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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ की सरकार से मांग:शिक्षा विभाग में तबादला नीति की शक्तियों का हाे विकेंद्रीकरण

नारनौलएक महीने पहले
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हरियाणा सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में लागू की जा रही ऑनलाइन तबादला नीति को असफल बताते हुए हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य सचिव धर्मपाल शर्मा ने इसके विकेंद्रीकरण किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि तबादलों का मतलब होता है न्यूनतम उथल-पुथल के साथ विद्यार्थियों को अध्यापक मिलना एवं अध्यापकों को सुविधाजनक स्टेशन मिलना।

इसके साथ ही किसी भी आदर्श तबादला नीति में शक्तियों का विकेंद्रीकरण होना भी अनिवार्य होता है, परंतु दुर्भाग्य है कि सरकार द्वारा पिछले 5 वर्ष से अपनाई जा रही ऑनलाइन तबादला नीति में उपरोक्त 4 न्यूनतम शर्तों में से कोई भी लागू नहीं है। उन्होंने कहा है कि पहली बात तो सरकार आज तक स्थानांतरण का समय ही तय नहीं कर पाई है।

बता दें कि प्राध्यापक व अन्य वर्गों के स्थानांतरण अगस्त 2016 में हुए थे और वर्तमान ट्रांसफर ड्राइव में कट डेट 30 जून 2021 ली जा रही है। केवल सवा महीने के अंतराल के लिए सैकड़ों वैकेंसी खत्म कर दी गई है। इस प्रकार प्राथमिक अध्यापकों के स्थानांतरण मात्र एक बार सितंबर 2016 में किए गए थे।

जिसमें इस ऑनलाइन तबादला नीति की खामी के चलते तीन हजार से अधिक प्राथमिक अध्यापक एनीव्हेयर में बहुत दूर-दूर स्थानांतरित कर दिए गए थे। अध्यापक नेता ने कहा आश्चर्य है कि इतनी हाईफाई आईटी, डिजिटल हरियाणा, स्मार्ट अधिकारी व विद्वान शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री होते हुए उन तीन हजार प्राथमिक अध्यापकों के साथ आज तक न्याय नहीं कर पाए हैं।

अब भी विभाग बड़ी बेशर्मी से कह रहा है की जेबीटी अध्यापकों की बदली नहीं कर पाएंगे, क्योंकि न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि अध्यापक संघ कहता है कि मंत्री जी व अधिकारी महोदय सीधे-सीधे अपनी ना कामयाबी क्यों नहीं स्वीकार करते। साथ ही अध्यापक संघ दावा करता है कि उनके संगठन को यह काम सौंप दिया जाए तो 1 माह के अंदर-अंदर यह काम कर देंगे।

वर्तमान दौर में भी प्राथमिक अध्यापकों के अतिरिक्त अन्य अध्यापकों के लिए स्थानांतरण ड्राइव चला हुआ है। शिक्षा व स्कूल संचालन की दृष्टि से अच्छा होता कि पहले सभी वर्गों की पदोन्नति सूचियां जारी करके पदोन्नत अध्यापकों को उनके नए वर्गों में ट्रांसफर ड्राइव में शामिल करते परंतु ऐसा नहीं किया गया।

अब स्थानांतरण के बाद पदोन्नति की जाएगी जिससे पुन: शैक्षणिक ढांचा चरमरा जाएगा। इसके साथ ही लंबे समय से काम कर रहे गेस्ट टीचरों को भी ट्रांसफर पॉलिसी में शामिल नहीं किया गया, जो सरासर अन्याय है।

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