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कॉलेज के कंडम भवनों को गिराया:बजट पास न होने से नए का निर्माण अटका, अब नए शैक्षणिक सत्र पर संकट

नांगल चौधरी13 दिन पहले
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नांगल चाैधरी में विज्ञान संकाय का भवन। - Dainik Bhaskar
नांगल चाैधरी में विज्ञान संकाय का भवन।
  • भवन गिराने की प्रकिया में लेटलतीफी से नए कैंपस का बजट हो चुका लैप्स बजट डिमांड की दूसरी फाइल को स्वीकृति का इंतजार

शहीद मेजर सतीश दहिया कालेज में आर्ट-कॉमर्स संकाय के नए कैंपस निर्माण का नक्शा मंजूर नहीं हुआ, इससे पहले ही कॉलेज प्रशासन ने पुरानी बिल्डिंग को डिमोलिस करवा दिया है। उधर निदेशालय ने अक्टूबर महीने से शैक्षणिक सत्र आरंभ करने के निर्देश दिए हैं, जबकि विद्यार्थियों को बैठाने के कमरे तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पूरे शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है।

आपको बता दें कि नांगल चौधरी के शहीद मेजर सतीश दहिया कॉलेज में 400 सीट आर्ट, 80 काॅमर्स तथा 80 दाखिले विज्ञान संकाय के स्वीकृत हैं। सरकारीकरण करने के बाद कॉलेज में आर्ट, कॉमर्स तथा साइंस के अलग-अलग कैंपस निर्माण की घोषणा की गई थी, लेकिन बजट में भवन निर्माण के लिए पैसों का प्रबंध नहीं किया गया। करीब 45 साल पहले निर्मित भवनों में कक्षाएं लगती रही हैं।

रिपेयर नहीं होने के कारण अधिकतर कमरों की दीवार में दरार और छत का प्लास्टर गिरना शुरू होने पर विद्यार्थियों को जानलेवा खतरा उत्पन्न होने गया था। तत्कालीन प्राचार्य के आग्रह पर २०१५ में पीडब्लूडी विभाग ने भवनों का अवलोकन किया था। संतुष्टि नहीं होने पर पुरानी बिल्डिंग को कंडम करार दिया। रिपोर्ट के आधार पर डीएचई ने कंडम भवनों को गिराने की मंजूरी दे दी।

कॉलेज प्रशासन को बजट मुहैया नहीं कराया, केवल मलबे की कीमत से ही भवनों को कंज्यूम कराने की हिदायत दी गई है। इन शर्तों पर कोई भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद दो साल पहले कॉलेज प्रशासन ने टैंडर प्रक्रिया से भवनों को डिमोलिस करवा दिया है। लेकिन अब नए कैंपस का नक्शा तथा निर्माण का बजट स्वीकृत नहीं हो रहा है।

विभिन्न औपचारिकता पूरी होने के बाद कैंपस निर्माण में एक साल लगेगा। तब तक आर्ट और साइंस संकाय की कक्षाएं लगाना मुश्किल लग रहा है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। बावजूद स्थिति यथावत रहने की वजह से विद्यार्थी चिंतित बने हुए हैं।

320 सीटों की हो चुकी कटौती, कैंपस निर्माण के आश्वासन पर हुई थी बहाल

सितंबर 2016 में यूनिवर्सिटी द्वारा काॅलेज का निरीक्षण किया गया था। टीम को भवन व अन्य सुविधाओं में खामियां नजर आई थी, जिसके आधार पर आर्ट संकाय की 320 सीटें कम कर दी थी। उस दौरान कालेज प्रशासन द्वारा जून 2017 के शैक्षणिक सत्र तक नया कैंपस बनाने का आश्वासन दिया था, जिसके आधार पर सीटें बहाल हुई हैं, लेकिन अब पुराने भवन डिमोलिस होने पर स्थिति और भी दयनीय बनी हुई है।

5.97 करोड़ से नए कैंपस निर्माण का बजट लैप्स

बिल्डिंग कंडम घोषित होने के बाद कालेज प्रशासन द्वारा उच्चतर शिक्षा निदेशक को पत्र लिखा गया। अथक प्रयासों के बाद 5.97 करोड़ बजट सैंक्शन हो गया था, जिससे तीन मंजिलें कैंपस का निर्माण होना था। पुलिस हाउसिंग काॅरपाेरेशन को निर्माण के लिए टैंडर भी दिया गया, किंतु भवन गिराने की प्रक्रिया अटकने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पाया। नियमों के चलते विभाग को बजट लैप्स करना पड़ा है।

चीफ आर्किटेक्ट के पास है नक्शा फाइल, जल्द मंजूरी की उम्मीद

​​​​​​​काॅलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल यादव ने बताया कि विभागीय निर्देशानुसार कंडम बिल्डिंग को ध्वस्त करवा दिया है। नए कैंपस के नक्शे की फाइल चीफ आर्किटेक्ट के पास है। जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है, इसके बाद विभाग द्वारा निर्माण के लिए बजट राशि मुहैया कराएगा। उन्होंने बताया कि आर्ट संकाय के विद्यार्थियों की साइंस कैंपस में पढ़ाई कराते हैं। कमरों की किल्लत के चलते पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित रहती है।

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