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मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं:ढाई दशक बाद भी महेंद्रगढ़ में चौकीदार का 10 बाई 10 का कमरा ही है जीआरपी का कार्यालय

महेंद्रगढ़19 दिन पहले
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  • महिला कर्मचारियों के लिए टॉयलेट तक की सुविधा भी नहीं है, बिना दरवाजे का है बाथरुम

महेंद्रगढ़ में करीब ढाई दशक पहले शुरु हुई जीआरपी चौकी को सरकार व रेलवे विभाग के उच्च अधिकारी आज तक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा पाए हैं। स्टेशन पर आजादी से पहले उत्तरी छोर पर बने एक कमरे में यह चौकी काम कर रही है। चौकी में वर्तमान में 13 कर्मचारी हैं जिनमें 6 महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। ड्यूटी के बाद आराम करने, ड्रेस चेंज करने व मुलजिम को पेशी तक रखने के लिए गोदाम का एक ही पुराना कमरा है। मुलजिम को गोदाम के कमरे में एक तख्त के साथ बेल से बांधकर रखना पड़ता है।

महिला व पुरुष कर्मचारियों के आराम करने का भी वहीं एक गोदाम का रुम है। इतना ही नहीं चौकी में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी होने के बाद भी यहां उनके लिए कोई अलग से टायलेट तक नहीं हैं, बाथरुम के कोई दरवाजा नहीं हैं और सरकार व विभाग के उच्च अधिकारी महेंद्रगढ़ में आदर्श स्टेशन बनाकर वाहवाही लूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन के साथ उत्तर दिशा में खाली जगह पर वर्ष 1942 में एक सीमेंट का गोदाम तथा वहां चौकीदार के लिए एक 10 बाई 10 का कमरा हुआ करता था। 1995 से पहले यह स्टेशन लुहारु जीआरपी के अधीन होता था परंतु 27 जुलाई 1995 में यहां जीआरपी चौकी शुरु हुई थी। तब से लेकर यह चौकी यहां एक कमरे में ही चली आ रही है।

सर्दी हो चाहे गर्मी, नीम के नीचे कटता है समय

महेंद्रगढ़ जीआरपी चौकी में वर्तमान में 13 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनमें 2 सब इंस्पेक्टर, एक एएसआई, 4 सिपाही तथा 6 महिला कांस्टेबल शामिल हैं। चौकी के एक 10 बाई 10 के कमरे में सभी कर्मचारी एक साथ इकट्ठे भी नहीं हो सकते हैं। ऐसे में देखा जाता है कि सर्दी हो या गर्मी यहां के कर्मचारी चौकी के पास खड़े एक नीम के पेड़ के नीचे बैठकर ही अपनी मीटिंग व अन्य कार्य निपटाते नजर आते हैं। बरसात के दिनों में ज़रुर इन कर्मचारियों की परेशानियां बढ़ जाती है।

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