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असुविधा:कोरोना ने ले ली थी जान, प्रमाण पत्र के लिए 6 माह से पीजीआई में चक्कर काट रहे परिजन

रोहतकएक महीने पहलेलेखक: विवेक मिश्र
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राेहतक.पीजीआई में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते हुए लाेग। - Dainik Bhaskar
राेहतक.पीजीआई में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते हुए लाेग।
  • महामारी में अपनों को खोने वाले परिजनों की तकलीफ को और बढ़ा रहा प्रशासन

एक साल के अंतराल में पीजीआई में प्रदेश के विभिन्न जिलों से कोरोना संक्रमण के शिकार होकर आए 400 से ज्यादा मरीजों की मौत हाे चुकी है। इनमें 161 मृतक रोहतक जिले के शामिल हैं। कोरोना महामारी में अपनों को खो चुके परिजन अब उनकी मृत्यु का प्रमाण पाने के लिए पीजीआई के चक्कर काट रहे हैं। छह से आठ माह बीतने के बाद भी कोरोना मृतकों की मृत्यु का प्रमाण परिजनाें काे नहीं मिल पाया है।

अब इसे सिस्टम की खामी कहेंगे कि जन्म-मृत्यु शाखा में कार्यरत कर्मचारी आवेदक को सही जानकारी देने की बजाय उन्हें कागजी कार्रवाई में उलझाए हुए हैं। निराश हो चुके परिजन अपनों की मृत्यु का प्रमाण पाने के लिए सीएम विंडो पर शिकायत लगा रहे हैं। तो कोई सही जानकारी पाने के लिए आरटीआई का सहारा ले रहा है। पीजीआई प्रशासन के अधिकारी कोरोना मृतकों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में महीनों लगा रहा है। ऐसे में परिजनों की परेशानी बढ़ी हुई है। परिजनों ने भास्कर संवाददाता से कुछ यूं दर्द बयां किया।

कोरोना काल में कोविड मरीजों की फाइल को सेनिटाइज कराने के साथ ही अन्य कई प्रक्रिया से निकाला जाता था। इसकी वजह से मेडिकल रिकॉर्ड रूम तक फाइल पहुंचने में देरी हो जाती थी। आदेश पत्र जारी कर सभी विभागों के हेड से कोरोना मृतकों की फाइल जमा कराने के लिए कहा है।

अधिकांश कोरोना मृतकों के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। जिन मृतकों के प्रमाणपत्र नहीं जारी हो पाए हैं। प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी मृतकों के डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाएं। ताकि परिजनों को परेशान न होना पड़े।
-डॉ. पुष्पा दहिया, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, पीजीआई, रोहतक।

पीजीआई प्रशासन को समाधान करना चाहिए

पीजीआई में कोविड मरीजों के इलाज के दौरान मौत होने के बाद समय पर डेथ सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया पीजीआई प्रशासन को समय पर पूरी करनी चाहिए। ताकि मृतकों के परिजनों को परेशान न होना पड़े। मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में क्यों देर हो रही है, इस बारे में पीजीआई के अधिकारी ही बता सकेंगे।
-डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन, रोहतक।

परिजनों के इस दर्द से जानिए किस प्रकार पीजीआई की व्यवस्था दे रही टीस

केस 1 : छह माह तक चक्कर काटने के बाद मिला मृत्यु का प्रमाण, उसमें भी नाम गलत चढ़ा मिला
भाली गांव निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर पीजीआई में भर्ती हुईं और कोविड आईसीयू में इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2020 को उनकी मौत हुई। परिजन अरुण ने बताया कि कागजों में दादी के पति का नाम गलत चढ़ा दिया।

दादी का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पीजीआई के कई चक्कर काटे। तब जाकर मृत्यु का प्रमाणपत्र मिल सका। जब प्रमाणपत्र मिला तो उसमें दादा का नाम गलत लिखा मिला। अब गलत डेथ सर्टिफिकेट मिलने के बाद उसे बैंक में लगा नहीं सकते। पोस्ट आफिस में दादी के करीब एक लाख रुपए जमा है और वो बिना सही मृत्यु प्रमाणपत्र लगाए निकल नहीं सकते हैं। नाम सही कराने के लिए पीजीआई के कई चक्कर लगा चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हो सका है।

केस 2 : छह माह बाद भी नहीं जारी हो पाया सर्टिफिकेट जसबीर काॅलोनी निवासी 81 वर्षीय बुजुर्ग श्रमिक थे। अक्टूबर माह में कोरोना की चपेट में आने के बाद पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हुई थी। करनाल में रह रहे परिजन ने बताया कि छह माह बीतने को हैं और अभी तक बुजुर्ग मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। मृत्यु प्रमाणपत्र न मिलने से परिजनों को चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

केस 3 : कागजों पर पिता का नाम गलत चढ़ा दिया, पांच माह तक चक्कर लगाते रहे : महम निवासी बुजुर्ग महिला की पीजीआई में आठ नवंबर को कोविड से मौत हुई थी। बेटे मुकेश ने बताया कि मां की फाइल में पति का नाम सही लिखा था। लेकिन जन्म-मृत्यु शाखा में कागजों पर पति का नाम गलत चढ़ा दिया। पांच माह तक चक्कर काटने के बाद कागजों में उलझाए रहे।

10 से 12 बार चक्कर काटने के बाद नाम सही करा पाए। पीजीआई प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा चक्कर काटकर परेशान होते हुए भुगतना पड़ा। बेटे मुकेश ने बताया कि काफी जद्दोजहद करने के बाद अभी चार दिन पहले ही मृत्यु प्रमाणपत्र मिला है। अब प्रमाणपत्र मिलने के बाद मां के बैंक खाते में आ रही विधवा पेंशन को बंद करने के लिए आवेदन करेंगे।

केस 4 : तीन माह से चक्कर काट रही हूं, अब तक नहीं मिला मौत का प्रमाण : हांसी निवासी सीता ने बताया कि पति राकेश की 27 दिसंबर 2020 को पीजीआई में कोविड से मौत हुई थी। पेशे से श्रमिक राकेश की मौत के बाद घर की आजीविका चलाने वाला कोई नही है।

एक तीन साल और दूसरा आठ माह का बच्चा है। पति का मृत्यु प्रमाणपत्र पाने के लिए तीन माह से चक्कर लगा रही हूं। लेकिन पीजीआई मे स्थित जन्म-मृत्यु शाखा के कर्मचारी तमाम तरह के कागजी कार्रवाई में उलझाए हुए हैं। हांसी से छोटे बच्चे को लेकर किराया खर्च कर आती हूं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पति की मृत्यु का प्रमाण पाने के लिए अब निराश हो चुकी हूं।

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