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मौसम ने मारी पलटी:फागण म्ह जेठ तै बी बुरा हाल, धूलभरी आंधी के बीच पारा 40° पार

नारनौलएक महीने पहले
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  • साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से बदला मौसम, गेहूं की पैदावार पर पड़ेगा प्रतिकूल असर

मौसम का मिजाज दो दिन में ही बद से बदत्तर हो गया है। फाल्गुन के महीने में ज्येष्ठ जैसा आभास हो रहा है। दिनभर धूलभरी आंधी चलने से आसमान में मंगलवार को धूल का गुबार छाया रहा। तापमान 40 डिग्री को क्रॉस कर गया है, जो कि सामान्य से 8 डिग्री अधिक है। बुजुर्गों का तो कहना है कि फाल्गुन मेंं हमने ऐसा मौसम आज तक नहीं देखा है और ना ही सुना है।

दरअसल फाल्गुन के महीने में सर्दी खत्म हो रही होती है और गर्मी शुरू होने को होती है। इससे ना सर्दी और ना गर्मी होती है। ऐसा ही मौसम बना भी हुआ था, लेकिन सोमवार को मौसम अचानक खराब हो गया और सुबह से ही धूलभरी हवाएं चलने शुरू हो गईं, जो दिनभर चलती रहीं। तापमान जो रविवार तक 33-34 डिग्री के आस पास बना हुआ था वह सोमवार को 40.5 पर पहुंच गया।

इसके चलते दिनभर पसीने छूटते रहे। सोमवार को धुलडी की वजह से बाजार बंद थे और तकरीबन लोगों ने घरों में ही त्योहार का जश्न मनाया। इस कारण कोई बहुत ज्यादा परेशानियां महसूस नहीं हुईं, लेकिन मंगलवार को बाजार कार्यालय आदि सब खुल जाने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। धूल की वजह से बाजारों में कामकाज प्रभावित रहा।

सड़क किनारे खुले में रेहड़ी, स्टाॅल, थड़ी लगाने वालों का तो धंधा मंदा ही रहा। दुकानदार खासकर बाहरी हिस्से में दिनभर सामान व काउंटर की धूल ही झाड़ते रहे। वाहन चालकों खासकर दुपहिया वाहन चालकों जो हेलमेट नहीं पहने हुए थे, उनको भी परेशानी हुई। सोमवार की तुलना में मंगलवार को तापमान तो करीब 6 डिग्री कर रहा। सोमवार को अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री था, जो मंगलवार को 36.6 पर आ गया।

खराब मौसम की वजह से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। धूल भरी तेज हवा की वजह से ना तो सरसों निकालने और ना ही गेहूं की कटाई का कार्य हो पा रहा है। काटी हुई सरसों व गेहूं की पूलियां तेज हवा में इधर-उधर उड़कर बिखर रही हैं। थ्रैसिंग के दौरान भूसा उड़ने की वजह से किसान यह कार्य करने में हिचक रहे हैं।

इन सबसे ज्यादा नुकसान दायक बात यह है कि दो दिन की गर्मी व हवा की वजह से गेहूं की जो फसल रविवार तक हरी थी, वह भी एकदम से सफेद (जिसको किसान हवा निकलना कहता है)हो गई है। बालियोंं में स्वस्थ दाना भी पिचक रहा है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा।

कुकसी के किसान राजू, डेरोली जाट के सुनील, नांगल के मास्टर लालचंद का कहना है कि फाल्गुन के महीने में आज तक ऐसा मौसम ना तो देखा और ना हमारे बुजुर्गों से कभी सुना। ऐसे मौसम के तो अभी दो महीने पड़े हैं। अभी से यह हाल है तो फिर ज्येष्ठ में तो जीना ही मुश्किल हो जाएगा।

विभाग का अनुमानआज भी बदले-बदले रहेंगे मौसम के तेवर

मौसम विभाग कहना है कि आने वाले 24 घंटे मौसम परिवर्तनशील ही रहेगा। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग अध्यक्ष डॉ. एमएल खीचड़ का कहना है कि मौसम मेंं यह बदलाव शुष्क हवाओं की वजह से आया है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से पूर्वाेत्तर भारत में बारिश की संभावना बन रही है, जबकि उत्तर पश्चिमी मैदानी भागों में शुष्क हवाओं की वजह से तापमान बढ़ रहा है। बुधवार को भी मौसम का मिजाज कमोबेश ऐसा ही बना रहने की संभावना है। किसान मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए ही कार्य निपटाएं।

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