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कोरोना का कहर:कोविड-19 को हरा चुके लाेग अब थकान, बदन दर्द व भूख न लगने से हो रहे परेशान

रोहतक8 महीने पहले
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  • जिले में कोरोना संक्रमण से रिकवरी रेट 90 फीसदी तक पहुंचने के बाद भी खतरा
  • वायरस के साइड इफेक्ट खत्म होने में दो माह का लगेगा समय

जिले में पिछले एक सप्ताह से लगातार 100 से कम नए कोरोना संक्रमण के केस आने से राहत के संकेत दिख रहे हैं। जिले में कोरोना रिकवरी रेट 90 फीसदी पर पहुंच गया है। लेकिन फिर भी अभी खतरा टला नहीं है। कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके 35 साल से 65 वर्ष तक के मरीज पूरी तरह से रिकवर नहीं कर पा रहे हैं।

दाे माह पहले ठीक होकर अस्पताल और आइसोलेशन से बाहर आ चुके लोगों को कमजोरी, थकान, सिर में दर्द रहना, भूख न लगने जैसी कई शिकायतें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ये परेशानियां दूर होने में औसतन दो माह तक का समय लग सकता है।

पीजीआई में काेविड-19 की ड्यूटी देने वाले सीनियर चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों का हेल्थ अपडेट लेने पर पता चला है कि वो कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बीमारी के लक्षणों का अनुभव करते हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों में ठीक होने के 60 दिन बाद तक बीमारी के लक्षण पाए जा रहे हैं। जबकि ऐसे मरीज जो जिन्हें कोरोना वायरस की वजह से गंभीर समस्या हुई, उनमें ज्यादा दिनों तक बीमारी के लक्षण रहते हैं। ये साइड इफेक्ट खत्म होने पर दो माह तक का समय लग सकता है।

थकावट रहती है और बदन दर्द सहा नहीं जाता

सैनीपुरा निवासी 50 वर्षीय प्राइवेट जॉब करने वाले सुमेर परिवर्तित नाम ने बताया कि वो अगस्त माह में कोरोना पॉजिटिव हुए थे। उन्होंने शुरू में सभी जांच कराने के बाद होम आइसोलेशन में आ गए थे। 17 दिन तक आइसाेलेट रहने के बाद उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई गई थी। उन्होंने बताया कि वो कोरोना संक्रमणमुक्त तो हो गए लेकिन उसके साइड इफेक्ट दो माह बाद भी झेल रहा हूं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें थकावट और बदन दर्द महसूस होता रहा है। भूख लगना भी कम हो गई है। फिलहाल अभी किसी चिकित्सक के पास नहीं गए हैं।

थकान रहने और भूख न लगने की शिकायत बनी हुई है

सुभाष नगर निवासी 41 वर्षीय कारोबारी नरेंद्र परिवर्तित नाम ने बताया कि वो अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में कोरोना संक्रमित हुए थे। इसके बाद वे 17 दिन तक होम आइसोलेशन में रहे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 17 दिन बाद संक्रमणमुक्त घोषित कर दिया गया लेकिन कोरोना के साइड इफेक्ट से मुक्त नहीं हो पाया हूं। उन्होंने बताया कि हल्का काम करने पर भी थकान महसूस होने लगती है। संक्रमण ग्रस्त होने से पहले जैसी भूख भी नहीं लगती। कमजोरी महसूस होने पर और दिक्कत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों से सलाह लेने पर बताया गया कि करीब एक से डेढ़ माह में ये परेशानी खत्म होगी।

वायरस शरीर में इनफ्लेमेट्री रिएक्शन के जरिए डालता है प्रभाव

एक्सपर्ट बताते हैं कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर में बने एंटीजन इम्यून सिस्टम में परिवर्तन कर देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम अति प्रतिक्रिया करने लगता है। इसी कारण बुखार, बदन दर्द और अन्य समस्याएं होने लगती हैं। शरीर में इनफ्लेमेट्री रिएक्शन होने लगता है, जो पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है। ऐसे में वायरस खत्म होने के बाद भी इनफ्लेमेट्री सेल्स और केमिकल बने रहते हैं। कुछ मामलों को छोड़ दें तो ये लक्षण धीरे-धीरे ठीक भी हो जाते हैं।

न्यूराे सिस्टम पर असर

कोरोना से होने के बाद मरीज़ के न्यूरो सिस्टम पर भी असर पड़ता है। कोविड-19 से ठीक होने के बाद नसों में लकवा हो सकता है, कभी-कभी ये दिमाग पर भी असर करता है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस

कोविड-19 संक्रमण के कारण जिन लाेगाें के फेफड़े ठीक से काम नहीं करते यानी उन्हें एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम हो जाता है, उनमें पल्माेनरी फाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है। इस बीमारी में फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

सीधी बात (डाॅ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन)

Q. कोरोना संक्रमण केस कम मिलने की क्या वजह है ?
A. कांटेक्ट ट्रेसिंग कर सैंपलिंग कर पॉजिटिव केस आइसोलेट कर देते हैं। इसलिए संक्रमण का प्रसार नहीं हो पा रहा।
Q. लगातार सैंपलिंग का ग्राफ गिर रहा है?
A. ऐसा नहीं है, रोजाना एक से डेढ़ हजार लोगों की सैंपलिंग कराई जा रही है।
Q. संक्रमणमुक्त होने वाले मरीजों में साइड इफेक्ट आने लगे हैं ?
A. वायरस का अटैक होने के बाद कुछ समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। चिकित्सीय परामर्श लेकर इलाज करा सकते हैं।

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