों से शहर को मुक्त कराने की तैयारी में जुटी नगर परिषद
  • डीएमसी ने अधिकारियों को दोनों काम के प्रति गंभीरता बरतने के दिए निर्देश

स्वच्छता अभियान को पटरी पर लाने के साथ अब नगर परिषद झज्जर शहर क्षेत्र की दो प्रमुख समस्याओं उपद्रवी बंदरों और बेसहारा गोवंश पर फोकस करेगी। नगर परिषद ने बंदर पकड़ने का ठेका छोड़ दिया है। गोवंश को किस तरह संरक्षण में रखना है, इसको लेकर जिला स्तरीय प्लान बनाया जा रहा है। बता दें कि नगर परिषद के 1 से लेकर 19 वार्ड में कोई भी ऐसी गली और सड़क नहीं है, जहां के लोग बंदर और बेसहारा गोवंशों से परेशान ना हो।

आए दिन बंदरों के किसी न किसी को काटने, घर में आकर सामान उठा ले जाने की शिकायतें आती रहती हैं। इसी प्रकार नगर परिषद ने अब कूड़ा करकट के साथ-साथ बंदर और बेसहारा गोवंश से शहर क्षेत्र को मुक्ति दिलाने के लिए कमर कसी है। इसके लिए डीएमसी आशिमा सांगवान ने स्थानीय निकाय विभाग के सभी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से इन दोनों काम के प्रति गंभीरता बरतने की बात कही है।

पिंजरे लगाएगी एजेंसी व बंदर छोड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदारी की रहेगी

क्षेत्र में बंदरों के उपद्रव की लगातार आ रही शिकायत और लोगों के घायल होने की समस्या को देखते हुए नप ने शहर में सर्वे कराया, तब करीब 1000 बंदर सभी वार्डों में होने का आंकड़ा सामने आया है। इसके बाद तय किया कि इस काम को किसी अनुभवी ठेकेदार को सौंपा जाए। अब 1000 बंदर पकड़ने की एवज में नप ने प्रति बंदर 950 रुपए खर्च का ठेका छोड़ा है। एजेंसी की जिम्मेदारी शहर में बंदर पकड़ने के लिए अलग-अलग जगह पिंजरे लगाने की है। इसमें फंसने वाले बंदर को चने, केले खिलाने के अलावा उन्हें जंगलों में छोड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदार की रहेगी।

जल्द ही बंदर पकड़ो अभियान शुरू होगा। अब देखना यह है कि हर बार इस तरह ठेका स्थानीय निकाय की ओर से समय-समय पर लोगों की मांग के अनुरूप छोड़ा जाता है, लेकिन कुछ दिन बाद बंदर फिर शहर हर में दिखाई देने लगते हैं। हालांकि नगर परिषद का दावा है कि इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होगी। जितने भी बंदर पकड़े जाएंगे उनकी टैगिंग होगी। टैगिंग किए हुए बंदर अगर शहर में दोबारा मिलते हैं, तब बंदर पकड़ने वाले को उसका कोई भी पैसा नहीं मिलेगा।

बेसहारा गोवंशों को लेकर जल्द ही जिला स्तरीय मीटिंग होगी

बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए स्थानीय निकाय की डीएमसी आशिमा सांगवान ने जिला उपायुक्त जितेंद्र दहिया के साथ मीटिंग की। इसमें अभी यह तय नहीं हुआ कि अभियान कब से शुरू होगा, जबकि इससे पहले इसके लिए एक पूरी कार्ययोजना बनाई जाएगी। विभिन्न सरकारी विभागों की राय लेकर उनका सहयोग मांगा जाएगा। बताया गया कि इस संबंध में जल्द ही जिला स्तरीय मीटिंग होगी। इसमें जिला परिषद के सीईओ ब्लॉक के बीडीपीओ से लेकर पशु पालन समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।

हर बार नगर परिषद गोवंश को पकड़कर स्थानीय गोशाला में भेज देती है। फिर वहां गोशाला प्रबंधन की ओर से चारे की समस्या व गोवंश के रहने की परेशानी बताई जाती है। इस समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन योजना बनाएगा कि अगर कहीं सरकारी जमीन है तो वहां पशुओं के लिए बड़ा स्थान बनाकर सभी गोवंश को रखा जाए। बेसहारा गोवंश को सरकारी संरक्षण में रखने के लिए जिले के तीनों शहरों में अलग-अलग रूप से क्रियान्वित करने की भी योजना अमल में लाई जा सकती है। बता दें के बहादुरगढ़ के अलावा, बेरी और झज्जर शहर में हाईवे, स्टेट हाईवे और प्रमुख मार्गों पर बेसहारा गोवंश सुबह से शाम तक मौजूद रहता है। ये लोगों के लिए हादसे का सबब बने हैं। झज्जर क्षेत्र में ही 2 हजार से ज्यादा गोवंशों की संख्या बताई जा रही है।

जिले की स्थानीय निकाय के अधिकारी आशिमा सांगवान बंदरों और बेसहारा गोवंश के कारण लोगों को हो रही परेशानी को लेकर गंभीर है। इस मामले में बंदरों को पकड़ने का ठेका तो छोड़ दिया है। अब जल्द ही गोवंश से लोगों को राहत देने के लिए प्लानिंग की जा रही है। -अरुण कुमार नांदल, सचिव, नगर परिषद झज्जर।

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