यूरिया खाद की किल्लत:मांग की तुलना में आपूर्ति कम, नतीजा... यूरिया खाद की किल्लत, किसान पैक्स के रोज लगा रहे हैं चक्कर

नारनौलएक महीने पहले
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किसानों को यूरिया खाद की किल्लत से जूझना पड़ रहा - Dainik Bhaskar
किसानों को यूरिया खाद की किल्लत से जूझना पड़ रहा

जिले में डीएपी के बाद अब किसानों को यूरिया खाद की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण इस बार प्रदेश में डिमांड की तुलना में यूरिया की कम आपूर्ति होना है। ऐसे में जिले में भी डिमांड की तुलना में यूरिया की कम आपूर्ति हो रही है। इसके चलते जिले में पिछले चार-पांच दिनों से यूरिया की भारी किल्लत बनी हुई है। ऐसे में किसान यूरिया के लिए पिछले चार-पांच दिनों से को-आॅपरेटिव सोसाइटी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद न आने के कारण किसानों को अपनी जेब से किराया-भाड़ा लगाने के बावजूद खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। बता दें कि इस बार जिले में रबी फसल के सीजन में 3.60 लाख एकड़ भूमि पर फसलों की बिजाई की गई है। इस समय जिले में सरसों व गेहूं की फसल में पहली सिंचाई करने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। किसानों के अनुसार सरसों व गेहूं की पहली सिंचाई पर यूरिया खाद सख्त जरुरत होती है। क्योंकि फसलों की पहली सिंचाई में यूरिया खाद डालने से पौधों में अच्छा फुटाव होता है। जिसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है।

ऐसे में पहली सिंचाई में यूरिया खाद डालने से फसलों के अच्छे उत्पादन की उम्मीद बढ़ जाती है। ऐसे में जिले में 6 हजार एमटी यूरिया की जरुरत है, लेकिन जिले को अभी तक करीब 3 हजार एमटी यूरिया ही मिला है। इसके चलते जिले में यूरिया की मारामारी बनी हुई है। इसके चलते किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खाद की किल्लत के चलते किसान पिछले चार-पांच दिनों से को-आॅपरेटिव सोसाइटी के चक्कर लगा रहे हैं। जिले में को-आॅपरेटिव सोसाइटी पर सोमवार को यूरिया आना था। इसके चलते आज यूरिया लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में किसान को-आॅपरेटिवसोसाइटी पर आए थे।

को-आपरेटिव सोसाइटी पर खाद लेने आए किसान लीलाराम, नरेश कुमार, अनिल कुमार, राजेंद्र सिंह, अशोक कुमार वीरेंद्र सिंह, कुलदीप व श्योचंद ने बताया कि को-आपरेटिव सोसाइटी पर सोमवार को यूरिया खाद आने की बात कही गई थी। इसके चलते वे यूरिया लेने के लिए सुबह 8 बजे ही सोसाइटी पर पहुंच गए थे। चार-पांच घंटे इंतजार करने के बाद भी खाद नहीं आया। इसके चलते चार-पांच घंटे भूखे-प्यासे अनाज मंडी में पड़े रहने के बाद उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। इससे किसानों में भारी रोष है।

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