आतिशबाजी से बहादुरगढ़ में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में:एक्यूआई पहुंचा 400 पार, शहर स्माॅग की चपेट में, आंखों में जलन और सांस लेने में बढ़ी परेशानी

बहादुरगढ़25 दिन पहले
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बहादुरगढ़ में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से दिन में भी वाहनों की लाइट जलती नजर आई। - Dainik Bhaskar
बहादुरगढ़ में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से दिन में भी वाहनों की लाइट जलती नजर आई।
  • जमकर आतिशबाजी व पराली का वातावरण पर असर, पूरे दिन बहादुरगढ़ में छाए रहे बादल

दीपावली के मौके पर बहादुरगढ़ में जमकर हुई आतिशबाजी व खेतों में जलाई जा रही पराली के चलते शुक्रवार को दिन भर बहादुरगढ़ प्रदूषण युक्त बादलों में घिरा रहा। आतिशबाजी की वजह से बहादुरगढ़ में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में पहुंच गया है। पिछले तीन दिन से प्रदूषण का स्तर रेड जोन में पहुंचा हुआ है। दीपावली वाले दिन भी प्रदूषण का सूचकांक बढ़कर एक्यूआई 400 माइक्रोग्राम को पार कर गया है।

इसकी वजह से दीपावली से अगले दिन शुक्रवार को सुबह से ही पूरा बहादुरगढ़ स्माॅग की चपेट में था। इस कारण दिन भर वाहन चालकों व पैदल चलने वालों की लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में सुबह-सुबह दिक्कत हुई। कम तापमान व हवा की गति मंद रहने से प्रदूषक तत्वों का नहीं हा़े सका बिखराव: पराली जलाये जाने से धुएं में तीव्र वृद्धि होने के बीच बहादुरगढ़ पर आतिशबाजी पर सरकार द्वारा लगाये गये प्रतिबंध की जमकर अवहेलना की गई और गुरुवार रात को बहादुरगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों का आसमान धुएं के गुबार से ढंका रहा।

इसके चलते शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेण’’ में पहुंच गया है। बहादुरगढ़ में बढ़ते प्रदूषण के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जो शाम चार बजे 385 था, वह रात आठ बजे तक बढ़कर अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया क्योंकि कम तापमान और हवा की गति मंद रहने के कारण प्रदूषक तत्वों का बिखराव नहीं हो सका और अभी इसकी संभावना भी कम ही है।शहर पर पटाखाें पर पूर्ण रूप से पाबंदी के बावजूद रात 12 बजे तक जलाए पटाखेशहर पर पटाखाें पर पूर्ण रूप से पाबंदी के बावजूद रात 12 बजे तक जलाए पटाखे

प्रदूषण और बढ़ने के आसार
पीएम 2.5 प्रदूषण के स्तर में तेज वृद्धि दर्ज की जा सकती है और एक्यूआई 500 के स्तर को पार कर सकता है। उल्लेखनीय है कि शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’, तथा 401 और 500 के बीच को ‘गंभीर’ माना जाता है। बहादुरगढ़ तेजी से इस आंकड़े की तरफ बढ़ रहा है।

पिछले वर्ष दीपावली पर 22 शिकायतें,इस बार केवल एक
दीपावली पर बहादुरगढ़ में शांति रही गत वर्ष 22 काल हुई थी पर इस बार केवल एक काल हुई वह भी कबाड़े में आग लगने की। आतिशबाजी में कोई कमी नहीं होने के बाद भी बड़ी आग की कॉल प्राप्त नहीं हुई है और लोगों ने इस साल भी जमकर पटाखे फोड़े। प्रतिबंध के बावजूद लोगों को पटाखे जलाते हुए देखा गया जिससे प्रदूषण शहर में और बढ़ गया।

शुक्रवार सुबह-सुबह जब बहादुरगढ़ के लोग नींद से जागे तो रात के पटाखों का सुबह में भयंकर असर आसमां पर दिखाई देने लगा। सुबह चारों तरफ धुआं-धुआं सा नजारा दिखा व पूरा बहादुरगढ़ कोहरे की चादर में लिपटा रहा। सड़कों पर गाड़ियों को कोहरे की वजह से तेज गति से नहीं भाग सकी। बहादुरगढ़ में शहर की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। धड़ल्ले से पटाखे जलाने के चलते रात नौ बजे के बाद दिल्ली में एक्यूआई 440 को पार कर गया था। जो कि अति गंभीर श्रेणी में आता है।

इस कारण बहादुरगढ़ व आसपास के कई क्षेत्रों के लोगों ने गले में खराश और आंखों से पानी आने की शिकायतें दिन भर रही। बहादुरगढ़ में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद रात 12 बजे तक पटाखे जलाए जाने के मामले सामने आए। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों, पराली जलाने, पटाखे जलाये जाने और अन्य स्थानीय कारकों के चलते मध्यरात्रि तक ही बहादुरगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘’गंभीर’’ की श्रेणी के करीब पहुंचा है। हवा शांत होने के कारण ही दिनभर 800-900 मीटर के दायरे में दृश्यता प्रभावित रही। इस तरह से प्रदूषण स्तर में पराली जलाने का योगदान बढ़कर 25 प्रतिशत से बढ़ गया है। यह बहादुरगढ़ के मौसम में इस साल में अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
दिवाली पर इस बार कोई घटना नहीं हुई
जिला फायर अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि इस बार दीपावली पर कोई घटना नहीं हुई व दिल्ली से फायर सेवा टिकरी बाॅर्डर से पहुंचना संभव नहीं होने कारण वाहनों को वाया नजफगढ़ की तरफ आना पड़ता।

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