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1.25 लाख बच्चे जिले में:जिले के सरकारी अस्पतालों में 30 हजार बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ, पीकू वार्ड किसी में नहीं

रोहतक4 महीने पहले
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सिविल अस्पताल में जल्द संसाधन जुटाने होंगे। - Dainik Bhaskar
सिविल अस्पताल में जल्द संसाधन जुटाने होंगे।
  • स्वास्थ्य विभाग के आधे अधूरे इंतजाम तीसरी लहर में बच्चों के इलाज में बन सकते हैं चुनौती
  • प्रदेश के एकमात्र पीजीआई के भरोसे सारी सुविधाएं

कोरोना की तीसरी लहर में आशंका है कि बच्चे इसकी चपेट में आ सकते हैं।सरकारी अस्पतालों में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर वार्ड (पीकू) और पर्याप्त चिकित्सक न होने से मुश्किलें खड़ी हाे सकती हैं। रोहतक में अगर पीजीआई को छोड़ दें तो सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक ही नहीं हैं। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार औसतन 1200 बच्चों पर एक चिकित्सक होना चाहिए।

लेकिन जिले में 0-14 साल तक की उम्र के औसतन 1.25 लाख बच्चों पर महज चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। यानी कि वर्तमान समय में 30 हजार बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। पीजीआई और निजी अस्पतालों के शिशु रोग विशेषज्ञों को शामिल करें तो जिले में करीब 50 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। महम, कलानौर में स्थित सिविल अस्पताल, सांपला, किलोई, काहनौर में स्थित सरकारी अस्पताल में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है।

महम, कलानौर और सांपला, किलोई, काहनौर के सरकारी अस्पताल में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं

पीजीआई: पीकू-नीकू की सुविधा पीडियाट्रिक्स विभाग में न्यूनाटल इंटेंसिव केयर यूनिट (निक्कू) में 45 बेड और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में 8 बेड हैं। वार्ड नंबर 16 बच्चों के वार्ड में 40 बेड हैं। सभी ऑक्सीजन युक्त हैं। यहां पर 12 बाल रोग विशेषज्ञ और चार सीनियर रेजीडेंट्स चिकित्सक हैं। यूएचएस प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को हाल ही में फैकल्टी में सात डॉक्टरों की नई नियुक्तियां करने का प्रस्ताव भेजा है।

सिविल अस्पताल: अभी बेड भी 30 ही जिला मुख्यालय पर स्थित सिविल अस्पताल में स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट एसएनसीयू में 0-28 दिन तक के बच्चों के लिए छह बेड हैं। बच्चों के वार्ड में 18 बेड हैं जिनमें छह ऑक्सीजन बेड हैं। एक वेंटिलेटर है। पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट नहीं है। सिविल सर्जन कार्यालय के पास बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम बीएसएल की 16 एंबुलेंस हैं। इनमें तीन एंबुलेंस सिविल अस्पताल में हैं। अस्पताल में 30 बेड से बढ़ाकर 50 बेड का वार्ड करने की तैयारी चल रही है।

पोस्ट हैं खाली

  • जिला मुख्यालय के सिविल अस्पताल में 4 बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
  • एसएनसीयू के लिए एक पीडियाट्रिक्स और 2 मेडिकल अफसर की पोस्ट खाली हैं।
  • कलानौर सिविल अस्पताल में एसएनसीयू प्रस्तावित है।

सीएस बोले: संसाधनों की डिटेल जुटाई जा रही है

सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि जिले में बच्चों की आबादी, सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जल्द ही अस्पतालों में जरूरी और बेहतर व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी।

एक्सपर्ट व्यू

2 % बच्चों को एडमिट करना पड़ सकता है

8 साल से ज्यादा आयु के बच्चे एक सप्ताह में रिकवर कर जाएंगे। 0 से 14 साल तक के 2 फीसदी बच्चों को ही अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है। -डॉ. दिनेश खोसला, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ,

संभल जाएं क्योंकि सबसे छोटे शव, सबसे भारी होते हैं

पीजीआई में गुरुवार को कोरोना संक्रमण ने दो माह की एक बच्ची की जान ले ली। बच्ची का परिवार महेंद्रगढ़ का रहने वाला है। तस्वीर में बच्ची के शव को मिट्‌टी देने के लिए ले जाते उसका पिता है।
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