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तीसरी लहर का डर:मेंबरशिप की बजाय मंथली पेमेंट देकर कर रहे योग, योगा के प्रति रुझान बढ़ा, लेकिन भीड़ से बच रहे लोग

रोहतकएक महीने पहले
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पार्क में योगा अभ्यास करते शहरवासी। - Dainik Bhaskar
पार्क में योगा अभ्यास करते शहरवासी।
  • 60% ऑनलाइन योग को तरजीह देने वाले लोग, बच्चे भी अपना रहे

कोरोना के बाद देश की आबादी का करीब 15 से 20 फीसदी हिस्सा भले ही योग को महत्व देने लगा हो, लेकिन अभी भी लोग भीड़ का हिस्सा बनने से बच रहे हैं।

योग एक्सपर्ट के मुताबिक, योग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है, लेकिन ऑफलाइन क्लास अभी भी कोरोना से पहले के मुकाबले 50 फीसदी ही लोग ले रहे हैं। बल्कि इससे अधिक ऑनलाइन क्लासेस से जुड़ रहे हैं। इसका फायदा ये भी हुआ है कि ऑनलाइन क्लासेस के जरिए देश-विदेश से स्टूडेंट्स जुड़ रहे हैं, जबकि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच योगा और जिम मेंबर्स एनुअल पेमेंट को इग्नोर करके मंथली पेमेंट कर रहे हैं, ताकि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें और उनके पैसों की भी बचत हो सके।

योग सीख चुके लोग अब स्वस्थ रहने के लिए पार्क या घर पर ही कर रहे अभ्यास

योग एक्सपर्ट रोशनी हुड्डा बताती हैं कि तीसरी लहर का डर लोगों में अभी से दिखने लगा है। पहले लोग एक साल की मेंबरशिप लेते थे, लेकिन अब एक महीने से ज्यादा पेमेंट एक साथ नहीं कर रहे हैं। वहीं, जिन लोगों ने योगासन सीख लिए हैं, उन्होंने पार्क या घर पर योग का अभ्यास करना शुरू कर दिया है। योग का वर्णन सर्वप्रथम वेदों में मिलता है, लेकिन मौजूदा हालात में योग की प्रसिद्धि में हांगकांग, मलेशिया और वियतनाम टॉप थ्री देशों में शुमार हैं, जहां पूरी दुनिया से योग ट्रेनर जाने की इच्छा रखते हैं। इसका कारण वहां की सरकार का सपोर्ट, अच्छी आमदनी और योग कल्चर है।

कोरोना में बंद सेंटर फिर से हुए शुरू

कोरोना में बंद सेंटर एक बार फिर से शुरू हो चुके हैं। कोरोना की तीसरी लहर का डर इतना है कि अभिभावक बच्चों से भी योग करवा रहे हैं। योग करने वाले बच्चों की संख्या पहले के मुकाबले 30 से 40 फीसदी बढ़ी है। ट्रेनर ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन सेशन के जरिए भी बच्चों को योग की अहमियत और गुर सीखा रहे हैं।

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