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अच्छी मुहिम:डार्कजोन में 70 लीटर प्रति व्यक्ति पानी उपलब्ध कराने का प्रपोजल तैयार, घर-घर नलकूप कनेक्शन करने में जुटा विभाग

नांगल चौधरी3 दिन पहले
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  • ‘प्रति व्यक्ति 40 लीटर जलापूर्ति’ से ग्रामीणों का नहीं चल रहा गुजारा
  • ग्रामीण वाटर टैंकों की बढ़ाई जाएगी क्षमता

डार्कजोन के गांवों को 40 लीटर प्रति व्यक्ति की औसत से पानी मिल रहा है। निर्धारित पानी से ग्रामीणों की आपूर्ति नहीं होती, इसलिए विभाग ने घरेलू कनेक्शनों पर रोक लगा दी थी, लेकिन इस प्रतिबंध से शौचालयों का इस्तेमाल अटक गया, साथ ही कई गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। इसके समाधान के लिए सरकार ने 70 लीटर पानी प्रति व्यक्ति को उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। योजना के अनुसार घरेलू कनेक्शनों को मंजूरी देकर मुहिम शुरू कर दी गई है।

बता दें कि गांवों में पेयजल समस्या उत्पन्न होने पर करीब 8-10 साल पहले नाबार्ड परियोजना के तहत 350 करोड़ का बजट मंजूर किया था, जिससे नसीबपुर के पास वाटर टैंक निर्माण करवाया गया, नांगल चौधरी हलके के प्रत्येक गांव में पाइप लाइन दबा दी गई। बूस्टिंग सिस्टम से गांवों में पेयजल पहुंचना शुरू हो गया, लेकिन उस दौरान नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक का 70 लीटर पानी प्रति व्यक्ति उपलब्ध कराने का शेड्यूल बनाया गया था, जबकि डार्कजोन होने के कारण ग्रामीणों का पशुओं की पेयजल व्यवस्था भी कैनाल बेस्ड नहरी पानी पर निर्भर है।

जिस कारण पानी का निर्धारित कोटा पर्याप्त साबित नहीं हो रहा। महीने में 15 दिन गांवों में पेयजल संकट बना रहता है। काम चलाने के लिए विभाग को पेयजल के लिए राशनिंग प्रणाली लागू करना पड़ता है। इसके अलावा घरेलू कनेक्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तर्क दिया कि सुविधापूर्वक पानी मिलने पर बर्बादी अधिक होती है। इसलिए कैनाल बेस्ड नहरी पानी का कनेक्शन सार्वजनिक टंकियों में किया गया है। इस व्यवस्था से पानी का खर्चा तो कम हो गया, किंतु शौचालयों की सुविधा ठप हो गई।

ग्रामीणों का मानना है कि सार्वजनिक टंकी से मटके या बाल्टी द्वारा शौचालय की टंकी को भरना संभव नहीं होता। परेशानी बढऩे पर खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकार की खुले में शौच मुक्त योजना प्रभावित होने के बाद विभाग ने प्रति व्यक्ति पानी की औसत बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभिन्न गांवों की जनगणना के बाद उच्चाधिकारियों ने सरकार को प्रपोजल भेजा था।

मंजूरी मिलने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने घर-घर में कनेक्शन करने का अभियान शुरू कर दिया है। पानी के लिए सार्वजनिक टंकियों पर सैकड़ों महिलाओं की भीड़ एकत्रित रहती है। एक-दूसरी में पहले बारी लेने की होड़ रहती है। इस दौरान आपसी लड़ाई-झगड़े के मामले बढ़ गए। कई वृद्ध महिलाएं टंकी पर पानी भरने में सक्षम नहीं। विभागीय व्यवस्था से उनकी समस्या बढ़ गई।

जिले के 6 ब्लॉकों को मिल रहा प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी

विभागीय जानकारी के मुताबिक महेंद्रगढ़, अटेली, सतनाली, कनीना, नारनौल, सीहमा ब्लॉक को 70 लीटर प्रति व्यक्ति की औसत से पानी मिल रहा है। इन ब्लॉकों के अधिकतर घरों में घरेलू कनेक्शन दे दिया गया है। डार्कजोन के बावजूद नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक को 40 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिलना लोगों के लिए संकट बना हुआ है।

टंकियों की सफाई भी नियमित नहीं होती, बीमारी का खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि सार्वजनिक टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती। ढक्कन खुला रहने से कीड़े-मकोड़े व मिट्टी गिर जाती है। जिससे ग्रामीणों को संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया। घरेलू कनेक्शन मिलने पर शुद्ध पेयजल मिल सकेगा। इसके अलावा टंकियों की टूंटी खुली रह जाती है, जिससे आमरास्तों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई।

घरेलू कनेक्शन अभियान के साथ ग्रामीण वाटर टैंकों की स्टॉक क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। करीब 140 टैंकों को अपग्रेड करने के टेंडर छोड़ दिए। दिसंबर महीने तक कनेक्शन तथा पेयजल स्टॉक क्षमता बढ़ाने का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी। जिले के कई ब्लॉक में 70 लीटर प्रति व्यक्ति की औसत से पानी सप्लाई हो रहा है, क्योंकि वहां बोरवेल सप्लाई चालू होने के साथ वाटर टैंक क्षमता अव्वल है।

-रामपाल सिंह, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग

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