खाद की आपूर्ति:1400 मीट्रिक टन डीएपी खाद पहुंची कड़ी निगरानी में किया जाएगा वितरण

नारनौल2 महीने पहले
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  • जिन जिलों में सरसों की बिजाई नहीं होती उनके कोटे की खाद भी फिलहाल सरसों की बिजाई वाले जिलों में भेजी जाएगी

जिले में गुरुवार को 1400 मीट्रिक टन खाद पहुंची, इसके बाद उपायुक्त ने दावा किया कि अगले कुछ दिनों में जरुरत के अनुसार खाद की आपूर्ति हो जाएगी। जिले में डीएपी खाद की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। साथ ही प्रशासन की ओर से सरसों के लिए डीएपी के साथ ही एसएसपी को इसका अच्छा विकल्प बताते हुए किसानों को इसका इस्तेमाल किए जाने की भी अपील की गई। बताया गया कि यह कीमत में भी लगभग बराबर पड़ता है और पैदावार भी अधिक होती है। अब जिला के कृषि विभाग के अधिकारी कैंप लगाकर किसानों को एसएसपी के प्रयोग करने के तरीके के बारे में बताएंगे।

जिले में खाद की किल्लत के बीच गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ उपायुक्त ने विभिन्न विषयों को लेकर वीडियो कॉफ्रेंसिंग में भाग लिया। वीसी समाप्त होने पर उन्होंने अधिकारियों की बैठक की। इसमें डीसी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिन जिलों में सरसों की बिजाई नहीं होती उन जिलों में भेजी जाने वाली खाद भी फिलहाल सरसों की बिजाई वाले जिलों में भेजी जाएगी। कई जिलों में गेहूं की बिजाई होती है तथा बिजाई का समय नवंबर के अंतिम सप्ताह तक होता है।

अभी वहां पर बिजाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में राज्य सरकार के निर्देश अनुसार उन जिलों में सप्लाई होने वाला डीएपी भी सरसों की बिजाई वाले क्षेत्र में पहुंचेगा। उपायुक्त ने कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे पीओएस मशीन का डाटा हर रोज अपडेट करें ताकि पोर्टल पर सही स्थिति का पता रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे खाद वितरण के कार्य पर और अधिक निगरानी रखें। इस बैठक में एसडीएम महेंद्रगढ़ दिनेश कुमार तथा नगराधीश अमित कुमार के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।

उप-कृषि निदेशक डाॅ. वजीर सिंह ने डीएपी के स्थान पर किसानों को एसएसपी व यूरिया मिलाकर प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये मिलाकर सरसों की बिजाई के लिए बहुत ही बेहतर खाद बनती है। यह खाद अकेली डीएपी से कहीं ज्यादा असरकारक है। किसान डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करें। तीन बैग एसएसपी में एक बैग यूरिया का मिलाकर उपयोग करें। एसएसपी के तीनों बैग तथा एक यूरिया के बैग की कीमत डीएपी के एक बैग के लगभग बराबर पड़ेगी।

ऐसे समझें डीएपी तथा एसएसपी खाद में अंतर

डीएपी का पूरा नाम डाइअमोनियम फॉस्फेट है। इसमें नाइट्रोजन की मात्रा माइनस 18%, फास्फोरस की मात्रा माइनस 46%, सल्फर की मात्रा माइनस 0 प्रतिशत व कैल्शियम की मात्रा माइनस 0 प्रतिशत होती है। एसएसपी का पूरा नाम सिंगल सुपर फॉस्फेट है। इसमें नाइट्रोजन की मात्रा माइनस 0 प्रतिशत, फास्फोरस की 16%, सल्फर की मात्रा माइनस 11 प्रतिशत, कैल्शियम माइनस 19% तथा जिंक की माइनस 1% होती है।

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