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दर्दनाक हादसा:खाना बनाते सिलेंडर हुआ लीक, झुग्गियों में लगी आग; खेल रहे 4 बच्चों समेत 7 झुलसे

रोहतक18 दिन पहले
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पीजीआई के ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन बच्चे। - Dainik Bhaskar
पीजीआई के ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन बच्चे।
  • आईएमटी एरिया के पास बोहर गढ़ी रोड पर रात 8 बजे हादसा, लोगों के प्रयास से बुझी आग
  • हादसे का शिकार बने परिवार कूड़ा बीनने का करते हैं काम

शहर के गढ़ी बोहर के पास झुग्गियों में सोमवार रात करीब 8 बजे हादसा हो गया। एक झोपड़ी में खाना बनाते सिलेंडर से लीक हुई आग की चपेट में आकर 2 माह की दुधमुंही बच्ची समेत 7 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें बच्ची समेत 4 बच्चे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सिलेंडर लीकेज के बाद आग भड़कने से झोपड़ी में आग लग गई। हादसे में जो आग से झुलसे हैं उनमें 2 महीने की नजमा खातूनर, 22 वर्षीय हफीजा, 2 वर्ष का अली, 3 वर्षीय हाफिज, 4 वर्षीय कादिजा, 23 वर्षीय मरजीना व उमर अली शामिल हैं। इन सभी को उपचार के लिए पीजीआई के ट्रामा सेंटर में दाखिल कराया गया है।

हादसा बोहर गांव की ओर से जाने गढ़ी गांव की ओर जाने वाले रोड की झुग्गियों में हुआ। इन झुग्गियों में कूड़ा बीनने वालों के परिवार रह रहे हैं। हादसे के बाद झुग्गियों में रह रहे लोगों में भगदड़ मच गई। गढ़ी गांव के लोग शोर शराब सुनकर मौके पर पहुंचे। दमकल के पहुंचने से पहले ही लोगों ने आग पर पानी की बाल्टियां डाल उसे बुझाया। इससे पहले मुश्किल से झोपड़ियों से महिलाओं को बच्चों को बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि जो सिलेंडर लीक हुआ वो छोटू सिलेंडर था। अगर बड़ा सिलेंडर होता तो आग का हादसा विकराल हो सकता था। वहीं पुलिस की एक टीम ने भी सूचना मिलने के बाद रात को ही घटनास्थल का मुआयना किया और घायलों व उनके परिवार के बारे में जानकारी जुटाई।

भागते समय बेटी गोद से गिर गई, मुश्किल से उसे आग से निकाला

हादसे में झुलसी हाफीजा ने बताया कि जावेदा की झोपड़ी में जब सिलेंडर से आग भड़की तो मैं उसकी झोपड़ी के बाहर ही अपनी 2 माह की बेटी को गोद में लेकर बैठी थी। आग की लपटें बाहर तक आई तो उठकर भागने लगी। इसी बीच गोद में ली 2 माह की नजमा उसके हाथ से छूट गई। वो जमीन पर गिरी तो लपटों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। उसे बड़ी मुश्किल से लपटों से निकाला। लेकिन तब तब बच्ची काफी झुलस गई थी

खाना बना रही थी आग भड़की तो पास लेटा हुआ बेटा लपटों में घिर गया

-जैसा की जावेदा ने भास्कर को बताया
मैं रात करीब 8 बजे छोटे सिलेंडर पर अपनी झोपड़ी में खाना बना रही थी। सिलेंडर के ऊपर ही चूल्हे पर भात चढ़ा रखा था। 2 साल का बेटे अली को मैंने पास में ही जमीन पर कपड़ा बिछा लेटा रखा था। मैंने जैसे ही भात के बर्तन का ढक्कन हटाया। जो से आग का भभका उठा। बेटा अली और मैं उसकी चपेट में आकर झुलस गए। सिलेंडर से लपट उठती रही तो झोपड़ी में भी आग लग गई। बाहर तक लपटें गई।

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