रिकाॅर्ड तलब:फर्जी ओपीडी कार्ड पर बुजुर्ग महिला को हार्ट अटैक का मरीज बता वार्ड में भर्ती दिखाया

रोहतक9 महीने पहले
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  • डेढ़ साल तक चली जांच के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा, डीएमएस ने दर्ज कराई एफआईआर
  • फर्जीवाड़े के खेल में कुछ डॉक्टरों की संलिप्तता होने का अंदेशा जता रहे जांच अधिकारी

फर्जी ओपीडी कार्ड पर सोनीपत की बुजुर्ग महिला को हार्ट अटैक का मरीज बताकर शातिरों ने मेडिसिन विभाग की पांच नंबर यूनिट में तीन दिन तक भर्ती रखा। फिर यूनिट हेड की अनुपस्थिति में डिस्चार्ज कार्ड पर स्टैंप व फर्जी साइन करके मरीज को घर ले जाना दिखाया। पुलिस कर्मी मरीज के डिस्चार्ज कार्ड का वेरिफिकेशन कराने पीजीआई के इमरजेंसी विभाग में पहुंचा।

इमरजेंसी विभाग के प्रभारी डीएमएस की ओर से रिकाॅर्ड तलब किए गए तो मेडिसिन विभाग से पता चला कि सोनीपत की बुजुर्ग महिला का कोई इलाज नहीं किया गया। फर्जीवाड़ा होने का अंदेशा होने पर पीजीआईएमएस डायरेक्टर डॉ. रोहतास यादव ने कमेटी गठित कर जांच शुरू कराई।

करीब डेढ़ साल तक चली जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट में संस्थान में फर्जीवाड़ा करने की पुष्टि हुई। जांच अधिकारी फर्जीवाड़े के खेल में चंद डॉक्टरों के शामिल होने का अंदेशा जता रहे हैं। अब इमरजेंसी प्रभारी डीएमएस डॉ. संदीप कुमार की ओर से आरोपियों के खिलाफ पीजीआईएमएस थाना में एफआईआर दर्ज कराई है।

डिस्चार्ज कार्ड पर यूनिट हेड की स्टैंप लगा तीन दिन बाद घर ले जाना दिखाया

पीजीआई की जांच कमेटी के सदस्य बताते हैं कि शिकायत कर्ता यूनिट हेड डॉ. सुधीर अत्री की ओर से दी शिकायत में कहा गया है कि उनकी अनुपस्थिति में फर्जी डिस्चार्ज कार्ड पर उनकी स्टैंप का गलत तरीके से दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी यूनिट में फूलपती महिला नाम की महिला का इलाज नहीं किया गया।

जांच अधिकारियों ने ओपीडी से लेकर यूनिट में ड्यूटी पर मौजूद रहे सीनियर रेजीडेंट, नर्सिंग स्टाफ से भी पूछताछ की, जिसमें सभी ने मरीज के भर्ती न होने के बयान दिए। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब ऐसे में यदि पुलिस गंभीरता से जांच करे तो फर्जीवाड़े के बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है।

अब इन तीन प्वाइंट्स पर जांच होगी

  • समाज कल्याण विभाग से आर्थिक मदद तो नहीं ली गई।
  • आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता होने पर बचाव के लिए ये साजिश तो नहीं रची गई।
  • परिवार के सदस्य को जेल से बाहर लाने के लिए प्रकरण रचा गया।

रिकॉर्ड मिलान में पकड़े पीजीआई के डीएमएस डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि तीन अक्टूबर 2019 काे साेनीपत जिले के पीपली गांव निवासी 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला फूलपती पत्नी रामपत को हार्ट अटैक बताकर सुबह 11:34 बजे इमरजेंसी विभाग में ओपीडी कार्ड बनवाया गया।

चार अक्टूबर की सुबह सवा आठ बजे के करीब मेडिसिन विभाग में यूनिट हेड डॉ. सुधीर अत्री के अंडर में मरीज को वार्ड में छह मार्च तक भर्ती दिखाया गया। शातिरों ने यूनिट हेड की फर्जी स्टैंप लगाकर डिस्चार्ज कार्ड बनवाते हुए मरीज की छुट्‌टी दिखा दी। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मचारी इमरजेंसी विभाग में रिकॉर्ड का सत्यापन कराने के लिए आया था। चिकित्सक ने मरीज के रिकॉर्ड का मिलान करवाया तो मेडिकल रिकॉर्ड डिपार्टमेंट में मरीज के एडमिट होने की पुष्टि नहीं हुई है।

पीजीआई में एक साल पहले पकड़ा गया था फर्जी डॉक्टर

एक साल पहले पीजीआई के एमएस आॅफिस की तरफ डीएमएस डॉ. संदीप कुमार व सीएसओ मेजर नीरज शर्मा ने फर्जी डॉक्टर काे पकड़ा था। फर्जी डॉक्टर बनकर घूमने वाले युवक की पहचान भिवानी के लाजपत नगर निवासी ग्रेजुएट पास पवन के रूप में हुई थी।

आरोपी पवन को अस्पताल परिसर में एप्रेन और गले में स्टेथोस्कोप पहनकर एमएस आफिस की तरफ आने वाले कर्मचारियों और मरीजों के तीमारदारों पर रौब झाड़ते हुए पकड़ा गया था। डीएमएस ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया था।

फर्जी तरीके बीमा क्लेम के रैकेट का कनेक्शन पीजीआई से जुड़ा था

दो साल पहले फर्जी तरीके से बीमा क्लेम करने के रैकेट का कनेक्शन पीजीआई रोहतक से जुड़ा पाया गया था। कैंसर और एचआईवी पीड़ित के परिजनों को बीमा के तौर पर मोटी रकम देने का लालच देकर लाशों का सौदा करने वाले गिरोह ने शुरूआत पीजीआई से ही की थी। एसटीएफ ने दावा किया था कि गिरोह करीब 54 मामलों में लाखों रुपए क्लेम वसूल चुका है। पीजीआई के रिकाॅर्ड रूम और कैंसर वाॅर्ड तक गिरोह के लोगों के कनेक्शन होने की बात सामने आई थी।

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