परेशानी:भावांतर भरपाई योजना की घोषणा के बावजूद भी किसान को साढ़े चार सौ रुपए का नुकसान

नारनौल19 दिन पहले
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  • बाजरा की खरीद के अब तक नहीं मिले हैं सरकारी आदेश, 9 अक्टूबर को खरीद होने का अनुमान

प्रदेश में पहले समर्थन मूल्य और बाद में भावांतर भरपाई योजना के तहत एक अक्टूबर से बाजरे की खरीद शुरु करने की घोषणा कर चुकी सरकार 6 अक्टूबर के बाद भी खरीद शुरु करने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए हैं। जबकि त्यौहारी सीजन शुरु हो चुका है, रबी फसल बिजाई का सीजन 10 दिन बाद तथा शादी-विवाह का सीजन एक महीने बाद शुरु होने वाला है। ऐसे में किसानों को पैसे की सख्त जरूरत है।

बाजार में बाजरे के भाव 1200 से 1300 रुपए प्रति क्विंटल है। जो समर्थन मूल्य से 950 से 1050 रुपए प्रति क्विंटल तथा भावांतर भरपाई योजना से 600 रुपए प्रति क्विंटल कम है, परंतु पैसे की सख्त जरूरत तथा सरकार की बेरुखी के चलते पहले ही बारिश का मारा बेचारा किसान औने-पौने दामों 1200 से 1300 रुपए प्रति क्विंटल में अपना बाजरा व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं, लेकिन व्यापारी अभी बाजरे में नमी की मात्रा अधिक बता कर या तो खरीदने से मना कर रहे हैं या 1000 से 1100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब के खरीद रहे हैं।

ऐसी स्थिति में बेचारा किसान बड़ी मुश्किल से फसल पैदा कर उसे बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, जबकि सरकार प्रदेश में पिछले चार दिनों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीद कर रही है। इस भेदभाव के लेकर किसानों में सरकार के प्रति भारी रोष है।

बता दें कि प्रदेश के शुष्क एवं रेतीले क्षेत्र दक्षिण हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, झज्जर, तथा दादरी व भिवानी के कुछ हिस्से की खरीफ मौसम की मुख्य एवं नकदी फसल बाजरा है। यहां के किसान अपनी बाजरे की फसल को बेच कर रबी फसल की बिजाई, त्यौहारी सीजन व शादी-विवाह की तैयारी करते हैं।

इन तैयारियों के लिए किसान की जेब में 10 अक्टूबर तक पैसे आ जाने चाहिए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार हर साल फसलों का समर्थन मूल्य घोषित कर एक अक्टूबर के खरीद शुरु करवाती है। इस बार भी सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित किया तथा एक अक्टूबर से खरीद शुरु करवाने के दावे किए थे, परंतु सरकार ने एक अक्टूबर से दो-तीन दिन पहले ही सरकार ने समर्थन मूल्य पर केवल 25 प्रतिशत फसल ही खरीदने तथा शेष बाजरे की भावांतर भरपाई योजना के तहत खरीद करवाने की गोल-मोल बात कह डाली।

इसके बाद सरकार ने 6 अक्टूबर तक भी बाजरे की खरीद को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में किसानों के मन में यह बात आने लगी है कि सरकार इस बार बाजरा खरीदेगी भी या नहीं। ऐसे में बेचारा किसान सरकार की बेरुखी के चलते हताश एवं मायूस हैं तथा बाजार भाव 1200 से 1300 रुपए में बाजरा बेचने को तैयार हैं।

1200 से 1300 रुपए में भी आढ़ती नहीं खरीद रहे बाजरा

किसान समर्थन मूल्य के हिसाब से 950 से 1050 रुपए प्रति क्विंटल तथा भावांतर के तहत 600 रुपए प्रति क्विंटल घाटा उठाकर बाजरा बेचने को मजबूर हैं। इसके बावजूद व्यापारी बाजरे में अधिक नमी का हवाला देकर बाजरा खरीदने से मना कर रहे हैं या 1000 से 1100 रुपए के हिसाब से बाजरा खरीद रहे हैं।

आढ़ती महादेव व आढ़ती देवकीनंदन ने बताया कि सरकार के नियमानुसार खरीद के समय बाजरे में 8 से 9 प्रतिशत नमी होनी चाहिए। परंतु वर्तमान 17 से 19 प्रतिशत नमी है। मार्केट कमेटी नारनौल के रिकार्ड के अनुसार 5 अक्टूबर तक अनाज मंडी में कुल 560 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है, परंतु अधिक नमी के कारण अभी तक 394 क्विंटल बाजरा ही खरीदा गया है।

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