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अभय चौटाला का अजीबो-गरीब बयान:‘काेराेना भी सरकार की कहीं ना कहीं गेम प्लानिंग’

रोहतकएक महीने पहले
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मकड़ौली टाेल पर इनेलाे नेता अभय चाैटाला से बातचीत करते किसान नेता अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान। - Dainik Bhaskar
मकड़ौली टाेल पर इनेलाे नेता अभय चाैटाला से बातचीत करते किसान नेता अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान।
  • मकड़ौली टोल प्लाजा पर किसानों के बीच पहुंचे इनेलो नेता

इनेलो नेता अभय चाैटाला ने कहा कि ऐसे लाेग जिन्होंने कभी आंदोलन नहीं किया, सिर्फ षडयंत्र रचे हैं। कहीं हिंदू और मुस्लिम को बांटा है तो कहीं पटेल और हिंद के नाम पर राजनीति की है। आज ऐसे लोग ही सत्ता में है। इसलिए आज उन्हें किसान आंदोलनजीवी नजर आते हैं।

चाैटाला ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भी सबसे बड़ी भूमिका किसानों की थी। तब किसान ने यह नहीं देखा था कि इसकी अगुवाई किसके हाथ में है। अन्नदाता की वजह से ही आज देश की आर्थिक हालत ठीक हुई है। इस देश के किसान के बच्चे सर्दी और गर्मी की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा के लिए लड़ता है। कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में ही नुकसान हुआ है। काेराेना भी सरकार की कहीं ना कहीं गेम प्लानिंग है। यहां धरने पर इतने लोग बैठे हैं, लेकिन कोई कोरोना पीड़ित नहीं होता।

इसकी आड़ में कोई गेम चल रही है। इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला मकड़ौली टोल प्लाजा पर किसान आंदोलन के समर्थन में किसानों के बीच पहुंचे। भारतीय किसान यूनियन अंबावता के प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान के नेतृत्व में मकड़ौली टोल प्लाजा पर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर किसानों ने नए तीन कृषि कानूनों की देर शाम प्रतियां जलाकर होली मनाई।

धरने की अध्यक्षता कर रहे भाकियू नेता अनिल नांदल ने कहा कि उनका आंदोलन जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी और एमएसपी रेट तय नहीं करेगी जब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहेगा। इसके साथ-साथ उन्होंने उन नेताओं को भी चेतावनी देते हुए कहा कि जो हाल आज पंजाब में भाजपा नेता का हुआ है और अगर सरकार नहीं मानी तो वही हाल आप हरियाणा में भी जल्द देखेंगे।

सरकार किसान आंदोलन को कुचलने का कितना ही प्रयास कर ले किसान झुकने वाले नहीं

भाकियू नेता अनिल नांदल ने कहा कि सरकार चाहे किसान आंदोलन को कुचलने का कितना ही असफल प्रयास कर ले किसान झुकने वाले नहीं है। क्योंकि यह लड़ाई अब अकेले किसान कि नहीं बल्कि देश के हर वर्ग की बन चुकी है और मैं उन नेताओं को आधा करना चाहता हूं कि या तो वे किसान आंदोलन के समर्थन में आकर इन तीन नए कृषि विरोधी कानूनों को रद्द करवाएं और सभी फसलों पर एमएसपी रेट तय करवाएं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नहीं तो आने वाले समय में ऐसे नेताओं को किसान और कमरे वर्ग के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा और इसकी जिम्मेवारी खुद सरकार व उन नेताओं की होगी। वहीं, किसानों ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जाहिर किया।

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