लगातार बढ़ रही ठंड:मिनी चिड़ियाघर में टाइगर व तेंदुओं के बच्चों के लिए लगाए ब्लोअर

रोहतक7 दिन पहले
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मिनी चिड़ियाघर में बंगाल टाइगर के लिए के पिंजरे के चाराें तरफ लगाई चादर। - Dainik Bhaskar
मिनी चिड़ियाघर में बंगाल टाइगर के लिए के पिंजरे के चाराें तरफ लगाई चादर।

लगातार बढ़ती जा रही धुंध-ठिठुरन को देखते हुए दिल्ली रोड पर तिलियार स्थित मिनी चिड़ियाघर में वन्य प्राणियों को सर्दी से बचाने का इंतजाम किया गया है। यहां बंगाल टाइगर सागर व आशा के बच्चों और तेंदुआ पवन-वर्षा व दुर्गा के बच्चों को ठंडक से सुरक्षित रखने के लिए ब्लोअर लगाया गया है। बाड़े की फर्श पर तापमान मेंटेन करने के लिए पराली डाली गई है। जाे कि सर्द रातों में भी उनको सुकून दे सके। इन बच्चों की 24 घंटे निगरानी के लिए जू कीपर लगाए हैं।

हर दिन की रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय भेजी जाती है। हाल में तीन दिन चली बारिश के बाद से ठंडक हर दिन जोर पकड़ती जा रही है। दिनभर कुहरा और आसमान में बादलवाई के चलते वन्य प्राणियों को धूप सेंकने का मौका नहीं मिल रहा है। चिड़ियाघर के शाकाहारी जीवों हिरन व शुतुरमुर्ग के बाड़े में पराली डाली गई है। चारा-पानी का इंतजाम भी उनके लिए बनाए गए शेड में ही कर दिया गया है।

परिंदों को बर्फीली हवा से बचाने के लिए पर्दे लगाए
नई बनाई गई 10 बर्ड एब्री में रखे गए परिंदों को बर्फीली हवा से बचाने के लिए पर्दे लगाए गए हैं। उनके भोजन में भी मौसम के अनुसार बदलाव किया गया है। पक्षियों के लिए विभिन्न प्रकार के फल व अनाज के दाने बाड़े में बिखेरे जाते हैं। जल पक्षियों के बाड़े में पर्याप्त पानी व उनके चारे की भी व्यवस्था की जा रही है। इसी क्रम में मगरमच्छ के बाड़े में भी हाल ही में जन्म लेने वाले उनके बच्चों को देखते हुए छोटी मछलियां व अन्य जीव छोड़े जा रहे हैं। ताकि उनको पर्याप्त और पौष्टिक आहार मिल सके।

परिंदों को बर्फीली हवा से बचाने के लिए पर्दे लगाए
नई बनाई गई 10 बर्ड एब्री में रखे गए परिंदों को बर्फीली हवा से बचाने के लिए पर्दे लगाए गए हैं। उनके भोजन में भी मौसम के अनुसार बदलाव किया गया है। पक्षियों के लिए विभिन्न प्रकार के फल व अनाज के दाने बाड़े में बिखेरे जाते हैं। जल पक्षियों के बाड़े में पर्याप्त पानी व उनके चारे की भी व्यवस्था की जा रही है। इसी क्रम में मगरमच्छ के बाड़े में भी हाल ही में जन्म लेने वाले उनके बच्चों को देखते हुए छोटी मछलियां व अन्य जीव छोड़े जा रहे हैं। ताकि उनको पर्याप्त और पौष्टिक आहार मिल सके।

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