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अधूरा इलाज, खतरे में जान:मुंह-नाक की सर्जरी के बाद भी ब्रेन तक पहुंचा फंगस, ऑपरेशन कर निकालने पड़ रहे दिमाग के कुछ हिस्से

रोहतकएक महीने पहलेलेखक: रत्न पंवार
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कोरोना वायरस के जिस तरह से नए वैरिएंट आ रहे हैं, उसी तरह ब्लैक फंगस के भी हैरान करने वाले मामले सामने आने लगे हैं। मुंह-नाक से होते हुए फंगस ब्रेन तक मार कर रहा है। बड़ी चिंता यह है कि फंगस उन लोगों में दोबारा बढ़ रहा है जिनके ऑपरेशन हो चुके हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि रोजाना पूरे जिले में ऐसे 10 से 12 मरीज आ रहे हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक इन केसों के बढ़ने के दो कारण मुख्य हैं। पहला- ऐसी आशंका है कि मुंह, नाक या जबड़ा जिसकी भी सर्जरी हुई, उसमें से ब्लैक फंगस को पूरी तरह से नहीं निकाला गया। दूसरा-सर्जरी के बाद या तो मरीजों को एम्फोटिर्सिन-बी के पूरे इंजेक्शन नहीं लगे। या दवा का कोर्स पूरा नहीं हो पाया।

फिलहाल ऐसे मरीजों को बचाने के लिए अब भी सर्जरी ही विकल्प है। इसलिए ऑपरेशन के दौरान ब्रेन स्टेम, पैडरेस के कुछ पार्ट निकालने पड़ रहे हैं। राहत की बात यह है कि समय रहते सर्जरी होने के बाद ऐसे मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। बस लगातार जांच करानी जरूरी है।

सर्जरी संभव, अफवाह में न रहें

दिमाग के किन हिस्सों में पहुंच रहा है फंगस? -ब्रेन स्टेम, पैडरेस पार्ट तक। जोकि काफी क्रिटिकल एरिया होता है।

पहले दिमाग में फंगस जाने पर सर्जरी क्याें नहीं होती थी? -यह केवल अफवाह थी। दिमाग में फंगस जाने पर भी सर्जरी की जा सकती है। अब भी हो रही है।

केस बिगड़ने के क्या कारण सामने आ रहे हैं? -बिगड़े केसों में या तो फंगस पूरी तरह नहीं निकाला, या टीके कम लगे।

सर्जरी के बाद मरीजों के लिए क्या सबसे जरूरी है? -एम्फोटिर्सिन-बी 3-5 एमजी प्रति किग्रा के वजन के अनुसार रोज सर्जरी के बाद 10-14 दिन देना हाेता है।

डॉ. अमित लाम्बा, एमसीएच न्यूरोसर्जन, रोहतक, डॉ. भूषण कथूरिया, ईएनटी एवं हेड एंड नेक कैंसर सर्जन, रोहतक

4 किस्सों से जानिए पीड़ा...डेढ़ माह रहा सिर दर्द, एमआरआई में फिर मिला फंगस

  • लाढ़ौत के 42 वर्षीय मरीज ने बड़े चिकित्सा संस्थान में 17 मई से ब्लैक फंगस का इलाज शुरू कराया था। नाक के साइनस में ही ब्लैक फंगस था। कम इंजेक्शन और अधूरे इलाज के कारण अब डेढ़ महीने बाद भी सिर में दर्द था। गंभीर सिर दर्द की समस्या लेकर आए मरीज का एमआरआई करवाया गया तो पता चला कि ब्लैक फंगस दिमाग तक पहुंच चुका था।
  • गोहाना के 48 वर्षीय व्यक्ति का ब्लैक फंगस का इलाज पूरा हो चुका था। सिर दर्द होने लगा तो एमआरआई के बाद ब्लैक फंगस को दिमाग के फ्रंटल एरिया में दिखा। सर्जरी की गई। इस दौरान फ्रंटल एरिया का कुछ हिस्सा फंगस के कारण डैमेज हो चुका था। इससे निकालना पड़ा। फ्रंटल एरिया समाज में आप कैसा व्यवहार करते हैं, यह निर्णय लेने में मदद करता है।
  • फतेहाबाद के 45 वर्षीय व्यक्ति की नाक में ब्लैक फंगस को लेकर एक महीना पहले ऑपरेशन किया गया। करीब 10 दिन दवा चली। इसके बाद टेबलेट पर लेकर आए। इसके बाद एक महीने बाद ही दांत ढीले हो गए। एमआरआई करवाया तो जबड़े में फंगस मिला। अब सवा महीने बाद दोबारा ऑपरेशन कर जबड़ा निकाला गया और फंगस को पूरी तरह से हटाया गया।
  • भिवानी के 74 वर्षीय बुजुर्ग के नाक में ब्लैक फंगस बना था, लेकिन इससे पहले किडनी का भी इलाज चल रहा था। इसलिए इंजेक्शन नहीं दे सकते थे, दवाओं पर ही रखा गया। दिल्ली के अस्पताल में महीनेभर दवा चलने के बाद समस्या हल नहीं हुई। चार स्कैन करने के बाद भी नार्मल ही निकला। सिरदर्द की समस्या आने लगी तो जांच में पता चला कि नाक और ब्रेन को जोड़ने वाली हड्डी में ब्लैक फंगस पहुंच चुका था।

ये करें इलाज ले चुके मरीज

  • नाक और मुंह के एरिया की सफाई रखें।
  • ब्लड शुगर को कंट्रोल रखें।
  • इम्युनिटी को मजबूत रखने के लिए उपाय करें।
  • लक्षण आने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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