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प्लाज्मा की जरूरत:कोरोना मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी देने में आ रहीं मुश्किलें, रिकवर मरीजों का बना रहे डेटा बैंक

राेहतकएक महीने पहले
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  • पीजीआई में 9 माह में अब तक 180 कोरोना मरीजों को चढ़ा प्लाज्मा, 170 के रिकवर होने का दावा

पीजीआई में भर्ती 350 से ज्यादा कोरोना मरीजों में से ए, ओ, एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के 10 फीसदी मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ रही है। तीन माह से ए पॉजिटिव ग्रुप का एक भी डोनर नहीं मिला है। इन तीनों ब्लड ग्रुप के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने के लिए पीजीआई के ब्लड बैंक में डिमांड बढ़ गई है और स्टॉक सीमित है। गंभीर मरीज को जरूरत पड़ने पर ही चिकित्सक प्लाज्मा यूनिट उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेजते हैं।

ब्लड बैंक प्रशासन ने शहर की समाजसेवी संस्थाओं से मदद लेनी शुरू कर दी है। वहीं, पीजीआई में कोरोना संक्रमण का इलाज कराकर रिकवर हो चुके 170 मरीजों का डाटा बैंक बनाया जा रहा है। पीजीआई प्रशासन ने कोरोना से स्वस्थ हो चुके लोगों से आगे आकर प्लाज्मा दान करने की पहल करने की अपील की है।

मॉडल ब्लड बैंक में पिछले 9 माह के अंतराल में कोरोना से रिकवर कर चुके 100 से ज्यादा लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ चुके हैं। 180 कोरोना मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जा चुका है। चिकित्सकों की ओर से औसतन 170 मरीजों के रिकवर होने का दावा किया जा रहा है।

काेराेना से ठीक हाेने वाले मरीज 28 दिन बाद कर सकते हैं प्लाज्मा का दान

ब्लड बैंक अधिकारी ने बताया कि एक डोनर से दो यूनिट प्लाज्मा तैयार किया जाता है। कोरोना से रिकवर हो चुके मरीज 28 दिन में पहली बार व 15 दिन के के अंतराल के बाद दूसरी बार प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ सकते हैं। प्लाज्मा लेने से स्वस्थ हो चुके मरीज की स्क्रीनिंग की जाती है। स्क्रीनिंग में स्क्रीनिंग में संबंधित व्यक्ति का हीमोग्राम, वायरल मार्कर में पांच टेस्ट, एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है।

यदि संबंधित व्यक्ति में एंटीबाॅडी बने होते हैं तभी उसका प्लाज्मा दान की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। एक व्यक्ति के शरीर में औसतन छह लीटर तक ब्लड होता है जिसमें कुल रक्त का 55 फीसदी प्लाज्मा होता है। इसलिए युवाओं को दो यूनिट प्लाज्मा देने के लिए आगे आना चाहिए ताकि उनकी ओर से किए गए प्लाज्मा दान से संक्रमित मरीज को नई जिंदगी दी जा सकती है।

बी पॉजिटिव ग्रुप को छोड़ 3 ब्लड ग्रुप का प्लाजमा नहीं मिल पा रहा है

संक्रमित मरीजों के केस में तेजी से इजाफा होने के साथ गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी देने के लिए चिकित्सकों की ओर से डिमांड आ रही है। बी पॉजिटिव ग्रुप को छोड़कर ए, ओ, एबी पॉजीटिव ब्लड ग्रुप का प्लाज्मा नहीं मिल पा रह है। इन तीन ग्रुप के प्लाज्मा जुटाने में परेशानी आ रही है। शहर में रक्तदान शिविर लगाने वाले संचालक प्लाज्मा एकत्रित करने के लिए आगे आए हैं। -डॉ. गजेंद्र सिंह, प्रभारी, मॉडल ब्लड बैंक, पीजीEई, रोहतक।

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