जिनोम सिक्वेंसिंग की दूसरी रिपोर्ट में खुलासा:47 में से ओमिक्रॉन के 26 केस, डेल्टा का स्कोर 21

रोहतक8 दिन पहलेलेखक: रत्न पंवार
  • कॉपी लिंक
47 में से 26 सैंपल ओमिक्रॉन के मिले हैं और 21 सैंपल डेल्टा वैरिएंट के हैं। - Dainik Bhaskar
47 में से 26 सैंपल ओमिक्रॉन के मिले हैं और 21 सैंपल डेल्टा वैरिएंट के हैं।

जिले में सिर्फ कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही सक्रिय नहीं है, बल्कि ओमिक्रॉन भी दहशत फैला रहा है। यह खुलासा जिनोम सिक्वेंसिंग की नए साल में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट में हुआ है। एमडीयू में प्रदेश सरकार की ओर से करवाई जा रही जिनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट के मुताबिक एमडीयू की सेंट्रल लैब की ओर से नए साल में कोरोना वायरस के सैंपलों की रिपोर्ट बनाकर भी सरकार को भेज दी गई है। विवि में दूसरे सप्ताह में इस रिपोर्ट में 47 सैंपल का आरएनए एमडीयू के पास भेजा गया था।

इनमें से 26 सैंपल ओमिक्रॉन के मिले हैं और 21 सैंपल डेल्टा वैरिएंट के हैं। ऐसे में चिंता बराबर बनी है कि सिर्फ तीसरी लहर में नया वैरिएंट ही एक्टिव नहीं है। बल्कि दूसरी लहर का जानलेवा डेल्टा वैरिएंट भी तेजी से लोगों के फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। वहीं पहली रिपोर्ट में 103 सैंपल की जांच की गई थी। इसमें सैंपल 31 दिसंबर तक के भेजे गए थे और 7 केस ओमिक्रॉन के मिले थे।

वैरिएंट को कमजोर समझने की गलती ना करें आमजन
मेडिकल एक्सपर्ट की मानें तो डेल्टा का वैरिएंट काफी खतरनाक रहा है। दूसरी लहर में इसकी वजह से ही 418 मौतें दर्ज की गई थी। यह सिलसिला फिर से शुरू होता है तो इसे रोकना मुश्किल होगा। अभी तक अधिकतर लोग ओमिक्रॉन को हल्के में लेकर घर पर ही आइसोलेशन में इलाज की बात सोचकर निश्चिंत हो रहे हैं, लेकिन डेल्टा का वैरिएंट इसी तरह से बढ़ता रहा तो इसका संक्रमण रोकना और इससे मौतों को रोक पाना मुश्किल होगा। कारण यह भी है कि शरीर के अंदर लक्षण आने के बाद तुरंत व्यक्ति को नहीं पता होता कि उसमें किस तरह का वैरिएंट एक्टिव है। यह जिनोम सिक्वेंसिंग से ही पता चल पाता है। इसलिए लोगों को बचाव कर बीमारी से लड़ना चाहिए।

खबरें और भी हैं...