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ब्लैक फंगस:33 नए केस, 2 की मौत, रिजर्व वार्ड में अब भी 156 मरीज भर्ती

राेहतक24 दिन पहले
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पीजीआई के ब्लैक फंगस के लिए रिजर्व ईएनटी विभाग के वार्ड 8 में दाखिल मरीज। - Dainik Bhaskar
पीजीआई के ब्लैक फंगस के लिए रिजर्व ईएनटी विभाग के वार्ड 8 में दाखिल मरीज।
  • महामारी- 7 दिन में ही मिले ब्लैक फंगस के 121 नए मामले बढ़ा रहे मुश्किलें

ब्लैक फंगस के बढ़ते दायरे के बीच पीजीआई में मरीजों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। शनिवार को 33 नए मरीज पीजीआई में ब्लैक फंगस का शिकार होने पर भर्ती किए गए हैं। वहीं महामारी के इस दूसरे रूप को लेकर एक बुरी खबर भी पीजीआई से ही है। यहां दाखिल ब्लैक फंगस के दो मरीजों की मौत हुई है।

पीजीआई प्रबंधन ने इन मौत की पुष्टि कर दी है। फिलहाल नए मरीजों को ब्लैक फंगस केस के लिए रिजर्व वार्ड 8 और 11 में दाखिल किया गया है। पीजीआई प्रबंधन का दावा है कि ब्लैक फंगस को लेकर उपचार व सुविधाओं के दृष्टिगत संसाधनों की कमी अब किसी प्रकार आड़े नहीं आ रही है।

शनिवार को ब्लैक फंगस केस में 6 मरीजों की सर्जरी की गई है। वहीं 10 केस में ऑपरेशन इन वेटिंग है। लेकिन इंजेक्शन की उपलब्धता पर शनिवार को पीजीआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। फिलहाल पीजीआई में 156 ब्लैक फंगस के मरीज एडमिट हैं। इनमें 95 मरीज ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ ब्लैक फंगस की बीमारी है।

पीजीआई के रिकार्ड के अनुसार मई माह के 29 दिनों में जिले में पीजीआई सहित निजी अस्पतालों में औसतन 150 ब्लैक फंगस के मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। पीजीआई में हाल के सात दिनों में 121 नए मरीज चिह्नित किए गए। चिकित्सकों ने 41 मरीजों की सर्जरी की है। पीजीआई में ब्लैक फंगस से शनिवार को हुई मौतों के अलावा अब तक पांच मरीजों की मौत हाे चुकी है।

ऑपरेशन इन वेटिंग : 10 गंभीर मरीजों को सर्जरी की जरूरत

मई माह में 46 मरीजों में ब्लैक फंगस की पहचान कर सर्जरी की

आईएमए के डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी व वरिष्ठ ईएनटी चिकित्सक डॉ. अजय गर्ग ने बताया कि नाक, कान व गले के रोगों से पीड़ित होकर आने वाले मरीजों में प्राइमरी स्टेज पर ही म्यूकरमाइकोसिस ब्लैक फंगस के मरीज चिह्नित कर त्वरित इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मई माह में 46 मरीजों में ब्लैक फंगस की पहचान करके सर्जरी की गई है। एंटी फंगल मेडिसिन के जरिए इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

एक माह में 60 मरीजों की सर्जरी कर चुके हैं, नए मरीजों की सर्जरी जारी है

प्राइवेट अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. भूषण कथूरिया ने बताया कि एक माह में ब्लैक फंगस के प्राइमरी व गंभीर स्टेज के 60 मरीजों के ऑपरेशन कर चुके हैं। रोहतक सहित प्रदेश भर से आने वाले मरीजों में ब्लैक फंगस की पहचान करके लगातार इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके डायबिटीज मरीजों को शुगर पर कंट्रोल रखना जरूरी है।

एक्सपर्ट व्यू

डॉ. सुनील मुंजाल, ईएनटी स्पेशलिस्ट व पूर्व राज्य सचिव, आईएमए।

को विड की सेकेंड वेव में कोरोना के डबल स्ट्रेन की वजह से ब्लैक फंगस के केस बढ़े हैं। हाल के दिनों में चार मरीजों में ब्लैक फंगस की पहचान करके सर्जरी की गई है। वर्तमान समय में फंगस के मरीजों की पहचान करना बेहद जरूरी है। कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज के दौरान डेक्सामेथासोन, डेक्सोना, मिथाइल प्रेडनिसोलोन, कोर्टिकोस्टेरॉयड स्टेराॅयड दवाएं देकर जान बचाई गई हैं।

क्योंकि एक चिकित्सक के लिए मरीज की लाइफ सेविंग प्राथमिकता होती है। मुख्य तौर पर स्टेराॅयड से सर्वाधिक नुकसान शुगर को होता है।

शुगर अधिक बढ़ जाने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आती हैं। स्टेराॅयड बॉडी इम्युनिटी को कमजोर करता है और शुगर को बढ़ाता है। इसलिए ऐसे शुगर मरीज जिन्हें कोरोना संक्रमण के इलाज में स्टेराॅयड दिए गए हैं, उनमें ब्लैक फंगस मिल रहा है। बचाव के लिए डायबिटीज मरीजों को शुगर पर नियंत्रण करना जरूरी है।

आंकड़ों से जानें ब्लैक फंगस का दायरा

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