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पत्र जारी:एसडीएम ने मांगा जिला बार एसो. से 32 लाख के अनुदान का हिसाब

नारनौल2 महीने पहले
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  • डीसी कार्यालय ने भी यूसी देने के जारी किए थे आदेश

जिला बार एसोसिएशन को वर्ष 2018 में हरियाणा विधानसभा की तत्कालीन डिप्टी स्पीकर संतोष यादव द्वारा 11 लाख रुपए तथा वर्ष 2020 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ओमप्रकाश द्वारा 21 लाख रुपए का अनुदान दिया गया था। बार ने उस पैसे का कहां इस्तेमाल किया, इसकी जानकारी एसडीएम की ओर से मांगी गई है। इससे पहले उपाुयक्त कार्यालय भी इस संबंध में यूसी देने के लिए पत्र जारी कर चुका है।

बता दें कि मार्च 2020 में जिला बार एसोसिएशन की चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद लॉकडाउन अवधि के दौरान सामाजिक अधिकारिता राज्यमंत्री ने जिला बार एसोसिएशन को 21 लाख रुपए की राशि का चैक सौंपा था।

उस राशि को लॉकडाउन में ही जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने खर्च कर दिया। इस दौरान चुनाव अधिकारी ओमप्रकाश यादव मांदीवाला एडवोकेट ने उस कार्यकारिणी के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया। चुनावी प्रक्रिया के बीच इस प्रकार के निर्णय के बाद विवाद बढ़ गया है। उसके बाद से ही 21 लाख तथा उससे 2 साल पहले डिप्टी स्पीकर द्वारा दिए गए 11 लाख के अनुदान के मनमाने खर्च पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।

खर्च राशियों संबंधी प्रमाण पत्र की मांग की

जानकारी के अनुसार एसडीएम नारनौल के कार्यालय के पत्र क्रमांक 1541 एमसी 29 दिसंबर 2020 के द्वारा जिला बार एसोसिएशन से इन दोनों अनुदान राशियों के खर्च किए जाने संबंधी उपयोगिता प्रमाण पत्र की मांग की गई है। इसमें पूर्व डिप्टी स्पीकर द्वारा दी गई 11 लाख की अनुदान राशि का चैक तात्कालिक प्रधान महेंद्र यादव एडवोकेट के कार्यकाल में तथा सामाजिक न्याय मंत्री द्वारा 21 लाख की अनुदान राशि का चैक निवर्तमान प्रधान अशोक यादव एडवोकेट के कार्यकाल में प्राप्त हुआ था।

इसी मसले पर 26 अक्टूबर को उपायुक्त कार्यालय ने भी इस 32 लाख रुपए की राशि को खर्च करने संबंधी उपयोगिता प्रमाण पत्र उनके कार्यालय में देने बारे निर्देशित किया था।

बताया जाता है कि उपायुक्त कार्यालय को इसकी जानकारी नहीं सौंपे जाने पर अब मामला एसडीएम को सौंपा गया है, क्योंकि निष्पादन अधिकारी होने के नाते इस सरकारी ग्रांट को उचित उद्देश्य के लिए खर्च करवाने की जिम्मेदारी एसडीएम की बनती है।

मंत्री ने 21 लाख रुपए पुस्तकें एवं फर्नीचर की खरीद के लिए दिए थे

जानकारी के अनुसार तत्कालीन डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने 11 लाख रुपए की अनुदान राशि जनसाधारण के उपयोग के लिए पुस्तकालय की पुस्तकें खरीद किए जाने के लिए दी गई थी। राज्यमंत्री ओमप्रकाश यादव ने 21 लाख रुपए की अनुदान राशि पुस्तकालय के लिए पुस्तकें एवं फर्नीचर की खरीद के लिए दी गई थी। सरकार द्वारा ऐसी राशि जिस उद्देश्य के लिए दी जाती है, उसे उसी उपयोग में खर्च किया जाना अनिवार्य होता है तथा बाद में उसे राशि का संबंधित संस्था को यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट भी देना पडता है।

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