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समस्या:एक साल पहले 88 लाख रुपए खर्च करके खरीदे टैंपो अब तक नहीं चले

धर्मनारायण शर्मा | नारनौल11 दिन पहले
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नारनाैल में नगर परिषद कार्यालय में खड़े कूड़ा उठाने वाले टैंपाें। - Dainik Bhaskar
नारनाैल में नगर परिषद कार्यालय में खड़े कूड़ा उठाने वाले टैंपाें।
  • शहर में सफाई सिस्टम ठीक करने में अब टैंपो ड्राइवर लगाने में राजनीति आई आड़े

23 जनवरी 2019 को शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने तथा गली-गली जाकर कूड़ा उठाने के नाम पर नगर परिषद ने 88 लाख रुपए खर्च करके 20 नए टैंपो खरीदे थे। इसमें प्रत्येक टैंपो की खरीद पर 4 लाख 39 हजार रुपए खर्च किए गए। तब सामाजिक न्याय राज्यमंत्री ओमप्रकाश यादव ने इन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना करते समय दावा किया था कि-ये टैंपो नारनौल शहर को स्वस्थ बनाने में सहयोगी होंगे। इनका मकसद है कि नारनौल प्रदेश का एक साफ व स्वच्छ शहर हो।

ये टैंपो प्रात: कूड़ा कचरा एकत्रित करने के लिए शहर के प्रत्येक मोहल्ले-वार्ड में जाएंगे। पिछले साल 23 दिसंबर को हरी झंडी मिलने के बाद वे सभी 20 टैंपो नगर परिषद कार्यालय परिसर से निकले तथा शहर का चक्कर लगाकर वापस लौट आए।

बात आज एक साल 17 बाद की करें तो नगर परिक्रमा के बाद लौटकर वे टैंपो जहां आकर खड़े हुए थे, वे आज भी वहीं खड़े हैं। हालांकि उस समय बाद में पता चला कि इनकी खरीद में जल्दीबाजी की गई। खरीदे गए इन टैंपो का रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया गया था। खैर, कुछ समय बद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई, किंतु फिर भी इनका परिचालन नहीं हुआ।

पता चला कि नगर परिषद ने टैंपो तो खरीद लिए, पर इन टैंपो को चलाने के लिए चालकों की भर्ती ही नहीं की। इसमें वेतन देने के लिए पैसा न होने के कारण भर्ती का काम रुका हुआ है। पैसों की कमी और चालकों की तैनाती में एक साल बीत गया, किंतु शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए खरीदे गए करीब 80 लाख के टैंपो वहीं नगर परिषद परिसर में खड़े-खड़े जंग खा गए।

डीएमसी डॉ जेके आभीर के आने के बाद इनकी सुध ली गई। उनके आदेश पर इन्हें चलाने के लिए जब वाहनों की पड़ताल की गई तो ज्ञात हुआ कि अनेक वाहनों के कलच, लाइट गायब है। गाड़ी नहीं चली, तो उनकी बैटरी चार्ज नहीं हुई, लिहाजा वह डैड अवस्था में पहुंच गई हैं। इसके बाद इन्हें ठीक करवाया गया।

बताया जाता है कि नए साल पर एक जनवरी से इन सफाई टैंपो को चलाने की तैयारी थी, किंतु इस 14 चालकों की सूची का मंजूरी मिलने से मामला वहीं अटक गया। पहला कारण ईओ के अवकाश पर होना, दूसरा कारण सत्तादल से जुडे एक राजनीतिज्ञ का दखल। इसमें उनका अपने लोगों को एडजस्ट करने का हठ, ऐसे में पिछले 10 दिनों से ये टैंपो जहां एक साल से खड़े थे, वहीं खड़े हैं।

दूसरी ओर कुछ नगर पार्षद भी इनके परिचालन न होने अपने वार्डों में लगे कूड़े के ढेर से लोगों की तीखे व्यंग्य बाण का सामना करते हुए परेशान हैं। उन्होंने भी इसमें छुपी राजनीति को देखते हुए कार्यकारी अधिकारी को वाहनों को तत्काल चलवाने तथा इसमें शहरी गलियों के जानकार ड्राईवरों को ही काम सौंपने की मांग की है। उन्होंंने मामला ऊपर तक पहुंचाने की भी तैयारी कर ली है।

ड्राइवरों की नियुक्ति में शुरू हो गई राजनीति: अब जब नगर परिषद इनके सड़कों पर दौड़ाने की तैयारी में है और चालक लगाने की कार्रवाई शुरू की गई तो उससे पहले एक और पेंच आ गया। इसके लिए ठेके पर 14 चालक लगाने की तैयारी की गई। चर्चा हैं कि पिछले साल नगर परिषद ने शहर के नालों की सफाई करवाने के लिए कुछ कर्मचारियों को ठेके पर रखा था।

उनके लिए जो मेहनताना आना था, वह काफी लेट आया। इन सफाई कर्मचारियों ने सफाई का काम तो कर दिया, किंतु इसकी एवज में पैसा नहीं मिला। तब इनमें से कुछ को भविष्य में भला करने का आश्वासन दिया गया था। अब जब ड्राइवर लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो उनमें से 6 ऐसे युवकों को इस काम के लिए चुना गया। परीक्षण के दौरान उन्हें वाहन चलाने के योग्य पाया गया।

कूड़ा उठाने के काम के लिए खरीदे गए वाहनों को चलाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए ठेके पर ड्राइवर लगाए जाने हैं। अभी तक ठेकेदार द्वारा लगाए जाने वाले ड्राईवरों की सूची फाइनल होकर मेरे पास नहीं पहुंची है। जैसे ही यह काम हो जाएगी, एक-दो दिन में इन वाहनों को कूडा लिफ्टिंग के कमा में लगा दिया जाएगा।
- के के यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद नारनौल।

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