पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

तीसरी लहर के लिए जहां तैयारी अधूरी:छह सीचएसी में सिर्फ कोविड वार्ड की घोषणा, डॉक्टर कहां से आएंगे?

रोहतक6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सीएमओ डॉ. अनिल बिरला का कहना है सारे संसाधन पूरे किए जाएंगे। उच्चाधिकारियों को भी बता दिया है। - Dainik Bhaskar
सीएमओ डॉ. अनिल बिरला का कहना है सारे संसाधन पूरे किए जाएंगे। उच्चाधिकारियों को भी बता दिया है।
  • ये सवाल उठना जरूरी, क्योंकि 25-25 बेड के वार्ड के लिए 24 डॉक्टरों की पड़ेगी जरूरत; अभी जिले के लिए मात्र 4 हैं

जिले में तीसरी लहर में बच्चों को बताए जा रहे खतरे को देखते हुए सरकार का तैयारियों का दावा हकीकत की तस्वीर के आगे बड़ी चुनौती जैसा साबित हाे रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल में ही बना एकमात्र एसएनसीयू महज चार डॉक्टरों के भरोसे है। करीबन सभी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी हैै।

अभी सरकार सीएचसी स्तर पर 25-25 बेड के कोविड वार्ड बनाने की मंजूरी दे चुकी है। लेकिन यहां भी इंतजाम चैलेंज हैं। जिले में 6 सीएचसी हैं। ऐसे में कुल 150 बेड के कोविड वार्ड बनेंगे। मानक है कि 50 बेड पर 8 डॉक्टर होने चाहिए। ऐसे में 24 डॉक्टरों की जरूरत पड़ेगी। जबकि अभी केवल 4 बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। सीएमओ डॉ. अनिल बिरला का कहना है सारे संसाधन पूरे किए जाएंगे। उच्चाधिकारियों को भी बता दिया है।

पड़ोसी जिलों के साथ हमारे अस्पताल भी पीजीआई पर ही डिपेंड, 600 बेड बनेंगे, सच्चाई; यहां भी 96 डॉक्टर कम

यूएचएस कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने एक जून को बताया था कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सर्वाधिक संक्रमित होने के अंदेशे को लेकर पीजीआई में बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए 100 बेड का आईसीयू, वार्ड नंबर 14,15,16,17 में बच्चों के लिए 400 ऑक्सीजन युक्त बेड, 100 सामान्य बेड उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है।

कोविड की तीसरी लहर में यदि बच्चे संक्रमित होते हैं तो 600 बेड पर औसतन 96 डॉक्टरों की जरूरत होगी। वर्तमान में पीडियाट्रिक्स विभाग में 12 कंसल्टेंट और 4 पीजी डॉक्टर हैं। पीजीआई प्रशासन का दावा है कि कोविड के इलाज के लिए डॉक्टरों की कमी नहीं होने दी जाएगी।

महम में गंभीर हालत में हर बच्चा पीजीआई ही रेफर हुआ

महम का सिविल अस्पताल। यहां कोई बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में प्रबंधन का जिम्मा संभाले डाॅ. प्रवीण ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में एसएनसीयू व पीकू वार्ड नहीं हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले तकरीबन बच्चे यहां दी जाने वाली दवा से ठीक हो जाते हैं। कोई गंभीर होता है तो उसे पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। डीसी के साथ मीटिंग हो चुकी है। बच्चों के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के लिए मांग पत्र तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।

कलानौर में बच्चों के लिए एक भी डॉक्टर नहीं

नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू व पीकू वार्ड नहीं हैं। बच्चों का स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी यहां नहीं है। अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक डॉ. तेज ने बताया कि इलाज के लिए आने वाले लगभग बच्चे अस्पताल के चिकित्सकों की दवाइयों से ठीक हो जाते हैं। कोई गंभीर होता है तो उसे पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। बच्चों के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा व अन्य संसाधनों की लिस्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को दे दी जाएगी।

खबरें और भी हैं...