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  • 85.9% Children Deprived Of Online Classes In 9 Districts, 58.2% Parents Are Not Getting Phone Calls Due To Financial Weakness

ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम का सर्वे:9 जिलों में ऑनलाइन क्लास से 85.9% बच्चे वंचित, 58.2% अभिभावक आर्थिक कमजोर होने के चलते नहीं दिला रहे फोन

रोहतक10 दिन पहले
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  • हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति ने 9 जिलों में 170 स्वयंसेवकों ने ऑनलाइन शिक्षा सिस्टम पर 1071 अभिभावकों से 40 सवालों पर सर्वे कर जानी राय

हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति ने 16 से 24 अगस्त तक हरियाणा के 9 जिलों, 42 खंडों, 120 गांवों और 47 शहरी कॉलोनियों के 1071 घरों में किए गए ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम का सर्वे कराया है। सर्वे के जरिए पता चला कि सरकारी व निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को बेहतर एजुकेशन देने का राज्य सरकार का दावा झूठा साबित हुआ है। समिति के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार व सचिव सोहन दास ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया है।

समिति के राज्य सहसचिव सुरेश कुमार और डॉ. पवन कुमार की अगुवाई में लगभग 170 स्वयंसेवकों ने सर्वे में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि यह सर्वे रिपोर्ट विख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर ज्यांद्रेज की ओर से तैयार 40 प्रश्नों के जवाब पर आधारित है। सर्वे में पता चला कि 75.4% बच्चे सरकारी स्कूलों में जबकि 24.3% बच्चे निजी स्कूलों में जा रहे हैं। मात्र 0.3% बच्चे ही मदरसों में पढ़ते हैं। केवल 14.1% विद्यार्थी नियमित तौर पर ऑनलाइन कक्षाएं ले पा रहे हैं, जबकि 85.9% छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं लेना कई कारणों से कठिन बना है।

हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने इन वंचित बच्चों के भविष्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि समाज के हाशिए पर पड़े इन तबकों के लिए ऑनलाइन शिक्षा स्कूली शिक्षा का विकल्प कतई नहीं हो सकती। यदि सरकार ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम को अपनाती है तो इससे देश में निश्चित तौर पर एक डिजिटल खाई पैदा हो जाएगी।

अभिभावकों ने जताई चिंता: ऑनलाइन पढ़ाई से खत्म हो रही अध्ययन रुचि

अभिभावकों ने यह भी चिंता जताई की इस पूरे समय में उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई रुचि ही नहीं रही है। लॉकडाउन से पहले हासिल किए गए सीखने के अनिवार्य कौशल भी वे खो चुके हैं। 33.6% अभिभावकों ने कहा कि मध्याह्न भोजन के एवज में उन्हें न तो कोई खाद्यान्न और न ही कोई नकद पैसा मिला है। उन्होंने यह भी चिंता जाहिर की कि उनके बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा न तो पहुंच में हैं। न ही यह कारगर है। अभिभावकों ने सभी स्तर के स्कूल तुरंत खुलने की इच्छा जाहिर की। अधिकांश अभिभावकों ने माना कि केवल अध्यापक ही अच्छी शिक्षा दे सकते हैं। बच्चों के सीखने के लिए क्लासरूम होना बेहद जरूरी है।

सर्वे में शामिल 74.1% बच्चे अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्ग से
उत्तरदाताओं में से 74.1% बच्चे अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से हैं। सर्वे में शामिल उत्तरदाता घरों की आर्थिक प्रोफाइल में 58.2% अभिभावक अकुशल मजदूर हैं, 12.1% अभिभावक कृषि कार्य में, 11.9% अभिभावक स्वरोजगार में और मात्र 11.9% अभिभावक किसी ठेके की नौकरी पर अथवा नियमित नौकरी पर लगे हैं, जबकि 4.9% अभिभावक किसी भी रोजगार के बिना घर पर ही हैं।

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