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प्रदर्शन:प्रदर्शनकारियों ने काेई मांग पत्र नहीं दिया : विवि प्रबंधन

महेंद्रगढ़10 महीने पहले
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  • केंविवि के सामने ग्रामीणों का धरना जारी, विश्वविद्यालय की मैनेजमेंट ने भी रखा अपना पक्ष

केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामने ग्रामीणों का चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार भी जारी रहा। ग्रामीणों ने बताया कि वे एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल, पीएम, मानव संसाधान मंत्री व सीएम काे ज्ञापन भी भेज चुके हैं जिसमें गांव जाट व पाली के लाेगाें काे विवि में नाैकरियाें में वरियता, अब तक हुए निर्माण कार्याें व भर्तियाें की सीबीआई जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों का आराेप है कि विवि प्रबंधन द्वारा गांव के युवाओं काे राेजगार नहीं दिया जा रहा। जाे लाेग चतुर्थ श्रेणी के लगे हुए हैं, उनका शोषण हाे रहा है। 

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ ने विश्वविद्यालय के बाहर धरने पर बैठें लोगों की मांगों के संदर्भ में अपना मत स्पष्ट किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शिकायतों का समाधान संवाद के माध्यम से होता है, लेकिन धरने पर बैठने से पूर्व और आज तक उन्हें इन प्रदर्शनकारियों की ओर से न ही कोई सूचना दी गई और न ही इन्होंने कोई मांग पत्र प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार धरना दे रहे लोग जांट व पाली गांव के लिए आउटसोर्स की नौकरियों में नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। जबकि आज भी विश्वविद्यालय में 95 फीसद से अधिक आउटसोर्स के कर्मचारी इन्हीं गांवों के ही हैं। इन लोगों का कहना है कि वर्ष 2011 में ग्रामीणों व विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच इस संबंध में समझौता भी हुआ है। ऐसा कोई भी समझौता प्रशासन के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है और इतना ही नहीं गांव वालों की ओर से भी ऐसा कोई दस्तावेज आज तक प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

धरना दे रहे लोगों की मांग है कि 50 फीसदी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी गांवों के लोग ही हो। जहां तक स्थाई नौकरी में आरक्षण की बात है तो स्थाई नियुक्ति प्रक्रिया में भी इन गांवों व आसपास के क्षेत्रों से आने वाले स्थानीय लोग आवश्यक अनिवार्यताओं को पूर्ण कर विश्वविद्यालय में रोजगार पा रहे हैं, लेकिन यदि बात आरक्षण की होगी तो हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय एक केंद्रीय संस्थान है जहां केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण नियम ही लागू होंगे। इन नियमों की पालना हमारा दायित्व है इसी तरह कोर्सेज के स्तर पर गांवों के बच्चों को प्रति कोर्स एक-एक सीट आरक्षित कर प्रदान करने की मांग की जा रही हैं। यहां भी ठीक वहीं स्थिति है चूंकि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय केंद्र सरकार द्वारा स्थापित केंद्रीय शिक्षण संस्थान है, इसलिए यहां क्षेत्रीय व स्थानीय आधार पर दाखिले में आरक्षण का कोई प्रावधान लागू नहीं है।

विश्वविद्यालय केंद्र सरकार द्वारा लागू केंद्रीय आरक्षण नीति के तहत अपने यहां दाखिले देता है। विश्वविद्यालय की स्थापना में किसानों की जमीन के एवज में किसान परिवारों के घर से एक सदस्य के लिए नौकरी की मांग भी की जा रही है। सभी को यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि इस तरह का प्रावधान विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।     भर्ती प्रक्रिया व एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड व केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), भारत सरकार द्वारा किए गए निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विवि प्रशासन सिर्फ इतना ही कहना चाहता है कि यदि कोई भी शिकायत तथ्यों के आधार पर इस संबंध में प्रस्तुत की जाएगी, एफिडेविट के साथ कोई हमारे समक्ष इन विषयों को जांच के मांग करते हुए प्रस्तुत करता है तो हम इसकी जांच के लिए तैयार हैं। जहां तक बात मनमानी की है तो विवि प्रशासन नियमों, अधिनियमों के अनुसार ही कार्य कर रहा है। यहां प्रशासन का जोर कार्य को नियमों के अनुसार सुचारू रूप से समय पर करने पर रहता है।

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