ताकि लक्ष्य पर असर ना पड़े:एसडीएम ने छात्रा को एचसीएस परीक्षा के दौरान इस्तेमाल पेन भेंट कर बढ़ाया हौसला

नारनौलएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • महामारी के इस दौर में भी 9वीं की छात्रा प्रीति अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर, घर के दरवाजे को ही बोर्ड बना बच्चों के साथ-साथ कर रही तैयारी

जहां कोराेना महामारी के चलते सभी विद्यालय बंद होने से बच्चे अपने घरों में समय व्यतीत कर रहे हैं। वहीं कुछ विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर इस समय का पूर्ण उपयोग करने में लगे हैं, ताकि वे आगे चलकर अपने लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकें। इसी कड़ी में गांव झाड़ली निवासी सूरज स्कूल की कक्षा 9वीं की मेधावी छात्रा प्रीति अपने लक्ष्य को लेकर कड़ी मेहनत कर रही है।  लॉकडाउन शुरू हाेने के बाद से कक्षा 9 की इस छात्रा के द्वारा यूट्यूब चैनल के माध्यम से छोटे बच्चों के लिए शिक्षा से संबंधित वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डाली जा रही है, ताकि लॉकडाउन की वजह से छोटे बच्चों की पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का कोई असर न पड़े। छात्रा के पिता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि उसकी बेटी प्रीति सूरज स्कूल में कक्षा 9वीं की छात्रा है। उसका लक्ष्य एक आईएएस अधिकारी बनने का है। जिसको पूर्ण करने के उद्देश्य से उसके द्वारा अभी से मेहनत की जा रही है।

एसडीएम ने छात्रा को कार्यालय में किया सम्मानित
गांव झाड़ली की बेटी प्रीति द्वारा इतनी छोटी सी उम्र में अपने लक्ष्य को लेकर की जा रही तैयारी व छोटे बच्चों को भी शिक्षित करने की प्रेरणा से प्रभावित होकर सोमवार को एसडीएम रणबीर सिंह ने प्रीति को कार्यालय में बुलाकर सम्मानित किया। इस दौरान एसडीएम ने जब छात्रा के लक्ष्य के बारे में पूछा तो छात्रा प्रीति ने बताया कि बड़ी होकर वह एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। छात्रा के साथ की गई बातचीत व उसके दृढ़ लक्ष्य को देखते हुए एसडीएम रणबीर ने अपनी एचसीएस परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किए गए पेन को भेंटकर हौसला बढ़ाया।

रणबीर सिंह भी एसडीएम बनने से पूर्व प्रवक्ता के पद पर रहते हुए बच्चों को पढ़ाते थे। छात्रा प्रीति को देख उन्हें भी अपनी बचपन की यादें ताजा हो गई। इसके साथ ही उन्होंने सूरज स्कूल के संचालक संदीप यादव को भी छात्रा का विशेष ध्यान रखते हुए हर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कहा, ताकि छात्रा भविष्य में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

प्रीति अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आसपास के बच्चों को भी दे रही शिक्षा
प्रीति एक निश्चित शेड्यूल तैयार कर अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने घर के आसपास रहने वाले छोटे बच्चों को भी नि:शुल्क में पढ़ा रही है। वह प्रतिदिन कार्य कर अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर है।
घर के दरवाजे को ही बोर्ड बनाकर कर रही तैयारी
घर में ब्लैक बोर्ड न होने के कारण घर के दरवाजे को ही बोर्ड बना रखा है। जिसके माध्यम से वह घर में पढ़ने आने वाले बच्चों को पढ़ाती है। वहीं अपनी भी तैयारी कर रही है। प्रीति ने बताया कि उसके पास आस-पास के घरों के करीब 20 बच्चें पढ़ाई के लिए आते है।

खबरें और भी हैं...