महिला दिवस:राजकीय स्कूल से पढ़कर संयुक्त निदेशक के पद तक पहुंची राजबाला, अब लिंगानुपात सुधारने की दिशा में प्रयासरत

मंडी अटेली9 महीने पहले
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  • महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं गणियार की बेटी, गांव से हाईटेक सिटी चंडीगढ़ तक का प्रेरणादायी सफर

गांव गणियार में 17 दिसंबर 1969 को मास्टर रघुवीर सिंह के घर जन्मी राजबाला महिला सशक्तीकरण का खास उदाहरण बनकर ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। राजस्थान के बॉर्डर पर स्थित देहात के गांव गरियार से चंडीगढ़ में महिला एवं बाल विकास में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद का सफर में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल में हासिल की। इसके बाद मैट्रिक गांव से 7 किमी दूर पैदल चलकर गोकलपुर राजकीय हाई स्कूल से अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण की।

हिसार स्थित कृषि विश्वविद्यालय से होम साइंस में एमएससी पास कर महिला एवं बाल विकास में पहले सीडीपीओ-पीओ, फिर डिप्टी स्पीकर तथा हाल में उल्लेखनीय कार्यों व उत्कृष्ट प्रदर्शन की बदौलत अब विभाग में जाइंट डायरेक्टर पद बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को गति देकर लिंग अनुपात सुधारने में सार्थक प्रयास कर रही हैं। राजबाला कहती हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मेरे पिताजी मास्टर रघुवीर सिंह ने तमाम सामाजिक व लड़कियों से उपेक्षापूर्ण रवैये का दरकिनार करते हुए मुझे न केवल पढ़ाया लिखाया बल्कि उच्च शिक्षा के लिए हिसार स्थिति कृषि विश्वविद्यालय में मेट्रिक उपरांत 1985 में भेजा। वहां पर उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद मुझे महिला एवं बाल विकास में सीडीपीओ की नौकरी मिली, जिसमें कुपोषण से ग्रसित बच्चों, गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार को आंगनबाड़ी में हर लाभपात्र को मिले, इसके लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही स्कीमों को बेहतर तरीके से लागू करने का मौका मिला। विभाग में बतौर पीओ, कार्यक्रम अधिकारी, रोहतक और कैथल में लंबे समय तक सेवा करने पर जिला उपायुक्त से लेकर विभाग के मंत्रियों ने उनके बेहतर कार्य करने पर सम्मानित किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्र और दूसरे शीर्ष अधिकारियों ने भी उनके द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की।

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