खाद की किल्लत:400 बैग पहुंचे तो उन्हें लेने 2 हजार किसान कतार में लगे, 500 महिलाएं भी शामिल रहीं

नारनौल2 महीने पहले
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नारनौल में डीएपी के लिए कतार में किसान और महिलाएं। - Dainik Bhaskar
नारनौल में डीएपी के लिए कतार में किसान और महिलाएं।

जिले में डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। नारनौल अनाज मंडी स्थित सरकारी खाद बिक्री केंद्र पर आए डीएपी आईपीएल के 400 बैग के लिए करीब 500 महिलाओं समेत करीब 2000 किसान सुबह से लेकर दोपहर बाद तक तेज धूप में घंटों लाइन में लगे रहे, लेकिन प्रति किसान 2 बैग के हिसाब से 200 किसानों को खाद मिलने के बाद समाप्त हो गया।

ऐसे में धक्कम-धक्का के बीच 5 से 6 घंटे तक लाइन में लगे रहने के बाद शाम को 1800 किसानों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। दूसरी ओर कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी खाद के टोटा के बीच किसानों डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) खाद का उपयोग करने का विकल्प दिया है। उनका कहना है कि एसएसपी खाद किसानों को डीएपी से सस्ता पड़ेगा तथा फसलों के लिए ज्यादा लाभदायक रहेगा।

बता दें कि दशहरे के त्यौहार से जिले में रबी की फसल सरसों व चना की बिजाई शुरु हो जाती है तथा इसके 15 से 20 दिन बाद गेहूं व जौ आदि की बिजाई शुरु हो जाती है। रबी फसल की बिजाई के लिए किसान को प्रति एकड़ डीएपी खाद के एक बैग की ज़रुरत पड़ती है। ऐसे में मध्यम वर्ग के एक किसान को कम से कम 5 से 7 बैग डीएपी की व्यवस्था करनी होती है। परंतु इस बार जिले में डीएपी खाद का भारी टोटा है।

स्थिति यह है कि किसान सब काम छोड़ कर डीएपी खाद के लिए सुबह 7 बजे से सरकारी खाद बिक्री केंद्रों (पैक्स) पर लाइन में लगते हैं, लेकिन पैक्सों पर डीएपी के गिने-चुने बैग आने के कारण धक्कम-धक्का के बीच घंटों लाइन में लगने के बावजूद किसानों को शाम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। अनाज मंडी नारनौल स्थित सरकारी खाद बिक्री केंद्र पर डीएपी के लिए बुधवार को किसानों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं भी लाइन में लगी देखी गई।

खाद बिक्री केंद्र पर लाइन में लगी महिला कमला देवी, राजेश देवी, शकुंतला, शर्मिला, कमलेश देवी, मंजू देवी, संतोष, ओमप्रकाश, हरीश, देशराज, लीलाराम, शेर सिंह, अड़ीसाल, घनश्याम व करतार सिंह ने बताया कि डीएपी खाद के लिए वे पिछले दो दिनों से बिक्री केंद्र पर आ रहे हैं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा खाद आने के कारण घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सरकारी खाद बिक्री केंद्र के रिकार्ड के अनुसार बुधवार को नारनौल अनाज मंडी स्थित खरीद केंद्र पर 400 बैग डीएपी आईपीएल के आए थे।

इन 400 बैग के लिए 500 महिलाओं समेत 2 हजार से अधिक किसान लाइन में लगे हुए थे। इसके चलते खाद बिक्री केंद्र के बाहर तेज धूप में 200 मीटर लंबी लाइन महिलाओं तो 400 मीटर लंबी लाइन किसानों की लगी हुई थी। बिक्री केंद्र पर सुबह 7 बजे ही किसान लाइन में लगने शुरु हो गए थे तथा 9 बजते-बजते लंबी लाइन लग गई थी।

दोपहर 12 बजे बाद खाद की गाड़ी 400 बैग लेकर खरीद केंद्र पर पहुंची। इसके बाद आगे लाइन में लगे 200 किसानों को दो बैग प्रति किसान को वितरित किए गए। इसके बाद खाद खत्म हो गया। इस प्रकार घंटों लाइन में लगे रहने से बाद 1800 किसानों को दोपहर बाद खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

किसान परेशानी से बचने के लिए करें सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) उर्वरक का उपयोग : संजय यादव
कृषि विभाग के इंस्पेक्टर संजय यादव ने बताया कि जिले में डीएपी की कमी को देखते हुए किसान परेशानी से बचने के लिए डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि किसान डीएपी के साथ पर तीन बैग एसएसपी में एक बैग यूरिया का मिला कर उपयोग करें। एसएसपी के तीनों बैग तथा एक वेगन यूरिया की कीमत डीएपी के एक बैैैैैैैैैैैग से कम पड़ेगी।

इसके साथ ही इससे फसलों को डीएपी खाद से ज्यादा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि डीएपी खाद पौधों में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी को पूरा करता है। डीएपी के एक बैग में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन तथा 46 प्रतिशत फास्फोरस पाया जाता है। जबकि सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) के तीन बैग में एक बैग यूरिया मिलाने से इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस के अलावा सल्फर व कैल्शियम की मात्रा मिलती है।

इस प्रकार एसएसपी का उपयोग फसलों के लिए डीएपी से ज्यादा लाभदायक रहेगा। जबकि इसकी कीमत डीएपी के बैग की कीमत से कम बनती है। इस प्रकार किसान एसएसपी का उपयोग कर एक तो डीएपी के लिए उठाने पड़ रही परेशानी से बचें। दूसरा फसलों का उत्पाद ज्यादा पाएं तथा पैसे की भी बचत करें।

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