सीबी नॉट मशीन लाएंगे:काेराेना टेस्ट रिपाेर्ट जल्द मिल सकेगी, अब लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा

रोहतक6 महीने पहले
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श्मशान घाट पर कोविड प्रोटोकॉल से शवों का दाह संस्कार करते नगर निगम के कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
श्मशान घाट पर कोविड प्रोटोकॉल से शवों का दाह संस्कार करते नगर निगम के कर्मचारी।
  • कोरोना के सैंपल लेने के बाद कई दिन बाद मिल रही रिपोर्ट

कोरोना के सैंपल लेने के बाद भी कई दिनों में आ रही रिपोर्ट को लेकर अब नई सीबी नॉट मशीन लाने का फैसला लिया है। इसके शुरू होने पर लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोरोना का पता लगाने के लिए सीबी नॉट मशीन आरटी पीसीआर से ज्यादा तेजी से परिणाम बताती है। यह एक समय में 92 सैंपल ले सकती है और 45 मिनट में ही रिपोर्ट बता देती है। जबकि आरटी-पीसीआर कोविड-19 के पुराने मैथ्ड के कारण देरी से आंकड़े देती है।

जिला मजिस्ट्रेट कैप्टन मनोज कुमार ने अपने आदेशों में कहा है कि सीबी नेट मशीन के रूप में वैकल्पिक माध्यम का प्रयोग किया जा सकता है। यह मशीन तेजी से काम करेगी और महामारी में समस्या का एक अच्छा समाधान है। इस मशीन के माध्यम से जल्द जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। जिला मजिस्ट्रेट के अनुसार, लाेगों को राहत देने के लिए जल्द ही नई सीबी नॉट मशीन की व्यवस्था की जा रही है।

एक दिन में 600 तक रिपोर्ट पेंडिंग

बुधवार को जिले में 2164 सैंपल लिए गए। इनमें से 1491 सैंपल की रिपोर्ट पेंडिंग बनी हुई है। यानि रोजाना 600 से 700 सैंपल की रिपोर्ट पेंडिंग रहती है, इसी को लेकर अब प्लानिंग की जा रही है कि मरीजों की रिपोर्ट जल्द से जल्द उपलब्ध करवाई जाए।

अभी 6 दिन रिपाेर्ट के लिए करना पड़ रहा इंतजार

अभी हाल ये है कि सैंपल लेने के बाद 5 से 6 दिन बाद मरीज को पता चलता है कि वह पॉजिटिव है। तब तक कुछ मामलों में मरीज ठीक हो चुका होता है या फिर संक्रमित मरीज कई जगह जा चुका होता है। ऐसे में अब तत्काल मरीज की सैंपल रिपोर्ट का पता लगाने के लिए इस मशीन को पीजीआई में लाया जाएगा।

अतिरिक्त श्मशान घाट के लिए जगह तलाशने के निर्देश, 24 घंटे में शुरू की जाए विद्युत शवदाह मशीन : डीसी

जिला मजिस्ट्रेट कैप्टन मनोज कुमार ने आदेश जारी कर नगर निगम आयुक्त को अतिरिक्त श्मशान घाट चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महामारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसकी वजह से मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। इसलिए एक अतिरिक्त श्मशान घाट को चिह्नित करने की ज़रुरत है। इससे पहले महामारी से मरने वाले मरीजों का अंतिम संस्कार करने के लिए पहले ही दो श्मशान घाट निर्धारित किए जा चुके हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेशों में यह भी कहा है कि 24 घंटे के भीतर विद्युत संचालित शवदाह गृह को भी संचालित किया जाए।

अधिकतम मात्रा में लकड़ियां स्टोर करने के आदेश

कैप्टन मनोज कुमार ने आदेश जारी कर जिला वन अधिकारी अथवा महाप्रबंधक हरियाणा वन विकास निगम को अधिकतम मात्रा में लकड़ियों को स्टोर करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि लकड़ियों की नीलामी ना की जाए। इस बार की लहर में कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या अधिक है। मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। महामारी से मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।

इसके मद्देनजर कोविड-19 प्रोटोकोल के अनुसार मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त मात्रा में लकडियां उपलब्ध रहनी चाहिए। जिला वन अधिकारी को मांग के आधार पर लकड़ियां नगर निगम आयुक्त को उपलब्ध करवानी होगी। इन आदेशों की अनुपालन करने में विफल रहने पर हरियाणा वन विकास निगम रोहतक के जिला वन अधिकारी अथवा महाप्रबंधक के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 तक दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।

कब तक छिपाएंगे आंकड़े : फिर 6 मौत, संस्कार 42 के किए

कोरोना से होने वाली मौतों पर सीएम मनोहर लाल की ओर से अपने बयान पर दिए स्पष्टीकरण के बाद भी अधिकारी सचेत नहीं हो पाए हैं। अब भी आंकड़ों का मैनेजमेंट जारी है। जिले में हो रही मौतों का आंकड़ा अभी भी छिपाया जा रहा है। इसे लेकर सभी चुप्पी साधे हुए हैं। जिले में बुधवार को सरकारी बुलेटिन में छह मौत दर्शाई गई है, जबकि श्मशान घाट के 42 कुंडों में जलती चिताएं इस बात की गवाही दे रही हैं कि जिले में कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बताने का दवा ठोंकने वाले एक ही दिन में 42 मौतों की जवाबदेही देने से बच रहे हैं। मरने वालों के परिजन इसलिए खामोश हैं कि आखिर जब उनका अपना बचा ही नहीं तो वे किसके लिए शोर मचाएं, लेकिन जरूरत है आवाज उठाने की, ताकि कोरोना का इलाज ले रहे मरीजों की जान बचाई जा सकें और इन स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारू किया जा सके।

मरीजों के तीमारदारों की व्यथा

शिफ्टिंग के लिए नहीं आई एंबुलेंस

वहीं सोनीपत की 47 वर्षीय को तीन दिन पहले दिल्ली से पीजीआई के मनोरोग विभाग में भर्ती करवाया गया है। हालात नाजुक हैं। जो एंबुलेंस छोड़ने आई थी, उसी का ऑक्सीजन सिलेंडर लगवाया था। यहां पर हालात ऐसे हैं कि कोई मरीज का हाल पूछने भी नहीं आता। इसे गंभीर हालत होने के कारण ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया जाना है, लेकिन फोन करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची।

बाहर से इंजेक्शन मंगवाने पड़ रहे हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर भी कोई लीक है तो किसी में प्रेशर कम है। यहां तक कि ऑक्सीजन मास्क भी फट गया। इतने दुखी हो चुके हैं कि ऐसे इलाज से बेहतर हैं कि ये जहर देकर हमारी जान ही ले लें।

दोपहर में लगाना था टीका, रात तक इंतजार

पटवापुर से मरीज सुनील के भाई सुमित ने बताया कि उनके भाई को इलाज दिलाने के लिए पीजीआई के ट्रामा सेंटर में दो दिन पहले भर्ती करवाया गया है, लेकिन पहले तो स्ट्रेचर पर ही डेढ़ दिन बिताना पड़ा। यहां पर हालात ऐसे हैं कि बिना सिफारिश के दवा भी नहीं दी जाती।

बाहर से महंगे इंजेक्शन खरीदकर लाने पड़ रहे हैं। सिटी स्कैन करवाने पर पता चला था कि 95 फीसदी फेफड़े खत्म हो चुके हैं, लेकिन अब तक वेंटिलेटर तक मुहैया नहीं करवाया। स्टाफ नर्स ने दोपहर पहले इंजेक्शन बाजार से लाने के लिए बोला। इंजेक्शन लाने के बाद रात तक लगाया ही नहीं। लगातार भाई की हालत बिगड़ती जा रही है। कोई सुनने वाला भी नहीं है।

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