जायजा:गाजर के बीज की क्वालिटी चेक करने ढाणी ठाकरान पहुंचे कृषि विशेषज्ञ, निरीक्षण में 80 फीसदी फसल खराबी की पुष्टि

नांगल चौधरी3 दिन पहले
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दुकानदार का लाइसेंस जांच करने की मांग पर विभाग ने नोटिस भेजकर मांगा रिकार्ड, फर्जीवाड़े का अंदेशा। - Dainik Bhaskar
दुकानदार का लाइसेंस जांच करने की मांग पर विभाग ने नोटिस भेजकर मांगा रिकार्ड, फर्जीवाड़े का अंदेशा।

ब्रांडेड कंपनी की पैकिंग में डुप्लीकेट बीज बेचने के आरोपों की जांच करने के लिए कृषि विशेषज्ञों की टीम शुक्रवार सुबह ढाणी ठाकरान पहुंची। उन्होंने गाजर की फसल को उखाड़कर क्वालिटी को चेक किया। निरीक्षण में 80 फीसदी से अधिक फसल खराबी की पुष्टि हुई है। विभिन्न तकनीकी प्वाइंटों को सूचीबद्ध करने के बाद टीम नारनौल रवाना हो गई। उन्होंने अगले 4-5 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है।

आपको बता दें कि सरकार ने कम पानी में पकने वाली आधुनिक फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। छोटे किसानों को बागवानी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। तर्क देते हैं कि सब्जी, फल-फूल, दलहन फसलों की मार्केटिंग में परेशानी नहीं रहती, साथ ही किसानों को भाव भी अच्छे मिलेंगे।

सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर ढाणी ठाकरान निवासी किसान जोरावर सिंह पुत्र रामेश्वर सिंह ने दो एकड़ रकबे पर गाजर की फसल उगाई थी। उन्होंने नांगल चौधरी की फर्म शिव बीज भंडार से सेंग्रो कंपनी का बीज खरीदा था। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उन्होंने खेत में जिंक, डीएपी, सल्फर व अन्य दवाइयों का इस्तेमाल भी किया था।

अच्छी पैदावार लेने के लिए उन्होंने ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की। चार महीने बाद फसल तैयार होने पर किसान ने बीते सप्ताह गाजरों को उखाड़ना शुरू किया था। इस दौरान अधिकतर गाजरों की नस्ल जड़नुमा, गंठीली, छोटी, त्रिशंकु अंडाकार की मिली। जिस कारण मंडी में खरीददार नहीं मिल रहे।

पीड़ित किसान ने बागवानी विभाग में खराब बीज होने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों की जांच करने के लिए शुक्रवार सुबह जिला बागवानी अधिकारी डॉ. प्रेमसिंह व कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ की टीम ढाणी ठाकरान पहुंची। उन्होंने मिट्टी की नमी तथा गाजर के पत्तों का निरीक्षण किया।

इसके बाद करीब 50 गाजरों को उखाड़ा गया, जिनमें 80 फीसदी गाजर खराब मिली। किसान से बीज कंपनी के बारे में पूछा गया, तथा खाद व सिंचाई के संदर्भ में जानकारी ली। बयानों को सूचीबद्ध करने के बाद टीम ने जल्द ही रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया है।

दिल्ली-राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में कंपनी की डुप्लीकेट पैकिंग की चर्चाएं
किसानों की चर्चाओं के अनुसार दिल्ली और राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में ब्रांडेड कंपनी की पैकिंग में डुप्लीकेट बीज भरा जाता है। इस डुप्लीकेट पैकिंग की कीमत बहुत कम होने के कारण दुकानदारों को मोटा मुनाफा होता है। प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए किसान को पक्का बिल नहीं दिया जाता। जिसके आभाव में अधिकतर किसान क्लेम केस दायर नहीं कर पाते हैं।

किराए का पानी, खाद भी उधार की थी

पीडि़त किसान जोरावर सिंह ने बताया कि दो एकड़ रकबे पर गाजर की फसल उगाई थी, जिसमें एक एकड़ माल बंटाई में लिया गया रकबा शामिल है। पड़ोसी किसान से सिंचाई के लिए किराए पर पानी लिया। खाद-बीज भी उधारी के पैसों से खरीदा था। फसल बेचकर इनके पैसे चुकाने थे, किंतु बीज की खरीद में फ्रॉड से देनदारी चुकाना मुश्किल हो गया है। समस्या से अधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
लाइसेंस नहीं बनवा रहे दुकानदार

विभागीय सूत्रों की मानें तो नांगल चौधरी ब्लॉक में खाद-बीज की 10 से अधिक दुकानें हैं। लेकिन अधिकतर दुकानदारों के पास बागवानी विभाग का लाईसेंस नहीं। जिसके बिना वेजीटेबल सीड्स बेचने की अनुमति नहीं होती। किंतु नांगल चौधरी ब्लॉक की कई दुकानों में अवैध रूप से वेजीटेबल बीज बिक रहा है। ऐसे में किसानों के साथ धोखाधड़ी की संभावना बनी रहती है।

किसान की शिकायत पर ढाणी ठाकरान में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के विशेषज्ञों के साथ गाजर की फसल का निरीक्षण किया है। सिंचाई व बीजाई प्रक्रिया के संदर्भ में पूछताछ की है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार करके कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि दुकानदार को नोटिस भेजकर लाइसेंस व अन्य रिकार्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सभी प्रकार की जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।- डॉ. प्रेमसिंह, जिला बागवानी अधिकारी।

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