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बैंक ऑफ बड़ौदा में फ्रॉड (एफडी) डिपोजिट की पूरी कहानी:चीफ मैनेजर ले उड़ा 11 करोड़ रुपए; साथी स्टाफ को भरोसा देता-पर्सनल केस है, क्लीयर करो

राेहतक16 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

दिल्ली की सीबीआई टीम ने मंगलवार को रोहतक में दस्तक दी है। 8 सदस्यीय टीम ने शहर के नारायणा कॉम्प्लेक्स में बैंक ऑफ बड़ौदा में कई घंटे तक दस्तावेज खंगाले हैं। सीबीआई बैंक की इस ब्रांच में कार्यरत रहे चीफ मैनेजर मंजीत सिंह पर लगे साढ़े 11 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की जांच करने पहुंची थी। चीफ मैनेजर मंजीत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बैंक में अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के 5 एफडी अकाउंट में विभिन्न जिलों के 163 एफडी खातों पर जालसाजी कर साढ़े 11 करोड़ रुपए का लोन ले लिया।

जिन खातों में लोन की रकम ट्रांसफर की गई वो फर्जी ढंग से खोले गए थे। बाद में इन खातों से ये रकम निकाल ली गई। फरवरी में मंजीत सिंह, उनकी पत्नी निशा, रिश्तेदार सोमबीर, कपूर सिंह, सुनीता और ओमबीर सिंह के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। अब इस फर्जीवाड़े की सारी परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। जांच में ये सामने आया है कि चीफ मैनेजर मंजीत सिंह ने बैंक स्टाफ को धोखे में लेकर इस फर्जीवाड़े की सारी कहानी रची। स्टाफ को फर्जी अकाउंट खुलवाने से लेकर गलत ढंग से लोन ट्रांसफर करते गुमराह कर कहता- मेरा पर्सनल केस है क्लीयर कर दो। स्टाफ दस्तावेजों की गड़बड़ी इसी भरोसे पर नहीं पकड़ पाया। चीफ मैनेजर साढ़े 11 करोड़ पर हाथ साफ कर गया।

सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम ने नारायणा कॉम्प्लेक्स ब्रांच में 4 घंटे की जांच

सीबीआई बैंक ऑफ बड़ौदा की रोहतक ब्रांच में हुए इस साढ़े 11 करोड़ के फ्रॉड डिपोजिट मामले में 24 फरवरी को एफआईआर दर्ज कर चुकी है। लेकिन बैंक प्रबंधन ने अपने स्तर पर ही इसकी इंटरनल जांच पूरी कर ली थी। इसमें सामने आया है कि चीफ मैनेजर मंजीत सिंह ने गोहाना ब्रांच से ट्रांसफर होने के बाद ही ये खेल शुरू कर दिया था। बैंक की 2 महिला बिजनेस एसोसिएट से उसने अपनी पत्नी का 25 हजार रुपए का एफडी अकाउंट खुलवाया। दोनों कर्मियों को भरोसा दिया पर्सनल केस है। दोनों को कागज तक नहीं जांचने दिए। ऐसे ही अपने रिश्तेदारों समेत सभी 5 फर्जी अकाउंट में 163 लोगों की एफडी पर 11 करोड़ का लोन लिया तब राशि ट्रांसफर करने वाले कर्मी के साथ उसे झांसा देकर किया।

39 लाख रुपए खुद के अकाउंट में भी किए ट्रांसफर, फर्जी खाते अब खाली
घोटाले की जांच में ये सामने आया है कि आरोपी मंजीत सिंह ने एक उपभोक्ता की एफडी पर लोन ओवर ड्राफ्ट अगेंस्ट बैंक ऑन डिपोजिट यानि ओडीबीओडी से 39 लाख रुपए अपने आईसीआईसीआई खाते में ट्रांसफर किए थे। वहीं उसके खुलवाए सभी फर्जी खाते अब खाली हैं।

प्रबंधन की जांच में स्टाफ को क्लीन चिट, सीबीआई फिर खंगालेगी तार
बैंक प्रबंधन की ओर से इस फर्जीवाड़े की कहानी में अभी तक चीफ मैनेजर मंजीत सिंह ही आरोपी है। इंटरनल जांच में दूसरे स्टाफ को करीबन क्लीन चिट मिल चुकी है। लेकिन सीबीआई अब मामले के सभी तार फिर से छेड़ रही है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार हर पहलू और शख्स को फिर से जांच में शामिल किया जाएगा।

खाताधारक एफडी कैश कराने पहुंचा तो खुला भेद
जिन लोगों के खातों की एफडी पर आरोपी चीफ मैनेजर ने लोन लेकर फर्जीवाड़ा किया है। उनमें से एक एफडी 2.27 करोड़ रुपए की थी। जनवरी 2021 में इस एफडी का समय पूरा हो रहा था। अकाउंट होल्डर ने अपनी एफडी कैश का क्लेम किया तो पता चला कि उसकी एफडी पर थर्ड पार्टी निशा रानी के नाम 90 फीसदी पैसा लोन की गारंटी के तौर पर जारी हो चुका है। अकाउंट होल्डर ने इसकी शिकायत की। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के हिसार और करनाल रीजनल के स्तर पर मामले की जांच शुरू हुई। जांच के दौरान जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे उनके दस्तावेज ही पूरे नहीं मिले। पूछताछ में मंजीत सिंह की भूमिका सामने आई।

दायरा बड़ा होने का अंदेशा; बैंक प्रबंधन ने सीधे सीबीआई हेड क्वार्टर को भेजी थी शिकायत

फरवरी 2020 में बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस मामले में चीफ मैनेजर मंजीत सिंह के इस कारनामे की इंटरनल जांच कर इसकी शिकायत सीधे दिल्ली सीबीआई को दी थी। सीबीआई ने 24 फरवरी को इस मामले में मंजीत सिंह और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसमें शिकायतकर्ता बैंक ऑफ बड़ौदा के करनाल रीजनल हेड सत्यप्रकाश और हिसार रीजनल के हेड प्रवीन कुमार हैं। फिर सीबीआई जांच के दौरान 4 आरोपी खाताधारकों के नाम सामने आए। सूत्रों के अनुसार घोटाला राशि का ये दायरा बड़ा हो सकता है।

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